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RBI का बड़ा एक्शन, HSBC और IIFL Samasta Finance पर ठोका भारी जुर्माना, जानें क्या रही वजह?
रिजर्व बैंक ने कहा कि यह कार्रवाई नियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित हैं और इसका उद्देश्य संस्थाओं द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर फैसला सुनाना नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को हॉन्गकॉन्ग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (HSBC) और आईआईएफएल समस्त फाइनेंस (IIFL Samasta Finance Limited) पर पेनल्टी लगाने का एलान किया है. रिजर्व बैंक के मुताबिक इन दोनों पर नियमों का पालन न करने की वजह से पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया है. HSBC पर करीब 67 लाख रुपये और IIFL पर 33 लाख रुपये से ज्यादा का पेनल्टी लगाया गया है. रिजर्व बैंक लगातार नियमों का पालन न करने पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ एक्शन ले रहा है.
HSBC पर क्यों की गई कार्रवाई?
रिजर्व बैंक ने बताया कि उसने केवाईसी और जमा पर ब्याज दर से संबंधित निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 66.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा, आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड पर 'गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी- प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकार करने वाली कंपनी और जमा स्वीकार करने वाली कंपनी (रिजर्व बैंक) निर्देश, 2016' और अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) निर्देशों के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने के लिए 33.1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
नोटिस जारी किया गया
आरबीआई ने बताया कि उसने 31 मार्च 2023 तक HSBC की वित्तीय स्थिति का निरीक्षण किया था, जिसमें नियामक अनुपालन में खामियां पाई गईं. इसके बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बैंक ने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) अलर्ट के निपटान का कार्य अपनी समूह कंपनी को आउटसोर्स कर दिया था. कुछ उधारकर्ताओं के अनसिक्योर विदेशी मुद्रा जोखिम की जानकारी ऋण सूचना कंपनियों को नहीं दी गई थी और कुछ अयोग्य संस्थाओं के नाम पर बचत जमा खाते खोले गए थे.
IIFL Samasta पर इस वजह हुई कार्रवाई
RBI ने बताया कि उसने 31 मार्च 2023 तक कंपनी की वित्तीय स्थिति का निरीक्षण किया था, जिसमें नियामक अनुपालन में कमियां पाई गईं. इसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. जांच के दौरान यह पाया गया कि कंपनी ने आरबीआई के 'निष्पक्ष आचरण संहिता' संबंधी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कुछ उधारकर्ताओं से ऋण वितरण या चेक जारी करने की तिथि से पहले की अवधि के लिए ब्याज वसूला. इसके अलावा कंपनी 90 दिनों या उससे अधिक समय से बकाया राशि वाले कुछ ऋण खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत करने में विफल रही.
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