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नहीं थम रहा है पूजा खेड़कर का विवाद, अब अमिताभ कांत ने ये कहकर उठाया मामला?
पूजा के खिलाफ यूपीएससी की ओर से कार्रवाई करते हुए उनकी ट्रेनिंग को कैंसिल कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर उनकी मां को पुलिस किसान को धमकाने के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लाल बत्ती से लेकर अलग रूम की मांग को लेकर विवादों में आई ट्रेनी आईएएस पूजा खेड़कर का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले जहां उनकी मां को गिरफ्तार किया गया उसके बाद उनकी ट्रेनिंग को भी रद्द कर दिया गया. इससे भी परे अब नीति आयोग के पूर्व सीईओ और मौजूदा जी 20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा है कि डिस्एबिलिटी क्राइटेरिया की एक बार फिर समीक्षा होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने एससी एसटी ओबीसी क्राइटेरिया का समर्थन किया है.
अमिताभ कांत ने कही क्या बात?
जी 20 शेरपा अमिताभ कांत ने इस पूरे मामले को लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि ‘शीर्ष सिविल सेवाओं में प्रवेश के लिए यूपीएससी के माध्यम से धोखाधड़ी के कई मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे सभी मामलों की पूरी जांच होनी चाहिए और सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.' चयन के लिए योग्यता और सत्यनिष्ठा के आधार से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए. मैं एससी/एसटी या ओबीसी आरक्षण के पक्ष में हूं. क्रीमी लेयर नियम लागू होने के साथ ये आरक्षण जारी रहना चाहिए. हालाँकि, शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांगों के लिए मौजूदा आरक्षण और शीर्ष सिविल सेवाओं के लिए तीसरे लिंग के लिए प्रस्तावित 1% आरक्षण की समीक्षा करने की आवश्यकता है. उनका दुरुपयोग हो रहा है.
पूजा खेड़कर की कैंसिल हो चुकी है ट्रेनिंग
ट्रेनी आईएएस पूजा खेड़कर के मामले के सामने आने के बाद अब तक इस मामले में कई तरह की कार्रवाई हो चुकी है. यूपीएससी की ओर से कार्रवाई करते हुए उनकी ट्रेनिंग को कैंसिल कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर उनकी मां को भी पुलिस जमीन के लिए किसान को धमकाने के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है. पुलिस ने उनकी मां के पास से पिस्तौल भी बरामद की है. यूपीएससी की ओर से उनके खिलाफ गलत जानकारियां देने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया है. यूपीएससी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है.
आखिर क्या होता है विक्लांगता कोटा?
विक्लांगता कोटा के तहत यूपीएससी में कुल पदों का एक निश्चित प्रतिशत उन लोगों के लिए सुरक्षित होता है जो लोग विक्लांग होते हैं. इस कोटे का मकसद सभी वर्गों तक अवसर बराबर संख्या में उपलब्ध कराना है. केन्द्र सरकार के अधिनियम 1995 के अनुसार कुल पदों का तीन प्रतिशत विक्लांग लोगों के लिए सुनिश्चित होता है. इसमें वो लोग शामिल होते हैं जो लोग कम देख सकते हैं, कम सुन सकते हैं. यही नहीं जो लोग हड्डियों, ज्वॉइंट्स और मसल्स से विक्लांग होते हैं वो भी इसमें शामिल हैं.
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