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महंगाई के मोर्चे पर 'आंकड़ों' में राहत, 15 महीने के निचले स्तर पर आई Inflation
रिटेल महंगाई दर अब गिरकर 5.66 प्रतिशत पर आ गई है. मुख्य रूप से खाने का सामान सस्ता होने से महंगाई दर में कमी आई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महंगाई के मोर्चे पर आंकड़ों में कुछ राहत मिली है. मार्च महीने में देश में रिटेल महंगाई दर (Inflation Rate) में कमी आई है. इसे 'आंकड़ों में राहत' इसलिए कहा जा सकता है कि क्योंकि दुकानदारों की रेट लिस्ट में जिस वस्तु के दाम चढ़ जाते हैं, उनके नीचे उतरने के मामले बहुत कम ही देखने को मिलते हैं. रिटेल महंगाई दर मार्च में 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है. यह मोदी सरकार और रिजर्व बैंक के लिए सबसे ज्यादा राहत भरी खबर है, क्योंकि महंगाई के बढ़ते आंकड़े ने दोनों को परेशान कर रखा था.
इस वजह से आई कमी
रिटेल महंगाई दर अब गिरकर 5.66 प्रतिशत पर आ गई है. मुख्य रूप से खाने का सामान सस्ता होने से महंगाई दर में कमी आई है. मार्च में मुद्रास्फीति का आंकड़ा RBI के संतोषजनक स्तर की ऊपरी सीमा 6% के भीतर है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति (Inflation) फरवरी 2023 में 6.44 प्रतिशत और एक साल पहले मार्च में 6.95% थी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फीति मार्च में 4.79% रही. फरवरी में यह 5.95 प्रतिशत और एक साल पहले इसी अवधि में 7.68% थी.
2023-24 के लिए अनुमान
मुख्यतौर पर अनाज, दूध और फलों के दामों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2022 में 5.7 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी 2023 में 6.4 फीसदी हो गई थी. आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023-24 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति के 5.2 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है. पिछले आंकड़ों की बात करें, तो सितंबर 2022 में रिटेल महंगाई दर 7.41%, अक्टूबर में 6.77%, नवंबर में 5.88%, दिसंबर में 5.72%, जनवरी 2023 में 5.72% और फरवरी में 5.72% रही थी.
पहली बार दिया स्पष्टीकरण
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने महंगाई के नाम पर कई बार कर्ज महंगा किया है. इस बार भी माना जा रहा था कि RBI रेपो रेट में इजाफा कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. RBI के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि उसे महंगाई को नियंत्रित करने में नाकाम रहने पर सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा है. हालांकि, रिजर्व बैंक ने अपने स्पष्टीकरण में क्या बताया है, इसकी जानकारी उस आम आदमी को नहीं दी गई है, जो महंगाई से सबसे ज्यादा पीड़ित है.
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