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30 हजार से ज्यादा टैक्सपेयर्स ने ₹29,208 करोड़ की विदेशी संपत्तियों का किया खुलासा
भारत ग्लोबल टैक्स ट्रांसपेरेंसी पहलों में एक्टिव भागीदार है, विशेष रूप से कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) और फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट (FATCA) के माध्यम से.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि भारत में अमीरों की संख्या, खासतौर से करोड़पति और अरबपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब सूत्रों के हवाले से पता चला है कि देश में 30,161 टैक्सपेयर्स ऐसे हैं, जिनकी विदेशी संपत्ति 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इस अभियान में टैक्सपेयर्स के बीच ‘सबसे पहले भरोसा’ बनाने को तरजीह दी. इसके तहत विभाग ने 17 नवंबर, 2024 को एसएमएस और ईमेल भेजना शुरू किया.
29 हजार करोड़ से ज्यादा विदेशी संपत्ति
सूत्रों के अनुसार, भारत ने हाल ही में अपने टैक्सपेयर्स को विदेशी संपत्ति और अपने इनकम की घोषणा करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था. इस अभियान के तहत, 30,161 टैक्सपेयर्स ने 29,208 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति और 1,089.88 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी इनकम की घोषणा की है. यह अभियान CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) द्वारा चलाया गया था, जिसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स को विदेशी संपत्ति और इनकम की सही घोषणा करने के लिए प्रेरित करना था.
पूरा मामला क्या है?
भारत ने Common Reporting Standards (CRS) के तहत 2018 से ही विदेशी खातों और इनकम से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना शुरू कर दिया था. इसके तहत, 125 से अधिक देशों ने अपने यहां के अकाउंट होल्डर्स की वित्तीय जानकारी भारत के साथ साझा की है. इसी तरह, अमेरिका के साथ भी FATCA (Foreign Accounts Tax Compliance Act) के तहत जानकारी साझा की जाती है.
सितंबर 2024 में, भारत ने 108 देशों से विदेशी खातों और इनकम से जुड़ी जानकारी प्राप्त की. इस डेटा का इस्तेमाल करते हुए, CBDT ने 17 नवंबर 2024 को एक Compliance-Cum-Awareness Campaign शुरू की. इस अभियान का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को उनकी विदेशी संपत्ति और इनकम की सही घोषणा करने के लिए प्रोत्साहित करना था.
कैसे चला अभियान?
19,501 टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल भेजे गए, जिनके पास विदेशी खातों में ज्यादा पैसा या महत्वपूर्ण विदेशी इनकम थी. 30 आउटरीच सत्र, सेमिनार और वेबिनार आयोजित किए गए, जिनमें 8,500 से अधिक लोगों ने भाग लिया. सोशल मीडिया पर पैम्फलेट, ब्रोशर और संवाद सत्र के जरिए जागरूकता फैलाई गई.
नतीजा ये रहा कि 24,678 टैक्सपेयर्स ने अपने ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) की समीक्षा की. 5,483 टैक्सपेयर्स ने डिलेड रिटर्न दाखिल किए. 6,734 टैक्सपेयर्स ने नॉन रेसिडेंट बताया. 62 फीसदी टैक्सपेयर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए अपने ITR में संशोधन किया.
क्यों है यह अहम?
यह अभियान Trust First के सिद्धांत पर आधारित था, जिसमें टैक्सपेयर्स पर भरोसा करते हुए उन्हें स्वेच्छा से घोषणा करने का मौका दिया गया था. इससे टैक्सपेयर्स और टैक्स डिपार्टमेंट के बीच विश्वास बढ़ा है. पिछले कुछ वर्षों में, विदेशी संपत्ति और इनकम की स्वेच्छा से घोषणा करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या में लगातार बढ़ी है. ऐसे टैक्सपेयर्स की संख्या 2021-22 में 60,000 से बढ़कर 2024-25 में 2,31,452 हो गई.
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