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टाटा समूह की मुराद पूरी, अब इस कंपनी की नहीं करनी होगी स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग! 

खबर है कि रिजर्व बैंक ने टाटा संस के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को मंजूर कर लिया है. इससे अब उसे अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिल गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

टाटा समूह अपनी कंपनी 'टाटा संस' (Tata Sons) की शेयर बाजार में लिस्टिंग से बच रहा था, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियम उसकी इस कोशिश में आड़े आ रहे थे. हालांकि, अब समूह बीच का रास्ता निकालने में सफल हो गया है. यानी टाटा संस को अब शेयर मार्केट में लिस्ट होने की ज़रूरत नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा संस ने अनिवार्य लिस्टिंग से छूट के लिए RBI को एक रीस्ट्रक्चरिंग प्लान सौंपा है, जिसे रिजर्व बैंक ने मंजूरी दी है. 

इसलिए ज़रूरी थी लिस्टिंग 
टाटा संस के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत उसे अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी यानी NBFC के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा. ऐसे में टाटा संस को स्टॉक मार्केट में अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिल जाएगी. हालांकि इसके लिए कंपनी को कुछ नियामक शर्तों को भी पूरा करना होगा. गौरतलब है कि अक्टूबर 2021 में RBI के एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि NBFC अपर लेयर में आने वाली कंपनियों को तीन साल के भीतर अनिवार्य रूप से लिस्ट होना होगा. ऐसे में टाटा समूह के लिए भी टाटा संस को बाजार में लिस्ट करना ज़रूरी हो गया था.   

2025 तक होनी थी लिस्टिंग 
अपर लेयर में ऐसी कंपनियों को रखा जाता है जो सिस्टम के लिए काफी महत्वपूर्ण हों और इनका वित्तीय प्रणाली के साथ महत्वपूर्ण रिश्ता हो. RBI ने टाटा समूह की इस कंपनी को 2022 में एनबीएफसी-अपर लेयर में रखा था. इस लिहाज से टाटा संस को सितंबर 2025 तक लिस्ट होना था, लेकिन अब उसें रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के जरिए इससे छूट प्राप्त कर ली है. खबर है कि कंपनी ने आरबीआई के नियमों के पालन के लिए अपना कर्ज जीरो कर दिया है.

पहले कंपनी पर था इतना कर्ज
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस पर सितंबर 2023 तक 15200 करोड़ रुपए का कर्ज था. जबकि कंपनी के पास 2500 करोड़ से अधिक का स्टैंडएलोन कैश और कैश इक्विवैलेंट था. इसी साल अप्रैल में खबर आई थी कि टाटा संस आईपीओ लाने से बचने के लिए RBI से अपर लेयर NBFC नियमों में छूट की अपील की थी, मगर RBI ने इससे इंकार कर दिया था. तब यह कहा गया था कि यदि कंपनी कर्ज चुकाकर लोन को रीस्ट्रक्चर करने में सफल रहती है और टाटा कैपिटल में अपनी होल्डिंग को किसी अन्य यूनिट में ट्रांसफर कर देती है, तो उस स्थिति में उसे इन्वेस्टमेंट या अपर लेयर NBFC के रूप में डीरजिस्टर किया जा सकेगा. बता दें कि टाटा संस में टाटा केमिकल्स की कुल हिस्सेदारी करीब 3% है.
 


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