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1945 के पुराने नियम में बदलाव की तैयारी, दवाओं के आयात और रिसर्च को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

सरकार ने औषधि नियम, 1945 के नियम 31 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. मौजूदा व्यवस्था के तहत आयात की जाने वाली दवाओं की कुल स्वीकृत मियाद का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के समय बचा होना जरूरी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

केंद्र सरकार दवाओं के आयात और फार्मास्युटिकल रिसर्च से जुड़े नियमों को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में दो अहम संशोधनों का मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित बदलावों से दवाओं के आयात की प्रक्रिया सरल होगी, रिसर्च एवं टेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा और दवा कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान हो सकता है.

दवाओं के आयात नियमों में होगा बड़ा बदलाव

सरकार ने औषधि नियम, 1945 के नियम 31 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. मौजूदा व्यवस्था के तहत आयात की जाने वाली दवाओं की कुल स्वीकृत मियाद का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के समय बचा होना जरूरी है. अब सरकार इस नियम को बदलकर न्यूनतम 12 महीने की शेष मियाद की शर्त लागू करना चाहती है.

सरकार का मानना है कि इससे दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी बनेगी, स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा और मियाद संबंधी सख्त नियमों के कारण होने वाली दवा बर्बादी को कम किया जा सकेगा.

कुछ दवाओं पर पुराना नियम रहेगा लागू

बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्युटिकल दवाओं के लिए वर्तमान 60 प्रतिशत शेष मियाद का नियम जारी रहेगा. मंत्रालय के मुताबिक इन उत्पादों की संवेदनशील प्रकृति और जन स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए इनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर नहीं पड़ेगा असर

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन केवल आयात के समय बची हुई मियाद की शर्त से संबंधित है. दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े सभी मौजूदा नियामकीय मानदंड पहले की तरह लागू रहेंगे.

दवा कंपनियों को मिलेगी राहत

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिशत आधारित गणना के बजाय निश्चित समय सीमा लागू होने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला को फायदा मिलेगा. इससे विदेशी निर्यातक बेहतर योजना बना सकेंगे और वेयरहाउसिंग तथा स्टॉक प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा.

विशेषज्ञों के अनुसार नए नियम से आयातकों के लिए अनुपालन आसान होगा और दवा क्षेत्र में कारोबार करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं अनुमानित बन सकेगी.

टेस्टिंग और रिसर्च के लिए आसान होगा आयात

सरकार ने एक अन्य मसौदा संशोधन में परीक्षण, विश्लेषण और गैर-क्लीनिकल रिसर्च के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात को भी आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है. फिलहाल इसके लिए लाइसेंस या फॉर्म-11 की आवश्यकता होती है.

नए प्रस्ताव के तहत आवेदकों को केवल ऑनलाइन पूर्व सूचना देनी होगी और एक्नॉलेजमेंट मिलने के बाद वे दवाओं का आयात कर सकेंगे. इससे रिसर्च और परीक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है.

इन दवाओं के लिए लाइसेंस की शर्त जारी रहेगी

प्रस्तावित व्यवस्था सेक्स हार्मोन, साइटोटॉक्सिक दवाओं, बीटा-लैक्टम दवाओं, जीवित सूक्ष्मजीवों वाले जैविक उत्पादों तथा मादक एवं साइकोट्रोपिक पदार्थों पर लागू नहीं होगी. इन श्रेणियों की दवाओं के आयात के लिए पहले की तरह लाइसेंस लेना अनिवार्य रहेगा.

हितधारकों से मांगी गई राय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दोनों मसौदा संशोधनों को सार्वजनिक कर दिया है और उद्योग से जुड़े हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं. सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है.

क्या होगा फायदा?

1. दवाओं के आयात की प्रक्रिया आसान होगी.
2. सप्लाई चेन और स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा.
3. मियाद संबंधी कारणों से होने वाली बर्बादी कम होगी.
4. रिसर्च और परीक्षण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
5. दवा उद्योग में कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी.
6. फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश और नवाचार को गति मिल सकती है.


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