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PhonePe ने IPO के लिए 4 मर्चेंट बैंकर्स किए नियुक्त, कंपनी की 15 अरब डॉलर वैल्यूएशन पर नजर
फोनपे ने FY24 में 73% की सालाना ग्रोथ दर्ज की और इसका रेवेन्यू 5,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे ने अपने शेयर बाजार में लिस्टिंग (IPO) के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेपी मॉर्गन, सिटी और मॉर्गन स्टेनली को सलाहकार नियुक्त किया है. सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की मूल्यांकन (valuation) लगभग 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. फोनपे मार्च के पहले सप्ताह में IPO की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. इस पेशकश में नए शेयर (primary issue) और पहले के निवेशकों के शेयर (secondary issue) दोनों शामिल होंगे. कंपनी FY26 तक स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की योजना बना रही है. जरूरत के हिसाब से आगे और सलाहकार जोड़े जा सकते हैं.
भारत के सबसे बड़े टेक IPO में से एक
सूत्रों के मुताबिक, फोनपे का IPO एक अरब डॉलर से ज्यादा का हो सकता है, जो भारत के सबसे बड़े टेक IPO में से एक होगा. कंपनी चाहती है कि निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिले, लेकिन साथ ही 15 अरब डॉलर तक का वैल्यूएशन भी हासिल करना चाहती है. 2023 की शुरुआत में फोनपे का वैल्यूएशन 12 अरब डॉलर था. अब तक कंपनी 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश जुटा चुकी है. इसके निवेशकों में माइक्रोसॉफ्ट, जनरल अटलांटिक, टाइगर ग्लोबल, रिबिट कैपिटल, टीवीएस कैपिटल, टेनसेंट और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी शामिल हैं.
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
फोनपे ने FY24 में 73% की सालाना ग्रोथ दर्ज की और इसका रेवेन्यू 5,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके पीछे खर्चों में कटौती और नए प्रोडक्ट्स की सफलता मुख्य कारण रहे. कंपनी ने 197 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जबकि पिछले साल 738 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. फोनपे के CEO समीर निगम ने पहले कहा था कि कंपनी तभी स्टॉक मार्केट में लिस्ट होगी, जब वह लगातार मुनाफे में रहेगी. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनी का राजस्व और मुनाफा दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए IPO की तैयारी शुरू की जा रही है.
UPI बाजार में मजबूत पकड़
फोनपे भारत के UPI बाजार में सबसे बड़ी कंपनी है और इसकी 48% बाजार हिस्सेदारी है. इसके बाद गूगल पे (37%) का नंबर आता है. NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने पहले किसी भी गैर-बैंक ऐप के लिए 30% मार्केट शेयर की सीमा तय की थी, ताकि प्रतिस्पर्धा बनी रहे. हालांकि, यह नियम अब 31 दिसंबर 2026 तक टाल दिया गया है.
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