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बैंकों को राहत देने के लिए RBI का बड़ा कदम, 80,000 रुपये के बॉन्ड की खरीदने की योजना
RBI ने यह कदम बैंकों में समुचित नकदी सुनिश्चित करने, नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के प्रभाव को सुनिश्चित करने और मौद्रिक नीति के दौरान बदलाव को समर्थन देने के लिए उठाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी डालने के उद्देश्य से अपनी ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत बॉन्ड खरीदारी का बड़ा कदम उठाया है. यह योजना 80,000 करोड़ रुपये की राशि को चार खंडों में विभाजित करेगी, जो 3 अप्रैल, 8 अप्रैल, 22 अप्रैल, और 29 अप्रैल को प्रत्येक खंड में 20,000 करोड़ रुपये की होगी. यह निर्णय मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy) की समीक्षा बैठक से ठीक एक सप्ताह पहले मंगलवार को आरबीआई की 90वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में लिया गया है, जोकि बैंकिंग प्रणाली में मौजूदा नकदी की स्थिति को स्थिर और मजबूत बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
बैंकों के लिए नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का समर्थन
आरबीआई का यह कदम बैंकों के लिए नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के लाभ को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी होती है तो ब्याज दरों में कटौती का प्रभाव और बेहतर तरीके से लागू होता है. रिजर्व बैंक ने इस कदम की घोषणा करते हुए कहा, "हम लगातार नकदी की स्थिति और बाजार की बदलती परिस्थितियों का आकलन करेंगे, ताकि समुचित नकदी सुनिश्चित की जा सके."
क्या है ओएमओ खरीदारी योजना का उद्देश्य?
एक्सपर्ट्स ने इस कदम को केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता के रूप में देखा है. उनका कहना है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि वह बैंकिंग प्रणाली में समुचित नकदी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जो ब्याज दरों में कटौती के लिए जरूरी है. हालांकि, यह उम्मीद जताई जा रही है कि आरबीआई आगामी बैठक में किसी प्रकार का बड़ा बदलाव नहीं करेगा. इसके बावजूद, यह कदम केंद्रीय बैंक द्वारा भविष्य में नीतिगत दरों में बदलाव की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है.
आगामी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
आर्थिक विश्लेषकों का यह मानना है कि रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति 7 से 9 अप्रैल के बीच अपनी बैठक में दूसरी बार नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकती है. यह कटौती फरवरी की बैठक में हुई 25 आधार अंकों की कटौती के बाद की जाएगी. रिजर्व बैंक के हालिया आंकड़ों के अनुसार, रविवार को शुद्ध नकदी 89.398 करोड़ रुपये थी, जबकि 21 मार्च को मुख्य नकदी 1.1 लाख करोड़ रुपये अधिक थी.
आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा ‘‘इसे एक उपलब्धि समझते हुए हम मानते हैं कि आरबीआई की भूमिका प्रारंभिक लक्ष्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित हुई है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हम परंपरा व परिवर्तन के संगम पर खड़े हैं...जहां मूल्य स्थिरता, वित्तीय स्थिरता तथा आर्थिक वृद्धि की अनिवार्यताएं तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी, वैश्विक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और बढ़ती सार्वजनिक अपेक्षाओं के साथ जुड़ती हैं.’’ गवर्नर ने कहा कि अगला दशक भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्तीय ढांचे को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित होगा. आरबीआई वित्तीय समावेश को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. ‘‘हम ग्राहक सेवाओं में निरंतर सुधार तथा उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे. हमारा प्रयास वित्तीय स्थिरता व दक्षता के हितों को संतुलित कर हमारे नियामक ढांचे को लचीला बनाना होगा. हम प्रौद्योगिकी व नवाचार का समर्थन करना जारी रखेंगे. हम सतर्क, लचीले और दूरदर्शी बने रहेंगे.’’
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