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प्राइवेट कंपनियों की सेल्स ग्रोथ 7.8%, बढ़ती मांग से इकोनॉमी को बूस्ट: RBI

प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में बढ़ती मांग, बेहतर सेल्स ग्रोथ और मजबूत मुनाफा यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. दरअसल, प्राइवेट सेक्टर की गैर-वित्तीय कंपनियों में मांग बढ़ने से वित्त वर्ष 2024-25 में सेल्स ग्रोथ तेज हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन कंपनियों की नेट सेल्स में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है.

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने दी ग्रोथ को रफ्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, गैर-सरकारी गैर-वित्तीय (NGNF) पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर्स में मजबूती देखने को मिली है. FY25 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेल्स ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रही, जबकि सर्विस सेक्टर ने 10.1 प्रतिशत की मजबूत डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की. इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़े क्रमशः 5 प्रतिशत और 7.4 प्रतिशत थे.

किन सेक्टर्स ने बढ़ाई मांग

आरबीआई के अनुसार, सर्विस सेक्टर में तेज वृद्धि का मुख्य कारण ‘परिवहन और भंडारण सेवाएं’ तथा ‘सूचना और संचार’ क्षेत्रों में बढ़ती मांग रही. इन क्षेत्रों में विस्तार ने कुल सेल्स ग्रोथ को सपोर्ट किया.

हालांकि, बढ़ती बिक्री के साथ कंपनियों के खर्चों में भी इजाफा हुआ. कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण 2024-25 में ऑपरेशनल खर्च 8.4 प्रतिशत बढ़ा. इसका असर ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर पड़ा, जिसकी ग्रोथ घटकर 8.4 प्रतिशत रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 15.3 प्रतिशत थी.

नॉन-ऑपरेशनल इनकम और टैक्स में राहत से बढ़ा मुनाफा

ऑपरेशनल दबाव के बावजूद कंपनियों के कुल मुनाफे में मजबूत उछाल देखने को मिला. आरबीआई के मुताबिक, नॉन-ऑपरेशनल इनकम में वृद्धि और टैक्स खर्च में कमी के चलते FY25 में कर पश्चात लाभ (PAT) 23.1 प्रतिशत बढ़ा. खास बात यह रही कि सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने 40.2 प्रतिशत की शानदार प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 12.8 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है.

आंतरिक स्रोत बने फंडिंग का मुख्य आधार

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों की कुल फंडिंग में 57.2 प्रतिशत हिस्सा आंतरिक स्रोतों से आया, जो प्रमुख फाइनेंसिंग स्रोत बना रहा. वहीं, सकल अचल परिसंपत्तियों में निवेश भी मजबूत रहा और यह कुल फंड उपयोग का 41.1 प्रतिशत रहा.


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