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नकदी की कमी को दूर करने के लिए RBI खरीदेगा 40,000 करोड़ रुपये के सरकारी बांड

बैंकिंग सिस्टम में 40 हजार करोड़ रुपये इन्फ्यूज करने के लिए आरबीआई 17 अप्रैल को अलग-अलग परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

बैंकिंग सेक्टर में चल रही नकदी (पैसों) की कमी को दूर करने के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है. RBI ने 40,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड वापस खरीदने (Buyback) का ऐलान किया है, जो 9 मई को होगा. यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि बैंकिंग सिस्टम में काफी समय से पैसों की कमी बनी हुई है. 2 मई को यह कमी 78,481 करोड़ रुपये की थी.

जो बांड खरीदे जाएंगे, उनमें 6.18 प्रतिशत GS 2024, 9.15 प्रतिशत GS 2024, और 6.89 प्रतिशत GS 2025 शामिल हैं, जो क्रमशः 4 नवंबर, 14 नवंबर और 16 जनवरी को परिपक्व (मियाद खत्म) होंगे. RBI का यह अप्रत्याशित कदम वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है.

यह फैसला RBI की एक स्मार्ट चाल

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह फैसला RBI की एक स्मार्ट चाल है ताकि वह समय रहते नकदी की स्थिति को संभाल सके. इससे पहले फरवरी और मार्च में भी RBI ने कई बार पैसों की सप्लाई को ठीक करने के लिए अलग-अलग उपाय किए थे. इन दो महीनों में RBI ने 14 बार खास तरह की लोन नीलामी (repo operations) की, जिनसे करीब 8 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ और मार्च के दूसरे हिस्से में 3.9 लाख करोड़ रुपये बैंकों में डाले गए.

5 अप्रैल को RBI गवर्नर ने कहा था कि रिजर्व बैंक समय के अनुसार अलग-अलग उपाय करेगा ताकि पैसों की सप्लाई संतुलित रहे और बाजार में ब्याज दरें ठीक तरीके से चलें. इस बॉन्ड बायबैक से बैंकों को कुछ राहत मिलेगी और सिस्टम में पैसे आएंगे. यह फैसला दिखाता है कि RBI देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है.

क्या है ओपन मार्केट ऑपरेशन?

इस पॉलिसी के तहत आरबीआई मनी सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए बॉन्ड, सिक्योरिटीज जैसे सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदती है या बेचती है. बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को बढ़ाने और अर्थव्यस्था को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदती है, जिससे बैंक के पास पैसा आता है. बैंक अधिक कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे. इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.  

इसी तरह से इकोनॉमी में एक्सेस लिक्विडिटी को कम करने के लिए आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों को बेच देता है, जिससे बैंकों के पास लोन देने की कैपेसिटी कम हो जाएगी और इस तरह से मार्केट में पैसा कम पहुंचेगा. ओपन मार्केट ऑपरेशन एक ऐसा टूल है, जिसका इस्तेमाल केंद्रीय बैंक महंगाई, ब्याज दरों और मुद्रा की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए करती है.
 


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