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1 मई से लागू होगी 'एक राज्य, एक RRB' नीति, कई राज्यों में क्षेत्रीय बैंकों का होगा विलय

केंद्र सरकार का यह कदम बैंकों के संचालन में सुधार और ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

केंद्र सरकार ने वित्तीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘एक राज्य, एक आरआरबी’ नीति के तहत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का एकीकरण शुरू कर दिया है. इस निर्णय के तहत आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में कई बैंकों का विलय किया जाएगा, जिससे एक मजबूत और व्यापक बैंकिंग नेटवर्क तैयार होगा. यह कदम न केवल बैंकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. 1 मई से लागू होने वाली इस नीति का उद्देश्य बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा को कम करना और उनके संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है.

नए ढांचे का उद्देश्य

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम-1976 की धारा 23ए(1) के तहत 11 राज्यों उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में मौजूद आरआरबी का एक इकाई में विलय होगा. इस तरह एक राज्य-एक आरआरबी के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा. यह नीति बैंकों के संचालन को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है. वित्त मंत्रालय ने सितंबर 2024 में इस नीति के बारे में जानकारी दी थी, और अब इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का एकीकरण कर एक मजबूत और व्यापक संस्था के रूप में उभारा जाएगा.

इन सभी विलय का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना और इनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना है. सरकार का मानना है कि इससे बैंकों की दक्षता बढ़ेगी और वे ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी तरीके से अपनी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे. इसके अलावा, प्रायोजक बैंकों द्वारा इन नए बैंकों को सही मार्गदर्शन और समर्थन मिलने से उनके संचालन में भी सुधार होगा.

15 क्षेत्रीय बैंकों का होगा विलय

इस नीति के तहत, 11 राज्यों में 15 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय करके अब प्रत्येक राज्य में केवल एक ही आरआरबी होगा. इससे आरआरबी की संख्या 43 से घटकर 28 हो जाएगी. सरकार ने इस योजना के चौथे चरण के तहत इन बैंकों के विलय की अधिसूचना जारी की है. दरअसल, केंद्र ने वित्त वर्ष 2004-05 में आरआरबी के संरचनात्मक एकीकरण की पहल की थी. इसके तहत अब तक तीन चरणों में आरआरबी की संख्या 2020-21 तक 196 से घटकर 43 रह गई थी.

ऐसे होगा इन बैंकों का विलय
1. यूपी में तीन का विलय : बड़ौदा यूपी बैंक, आर्यावर्त बैंक और प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक को उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में मिला दिया गया है. इसका मुख्यालय बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रायोजन के तहत लखनऊ में होगा.
2. पश्चिम बंगाल में बंगीय ग्रामीण विकास, पश्चिम बंग ग्रामीण बैंक और उत्तरबंग क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को पश्चिम बंगाल ग्रामीण बैंक में मिला दिया जाएगा.
3. आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में चैतन्य गोदावरी ग्रामीण बैंक, आंध्र प्रगति ग्रामीण बैंक, सप्तगिरि ग्रामीण बैंक और आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास बैंक का विलय कर एक नया बैंक, 'आंध्र प्रदेश ग्रामीण बैंक' बनाया जाएगा. इसका मुख्यालय अमरावती में होगा और इसका प्रायोजक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया रहेगा.

2. बिहार: बिहार में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक का विलय कर 'बिहार ग्रामीण बैंक' बनेगा. इसका मुख्यालय पटना में होगा और इसका प्रायोजक पंजाब नेशनल बैंक रहेगा.
3. गुजरात: गुजरात में बड़ौदा गुजरात ग्रामीण बैंक और सौराष्ट्र ग्रामीण बैंक का विलय कर 'गुजरात ग्रामीण बैंक' स्थापित किया जाएगा. इसका मुख्यालय बडोदरा में होगा और प्रायोजक बैंक ऑफ बड़ौदा रहेगा.
4. जम्मू और कश्मीर: जम्मू और कश्मीर में जे ऐंड के ग्रामीण बैंक और इलाकाई देहाती बैंक का विलय कर 'जम्मू और कश्मीर ग्रामीण बैंक' बनेगा.

अन्य राज्यों कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में दो-दो आरआरबी को एक में मिलाया जाएगा.

51 फीसदी से कम नहीं होगी हिस्सेदारी

केंद्र के पास आरआरबी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है. प्रायोजक सरकारी बैंकों का 35 फीसदी और राज्यों का 15% हिस्सा है. संशोधित अधिनियम के मुताबिक, हिस्सेदारी कम करने के बाद भी केंद्र व प्रायोजक बैंकों की 51 फीसदी से कम नहीं हो सकती. अधिसूचना के मुताबिक, सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पास 2,000 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी होगी. एकीकरण के पहले इन बैंकों में सरकार ने पूंजी भी डाली है.

 


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