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विज्ञापनों के लिए ASCI की जेंडर गाइडलाइन्स को बखूबी समझाती है Rediffusion की रिपोर्ट
आजकल TV पर आने वाले विज्ञापनों में जेंडर स्टीरियोटाइप कंटेंट काफी ज्यादा है. खासकर महिलाओं को एक प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जाता है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
आजकल TV पर आने वाले विज्ञापनों में जेंडर स्टीरियोटाइप कंटेंट काफी ज्यादा है. खासकर महिलाओं को एक प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जाता है. इस तरह के विज्ञापन समाज में महिला या पुरुषों की वही इमेज पेश करते हैं, जो दशकों से चली आ रही है या फिर कहीं-कहीं उससे भी बदतर. इसी को ध्यान में रखते हुए एडवरटाइजिंग स्टैण्डर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने विज्ञापनों में हानिकारक जेंडर स्टीरियोटाइप्स पर दिशानिर्देश जारी किए हैं. इन दिशानिर्देशों में कई महत्वपूर्ण बातें हैं और इन महत्वपूर्ण बातों को एडवरटाइजिंग एजेंसी Rediffusion ने बेहद खूबसूरती के साथ एक रिपोर्ट के जरिए सबके सामने रखने की कोशिश की है. रिपोर्ट की शुरुआत में ही कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर संदीप गोयल ने इंडिया हैबिटेट सेंटर का वो किस्सा बयां किया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है.
दरअसल, इस मौके पर इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसकी चीफ गेस्ट थीं महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी. संदीप ने लिखा है, 'कार्यक्रम शुरू करने से पहले स्मृति ईरानी ने ASCI के चेयरमैन सुभाष कामथ से पूछा कि ASCI के कितने मेंबर हैं, उन्होंने जवाब दिया 800. इस पर स्मृति ने पूछा कि कहां कितने मौजूद हैं, कामथ ने कमरे में नज़र घुमाते हुए धीमी आवाज में कहा - तीन. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने जो कहा वो एक सीख की तरह है. उन्होंने कहा- शायद आपके सदस्य इस गाइडलाइन्स को गंभीरता से नहीं लेते, इसलिए वे यहां मौजूद नहीं हैं. इसका अर्थ है कि बदलाव की शुरुआत घर से होनी चाहिए'.
Rediffusion की इस रिपोर्ट में ASCI की गाइडलाइन्स के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसे पढ़ने के बाद कुछ न समझ आने की गुंजाइश ही खत्म हो जाएगी. इन दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि विज्ञापनदाताओं को किस तरह रूढ़िवादी मूल्यों और पूर्वाग्रहों से बचना चाहिए. गाइडलाइन्स में कहा गया है कि विज्ञापनों में महिला-पुरुषों को दिखाते हुए रूढ़िवादी सोच का इस्तेमाल न किया जाए. इसी तरह, ऐसे विज्ञापनों से बचा जाए जिसमें लड़कों को हमेशा 'डेयरिंग' और लड़कियों को 'केयरिंग' दिखाया जाता है. साथ ही विज्ञापनों में ऐसा चित्रण भी न किया जाए, जो दर्शाए कि डॉल से खेलना लड़कों का काम नहीं या लड़कियों को उछल-कूद आदि से दूर रहना चाहिए, क्योंकि हमारे समाज में जेंडर के हिसाब से एक्टिविटी निर्धारित हैं.
ASCI की गाइडलाइन्स यह भी कहती हैं कि विज्ञापनों में सेम-सेक्स रिलेशनशिप का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए. दिशानिर्देशों के अनुसार,विज्ञापनों में महिलाओं की एक जैसी छवि प्रदर्शित करना से बचा जाना चाहिए. जैसे कि घर का कामकाज केवल उनकी ही जिम्मेदारी है. गाइडलाइन्स में यह भी कहा गया है कि किसी टास्क को जेंडर से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उदाहरण के तौर पर पुरुष बच्चों की नैपी नहीं बदल सकते या महिलाएं ढंग से कार पार्क नहीं कर सकतीं.
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