होम / बिजनेस / संसदीय समिति ने PM-ABHIM के तहत फंड के धीमे इस्तेमाल पर जताई चिंता, जानिए क्या कहा?
संसदीय समिति ने PM-ABHIM के तहत फंड के धीमे इस्तेमाल पर जताई चिंता, जानिए क्या कहा?
समिति के अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव, ने योजना में फंड के सही इस्तेमाल और इसे लागू करने वाली एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने PM-ABHIM के तहत फंड के धीमे इस्तेमाल पर चिंता जताई है. समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के लिए दिए गए फंड का पूरा इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए और योजनाओं को तेजी से लागू किया जाए.
फंड का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए PM-ABHIM को 3,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन संशोधित बजट में इसे घटाकर 3,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. फरवरी 2025 तक केवल 2,007 करोड़ रुपये (66.9%) ही खर्च हो पाए. इससे पहले भी यही पैटर्न देखा गया था – वित्त वर्ष 2023-24 में शुरू में 4,200 करोड़ रुपये आवंटित हुए, लेकिन बाद में इसे घटाकर 2,100 करोड़ रुपये कर दिया गया. वित्त वर्ष 2022-23 में भी कुल 1,805 करोड़ रुपये (85%) ही खर्च हो सके थे.
समिति के अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव, ने योजना में फंड के सही इस्तेमाल और इसे लागू करने वाली एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए. रिपोर्ट में कहा गया कि हर साल बजट का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता, खासकर वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में. समिति ने सुझाव दिया कि अगर राज्य सरकारें अपनी परियोजनाओं की स्पष्ट योजना दें, तो उन्हें वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही अधिक फंड दिया जाना चाहिए. इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जल्दी शुरू होंगे और फंड का सही इस्तेमाल हो सकेगा.
योजनाओं में देरी और काम की धीमी गति
PM-ABHIM योजना, जो FY22 से FY26 तक चलेगी, का उद्देश्य प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाना है। इसके तहत कई स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं, जैसे: सब-हेल्थ सेंटर (SHCs), शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर (U-AAMs), ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHUs), इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHLs), क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCBs). हालांकि, काम की शुरुआत तो बढ़ी है, लेकिन पूरा होने की दर काफी कम है. FY25 तक 13,081 योजनाओं को मंजूरी मिली थी, लेकिन केवल 5,682 (43%) ही पूरी हुईं. शहरी आरोग्य मंदिर (U-AAMs) का कार्य 50% से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन बाकी परियोजनाएं पीछे चल रही हैं. क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स (CCBs) की हालत सबसे खराब है – 394 में से सिर्फ 10 (3%) ही पूरे हुए।. इसकी एक बड़ी वजह जमीन अधिग्रहण में देरी बताई गई है.
समिति का सुझाव
समिति ने कहा कि योजना बहुत जरूरी है, लेकिन इसे समय पर पूरा करने के लिए बेहतर निगरानी और तकनीकी सहायता दी जानी चाहिए. मंत्रालय को राज्यों को तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता बढ़ाने में मदद करनी चाहिए ताकि परियोजनाएं जल्दी मंजूर हो सकें और लागू की जा सकें. रिपोर्ट में कहा गया, "स्वास्थ्य मंत्रालय को राज्यों की मदद करनी चाहिए ताकि परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके और योजना के लक्ष्य समय पर हासिल हों."
टैग्स