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अब छोटा नहीं होगा आपके बच्चे का जूता, नई तकनीक से निकलेगा हल
इस स्टार्टअप को सोल टेक्नोलॉजी के लिए भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस से उपयोगी पेटेंट के रूप में पुरस्कृत किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अपने बच्चों के जूते को लेकर माता-पिता की चिंता इस बात को लेकर रहती है कि फिर कुछ महीने बाद उन्हें नया जूता खरीदना पड़ेगा. क्योंकि बढ़ते बच्चों में ये समस्या आती ही है। लेकिन अब तकनीक के इस दौर में देश के एक स्टार्टअप ने ऐसा जूता बनाने में कामयाबी हासिल की है जिसे 18 एमएम तक बढ़ाया जा सकता है. 2022 में पुणे में एक स्टार्टअप ने ऐसा जूता बनाने का दावा किया है जिसे वो अब पेटेंट करने की भी तैयारी कर रहे हैं। इस ब्रैंड का नाम ऐरेटो है जिसे उसने लॉन्च किया है.
क्या बोले सीईओ
ऐरेटो के सीईओ और सह-संस्थापक सत्यजीत मित्तल ने कहा, हम इस गंभीर समस्या का समाधान खोजना चाहते थे और बच्चों के जूतों की इंडस्ट्री की फिर से कल्पना करना चाहते थे. हमने आपस में मिलकर विचार किया और एक पेटेंट तकनीक की खोज की, जो जूतों को बच्चों के साथ बढ़ने की इजाजत देती है. मित्तल ने कहा, जूते के ब्रैंड का नाम एरेटो इसलिए चुना गया, ताकि वह उत्कृष्टता और विकास के जज्बे की झलक पेश करे. आमतौर पर संस्थापकों ने प्रारंभिक तौर पर इस स्टार्टअप की लॉन्चिंग के लिए 100,000 डॉलर का निवेश किया.
बच्चों की कंफर्ट का रखा है ध्यान
पुणे स्थित डी2सी स्टार्टअप ने ऐसे जूते बनाए हैं, जो 360 डिग्री तक लचीले, सुविधाजनक, साइज में फिट हैं. इनसोल, अपर और सोल टेक्नोलॉजी के कारण तीन अलग-अलग साइज तक इनका विस्तार किया जा सकता है. हमारी ओर से बनाए जूतों का आकार 18 एमएम तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे जूते बच्चों के पैरों का साइज बढ़ने पर छोटे न पड़े. अब यह स्टार्टअप 38 स्टॉक कीपिंग यूनिट ऑफर करता है. यह जूते नौ स्टाइल, पांच साइज और चार श्रेणियों में आते हैं, जिसका दाम 1699 रुपये से 2899 रुपये तक है. अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों के लिए अलग-अलग डिजाइन के जूते बनाए गए, जिसमें 0 से 2 साल, 5 से 7 साल और 5 से 9 साल के बच्चों के लिए जूते थे. ऐरेटो ने अब तक 3,000 जोड़ी से ज्यादा जूतों की बिक्री की है और महीने दर महीने 100 फीसदी का विकास दर्ज किया. स्टार्टअप ने पिछले महीने 12 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। अभी तक ब्रैंड ने 6 हजार से ज्यादा जूते बनाये हैं.
कैसे काम करते हैं ये जूते
संस्थापकों का कहना है कि ऐरेटो ने जूते बनाने में तीन तरह की तकनीक का फायदा उठाया है, जो बच्चों के स्वाभाविक विकास के अनुकूल हो और उनके पैरों में पूरी तरह फिट आएं. सुपरग्रूव्स बच्चों के पैरों की मिलीमीट्रिक विकास के अनुकूल होने में मददगार बनता है. एरेटो के स्क्विशी फोम के जूते काफी मुलायम फोम से बने होते हैं, जो पैरों पर पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं और जूतों को सुविधाजनक बनाते हैं. इस जूते की ऊपरी बॉडी इन्फिनिट से बनी हैं. इसका मतलब यह है कि कोई भी जूता तीन साइज तक बदलाव ऑफर करता है. इसमें किसी मानवीय दखल की जरूरत नहीं पड़ती. इससे यह बच्चों के बढ़ते पैरों के लिए सही आकार और फिटिंग में आता है.
स्टार्टअप को कहां से मिली है फंडिंग
अगस्त 2022 में एरेटो को प्राइवेट निवेशकों से 273,400 डॉलर की प्रारंभिक फंडिग मिली. आईएमएआरसी के मुताबिक भारतीय फुटवियर का मार्केट का मूल्य 2021 में 13.5 बिलियन डॉलर आंका गया है. 2027 में इस उद्योग के 27.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है. 2022 से 2027 तक 12.65 फीसदी की सीएजीआर की दर से कंपनी का विकास मुमकिन है. ग्लोबल और स्थायी फुटवियर मार्केट का मूल्य 2021 में 8599.5 मिलियन डॉलर था. इसके 2022 से 2027 तक 9.23 फीसदी की दर से आगे बढ़ने का अनुमान है. मौजूदा समय में ये प्रॉडक्ट्स एरेटो की अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. मित्तल ने कहा, अगली तिमाही में कुछ खास भागीदारों के सहयोग से ये जूते बाजार में दुकानों पर या ऑनलाइन उपलब्ध होंगे.
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