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निजीकरण पर भले ही बजट में खामोशी, लेकिन अंदरखाने जोर-शोर से चल रही तैयारी 

मोदी सरकार IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना से पीछे नहीं हटी है. उसने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने में गहरी दिलचस्पी रखने वाली मोदी सरकार के बजट में इस बार निजीकरण पर कोई घोषणा नहीं हुई. हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि सरकार ने IDBI बैंक को बेचने का इरादा छोड़ दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IDBI में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ने तैयारी पूरी कर ली है. रिपोर्ट्स में डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी तुहिन कांता पांडे के हवाले से बताया गया है कि IDBI बैंक में संभावित बोलीदाता का पता लगाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की जांच प्रक्रिया एडवांस स्टेज में पहुंच गई है.

केंद्र का इतना स्टेक
दरअसल, वित्त मंत्री इस निर्मला सीतारमण इस बात को अच्छी से समझती थीं कि बजट में निजीकरण की कोई भी घोषणा विपक्ष के साथ-साथ सहयोगियों का मूड भी बिगाड़ सकती है. इसलिए उन्होंने इस विषय पर चुप्पी साधे रखी. सरकार पिछले काफी समय से IDBI बैंक को बेचने की कोशिश कर रही है. केंद्र की मोदी सरकार के पास इस बैंक में 45.48 प्रतिशत और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है. दोनों मिलकर अपनी 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. इसका मतलब है कि किसी निजी कंपनी के पास IDBI बैंक का नियंत्रण चला जाएगा. 

इन पर खरा उतरना होगा
रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने संभावित बोलीदाताओं के लिए कुछ मानदंड निर्धारित किए हैं. जैसे कि बोली लगाने वालों की नेटवर्थ कम से कम 22,500 करोड़ रुपए होनी चाहिए और पिछले 5 में से 3 सालों में उन्होंने नेट प्रॉफिट अर्जित किया हो. कोटक महिंद्रा बैंक, प्रेम वत्स समर्थित सीएसबी बैंक और अमीरात एनबीडी ने इसी साल अप्रैल में IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अपनी शुरुआती बोलियां दाखिल की थीं. इसके बाद आरबीआई ने जांच प्रक्रिया शुरू की. DIPAM का कहना है कि ये जांच प्रक्रिया एडवांस स्टेज पर पहुंच गई है. 

भरेगी सरकार की झोली
IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचकर सरकार अपनी झोली भरना चाहती है. आईडीबीआई का मार्केट कैप करीब 95,000 करोड़ रुपए है. इस लिहाज से देखें तो हिस्सेदारी बेचने से सरकार की झोली में लगभग 29,000 करोड़ रुपए मिल सकते हैं. IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हो गई थी. इस बैंक के पास 11,520 करोड़ रुपए की विलंबित कर एसेट्स हैं. इसके अलावा मुंबई, पुणे और चेन्नई सहित कई शहरों में उसकी 129 संपत्तियां भी हैं. बैंक की मुंबई में 68, पुणे में 20, चेन्नई में 9 और अहमदाबाद में 7 प्रॉपर्टी हैं. इसी तरह, कोलकाता में 6 और दिल्ली में 5 और हैदराबाद में भी 5 संपत्तियां हैं.
 


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