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GST से मिले जख्मों पर नमक का काम करेंगे दाल-चावल के भाव, ये है बड़ा कारण
दाल-चावल के भाव में तेजी के आसार देखने को मिल रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि धान और अरहर दाल का रकबा इस बार के खरीफ सीजन में काफी घट गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः 18 जुलाई से कई सारे पैक्ड खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगने से जहां आम आदमी ठीक से संभल भी नहीं पाया था, वहीं अब इस साल उसको दाल-चावल जैसी बेसिक जरूरत को पूरा करने में और जेब ढीली करनी पड़ सकती है. इससे आम गरीब लोगों को निवाला मिलने में परेशानी हो सकती है.
दाल-चावल के भाव में तेजी के आसार
दाल-चावल के भाव में तेजी के आसार देखने को मिल रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि धान और अरहर दाल का रकबा इस बार के खरीफ सीजन में काफी घट गया है. सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 15 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस बार पूरे देश में धान के रकबे में 17.4 फीसदी और अरहर दाल के रकबे में 26 फीसदी की कमी आई है. वहीं यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल में धान के रकबे में पिछले साल के मुकाबले 31 फीसदी की कमी देखने को मिली है.
कीमतों में आई तेजी
अरहर दाल की कीमतों में फिलहाल 6.5 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. अरहर के अलावा अन्य दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. मूंग, उड़द, चना, लोबिया आदि की कीमत भी तेजी ले चुकी है. धान की बात करें तो इसकी कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन रकबा घटने से इसकी कीमतों में भी तेजी आ सकती है. यूपी और बिहार में सूखे की स्थिति है और बारिश न के बराबर होने की वजह से इस बार धान की पैदावार काफी कम होने की संभावना है.
बीते साल भी कम हुआ था उत्पादन
बीते साल भी धान का उत्पादन कम हुआ था, हालांकि कीमतों में इतना फर्क नहीं आया था. वहीं दूसरी तरफ सरकारी खरीद भी काफी कम हुई थी. सरकार ने कुल 44 लाख टन चावल खरीदा था. वहीं 2020-21 में 66 लाख टन और 2019-20 में सरकार ने 80 लाख टन चावल खरीदा था. पूरे देश में चावल की मांग गेहूं के मुकाबले सबसे ज्यादा रहती है, क्योंकि यह अन्न उत्तर भारत को अगर छोड़ दें तो बाकी देश में इसको खाने का ही सबसे ज्यादा चलन है.
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