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कर्ज महंगा होना तय! RBI आज कर सकता है रेपो रेट में इजाफा, जानें कितना बढ़ेगा बोझ 

बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में इजाफा RBI का प्रमुख हथियार माना जाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

बढ़ती महंगाई के बीच कर्ज महंगा हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज खत्म हो रही है और इसकी प्रबल संभावना है कि RBI नीतिगत दरों यानी रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोत्तरी की घोषणा कर दे. माना जा रहा है कि आरबीआई रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत तक का इजाफा कर सकता है. बता दें कि 5 अगस्त को RBI ने रेपो रेट को आधा फीसदी बढ़ाकर 5.40% कर दिया था.

बैंक तुरंत कर देते हैं इजाफा
रेपो रेट में इजाफे का मतलब है, बैंकों के लोन महंगे हो जाना. जैसे ही RBI इसमें बढ़ोत्तरी का ऐलान करता है, उसके बाद से बैंक लोन महंगा कर देते हैं. दरअसल, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में इजाफा RBI की नीति का प्रमुख हिस्सा है. इसके अलावा, इस समय अमेरिका आक्रामक रुख के साथ ब्याज दरों में इजाफा कर रहा है. इससे अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों पर भी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बन गया है.

सभी लोन होंगे महंगे! 
लोन महंगा होने से आपकी EMI तो बढ़ेगी ही, साथ ही मकानों की बिक्री भी प्रभावित होगी. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि RBI के इस कदम से रियल एस्टेट मार्केट की रिकवरी पर असर पड़ेगा, जो पहले ही धीमी गति से पटरी पर लौट रही है. बात अकेले होम लोन की नहीं है, रेपो रेट बढ़ने से ऑटो लोन, एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन भी महंगा हो जाएगा.

क्या होती है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. बैंक इस पैसे से कस्टमर्स को LOAN देते हैं. रेपो रेट बढ़ने का सीधा सा मतलब है कि बैंकों को मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाएगा और इसकी भरपाई वो ग्राहकों से करेंगे. इसीलिए कहा जा रहा है कि Repo Rate बढ़ने से होम लोन, व्हीकल लोन आदि की EMI ज्यादा हो सकती है. इसके उलट जब यह दर कम होती है तो बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है.

क्या होती है रिवर्स रेपो रेट?
अब बात करते हैं रिवर्स रेपो रेट की. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह रेपो रेट से उलट है. रिवर्स रेपो रेट वो दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से RBI में जमा धन पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट मार्केट में कैश-फ्लो को नियंत्रित करने में काम आती है. दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार में जब भी बहुत ज्यादा कैश दिखाई देता है, रिजर्व बैंक रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज की चाह में अपना पैसा उसके पास जमा करें. बिल्कुल, वैसे ही जैसे आप अपना पैसा बैंक में रखते हैं.
 


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