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लोगों के निवेश की कौनसी आदत ने RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की बढ़ा दी टेंशन?
रिजर्व बैंक ने इस बार भी नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इस बीच RBI गवर्नर लोगों के निवेश की एक आदत से टेंशन में आ गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास लोगों के निवेश की एक आदत को लेकर टेंशन में हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि ये आदत देश के बैंकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. दरअसल, हाल ही में SBI एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि भले ही बैंकों की लोन ग्रोथ बढ़ी है, लेकिन डिपॉजिट्स में इजाफा नहीं हो रहा है. यानी कि अब लोग बैंकों में पैसा रखने से कतराने लगे हैं. इसके बजाये वे म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं. इसी को लेकर RBI गवर्नर ने चिंता जाहिर की है.
डिपॉजिट ग्रोथ में गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की तीन दिवसीय बैठक में शक्तिकांत दास ने रिटेल मनी के वैकल्पिक निवेश मार्गों में जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे देश के बैंकों के लिए स्ट्रक्चरल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. दास ने आगे कहा कि यह देखा गया है कि ग्राहकों के लिए वैकल्पिक निवेश मार्ग अधिक आकर्षक होते जा रहे हैं और बैंकों को फंडिंग के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह यह है कि बैंक में डिपॉजिट ग्रोथ क्रेडिट के मुकाबले कम है.
बैंकों को सुझाव भी दिया
दास ने कहा कि इसके चलते बैंकों को ऋण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म नॉन-रिटेल डिपॉजिट्स और लाइबिलिटी के अन्य साधनों का ज्यादा सहारा लेना पड़ रहा है, जो बैंकों के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने बैंकों को सुझाव देते हुए कहा कि बैंकों को अपने व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाकर इनोवेटिव प्रोडक्ट्स और सर्विस की पेशकश के जरिए घरेलू वित्तीय बचत को जुटाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए.
बदल गई है पसंद
SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया था कि बैंकों के डिपॉजिट्स में कमी आ रही है. क्योंकि लोग म्यूचुअल फंड और शेयरों में जमकर पैसा लगा रहे हैं. हाल के महीनों में केवल म्यूचुअल फंड में ही 21000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आया है. इसी तरह शेयर बाजार में आने वाला निवेश भी लगातार बढ़ रहा है. पहले, लोग बैंकों में पैसा रखना पसंद करते थे. लेकिन अब बैंकों में मिलने वाले ब्याज से ज्यादा उन्हें म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से मिल जाता है, इसलिए वे रिस्क उठाकर यहां निवेश को तवज्जो दे रहे हैं. एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि यदि ऐसा ही रहा तो बैंकों के पास नकदी का भारी संकट खड़ा हो जाएगा.
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