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बैंकों के लिए बड़ी खबर, 'सरकारी' को 'प्राइवेट' बनाने की योजना से पीछे हटी Modi सरकार?
मोदी सरकार शायद सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की योजना पर आगे बढ़ने के मूड में नहीं है. इसे लोकसभा चुनाव में मिले झटके का परिणाम माना जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद जैसा कि माना जा रहा था मोदी सरकार फिलहाल PSU बैंकों में हिस्सेदारी घटाने के मूड में नहीं है. लोकसभा में पेश बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 में सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाने जैसा कोई प्रावधान नहीं जोड़ा गया है. बैंकिंग कंपनीज एक्ट 1970 की धारा 2 में बताया गया है कि सरकार के पास बैंकों में 51% हिस्सेदारी होनी चाहिए. यदि सरकार हिस्सेदारी बेचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती, तो इस धारा में संशोधन किया जाना था, जो नहीं हुआ है.
क्या नहीं बिकेगा IDBI?
मीडिया रिपोर्ट्स में संशोधित बैंकिंग कानून की जो जानकारी सामने आ रही है, उसमें धारा 2 में संशोधन का कोई जिक्र नहीं है. न कि अलग से कोई प्रावधान जोड़ा गया है. ऐसे में यह सवाल सबसे बड़ा हो गया है कि क्या IDBI बैंक को निजी हाथों में सौंपने की योजना भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी? मोदी सरकार के पास आईडीबीआई बैंक में 45.5 प्रतिशत और LIC के पास 49 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है. विनिवेश योजना के तहत सरकार बैंक में कुल 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थी. इसमें सरकार की 30.5% और LIC की 30.2% हिस्सेदारी शामिल है.
पहले थी पूरी तैयारी
लोकसभा चुनाव से पहले तक IDBI बैंक और भारत पेट्रोलियम लिमिटेड को बेचने की तैयारी में सरकार जोरशोर से जुटी हुई थी. माना जा रहा था कि मनमाफिक नतीजे आते ही सबसे पहले इन दो सरकारी कंपनियों क सौदा किया जाएगा. हालांकि, चुनावी नतीजे भाजपा की उम्मीद के अनुरूप नहीं और उसे केंद्र में सरकार बनाने के लिए JDU और TDP के कंधों पर सवार होना पड़ा. बता दें कि JDU प्रमुख नीतीश कुमार और TDP चीफ चंद्रबाबू नायडू पूर्व में निजीकरण का विरोध कर चुके हैं. सरकार BPCL में हिस्सेदारी घटाने का इरादा पहले ही छोड़ चुकी है.
कई संशोधन प्रस्तावित
बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 में कई बदलावों का प्रस्ताव किया गया है. जैसे कि को-ऑपरेटिव बैंकों के चेयरमैन का कार्यकाल 8 से बढ़ाकर 10 साल करना. बैंकों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को वैधानिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा में बदलाव. प्रस्तावित बदलाव में रिपोर्टिंग की समय-सीमा को शुक्रवार के बजाये पखवाड़े, महीने या तिमाही के अंतिम दिन करने का सुझाव दिया गया है. इस संशोधन का उद्देश्य रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं में एकरूपता को बढ़ावा देना है. इसके अलावा, नॉमिनी की संख्या को 1 से बढ़ाकर 4 करने का भी प्रस्ताव है. इसका मतलब है कि विधेयक पास होने पर बैंक खाताधारक अपने अकाउंट में एक के बजाय 4 नॉमिनी तक बना सकेंगे.
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