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सिविल एविएशन मिनिस्टर Naidu ने कही ऐसी बात, बढ़ जाएगी TATA की टेंशन!
टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस में कुछ समय पहले बड़ी हड़ताल हुई थी, जिसके चलते कई फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी थीं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू (Kinjarapu Ram Mohan Naidu) ने कुछ ऐसा कहा है, जिससे टाटा समूह (Tata Group) की टेंशन बढ़ जाएगी. एयर इंडिया एक्सप्रेस विवाद के मुद्दे पर संसद में बोलते हुए नायडू ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यदि एयरलाइंस की ओर से कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो निश्चित रूप से उसे दंडित किया जाएगा. बता दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस भी टाटा समूह का हिस्सा है.
कई फ्लाइट्स हुई थीं रद्द
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में उड़ानों के रद्द होने से संबंधित प्रश्नों का जवाब देते हुए नायडू ने कहा कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री यह सुनिश्चित करती है कि कोई कैंसिलेशन या देरी न हो. टाटा समूह की एयरलाइन्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम स्वीकार करते हैं कि एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ एक मुद्दा रहा है. चालक दल के साथ कुछ आंतरिक मुद्दे थे, क्योंकि एयर इंडिया एक्सप्रेस का एयर एशिया इंडिया में विलय हो रहा था. इस कारण बड़े पैमाने पर 7 मई को हड़ताल हुई थी, जिस वजह से कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थी.
जुर्माना भी लगाया था
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि एक बार जब यह मुद्दा सामने आया तो मंत्रालय इसमें शामिल हो गया. DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने एयरलाइन, चालक दल के सदस्यों आदि के साथ चर्चा कर मामले सुलझा लिया गया. नायडू ने कहा कि यदि विमानन कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं, तो मंत्रालय दखल देता है. निश्चित दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए एयर इंडिया पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है.
यात्री सर्वोच्च प्राथमिकता
नायडू ने स्पष्ट किया कि डीजीसीए एयर इंडिया एक्सप्रेस हड़ताल मामले की जांच कर रहा है. अगर एयरलाइंस की ओर से कोई गड़बड़ी मिलती है, निश्चित रूप से उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यात्री ही सर्वोच्च प्राथमिकता हों. गौरतलब है कि टाटा समूह के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस के चालक दल के करीब 200 सदस्य सात मई को हड़ताल पर चले गए थे. इस वजह से कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा था. इसके बाद एयरलाइन ने चालक दल के 25 सदस्यों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं. मामला बिगड़ते देख मुख्य श्रम आयुक्त की ओर से बुलाई बैठक बुलाई गई, जिसमें सुलह पर सहमति बनी और हड़ताल के साथ-साथ टर्मिनेशन लेटर भी वापस ले लिए गए थे.
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