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प्याज के दामों में 50% से ज्यादा गिरावट, किसानों ने सरकार से मदद मांगी
किसान संगठनों ने सरकार से ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ (MIS) लागू करने की मांग की है. यह योजना PM-AASHA के तहत आती है और इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है. हालात ऐसे हैं कि ‘लाल सोना’ कहे जाने वाले प्याज के लिए किसानों को मात्र 300 से 800 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं, जो उत्पादन लागत से भी काफी कम है. इस स्थिति को लेकर किसान संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है.
किसानों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अनुसार मौजूदा बाजार कीमतें किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही हैं. उत्पादन लागत जहां 1,500 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, वहीं बाजार में मिल रही कीमतें इससे आधे से भी कम हैं. हालात इतने खराब हैं कि किसानों को कटाई और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में अपनी फसल सस्ते दामों पर बेचनी पड़ रही है.
‘डिस्ट्रेस सेल’ की स्थिति, 50% से ज्यादा गिरावट
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले के अनुसार, प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. उन्होंने इसे ‘डिस्ट्रेस सेल’ यानी मजबूरी में बिक्री की स्थिति बताया है. उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो राज्यभर में किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है.
सरकार से बाजार हस्तक्षेप की मांग
किसान संगठनों ने सरकार से ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ (MIS) लागू करने की मांग की है. यह योजना PM-AASHA के तहत आती है और इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है. संघ का मानना है कि यदि सरकार खरीदार के रूप में बाजार में उतरती है, तो कीमतों में स्थिरता आएगी और घबराहट में होने वाली बिक्री पर रोक लगेगी.
APMC मंडियों में गिरती कीमतों से संकट
किसानों का कहना है कि राज्य की कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) में लगातार गिरती कीमतों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई मामलों में तो कीमतें इतनी कम हैं कि किसान अपनी उपज को बाजार में बेचने के बजाय फेंकने को मजबूर हो रहे हैं.
MSP जैसी व्यवस्था और खरीद केंद्र की मांग
किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि MIS को लागू करने के लिए तुरंत केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाए और इसे जिला स्तर के साथ-साथ तालुका स्तर तक लागू किया जाए. इसके अलावा, हर प्याज उत्पादक क्षेत्र में सरकारी खरीद केंद्र स्थापित किए जाएं और उत्पादन लागत के आधार पर न्यूनतम खरीद मूल्य तय किया जाए. साथ ही, ‘मूल्य अंतर भुगतान योजना’ (PDP) को भी प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि किसानों को सीधे आर्थिक राहत मिल सके.
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