होम / बिजनेस / Indiabulls Real Estate और Embassy Group के विलय को मंजूरी, क्या है इस मर्जर का उद्देश्य?
Indiabulls Real Estate और Embassy Group के विलय को मंजूरी, क्या है इस मर्जर का उद्देश्य?
इंडिया बुल्स रियल एस्टेट (आईबीआरईएल) और एम्बैसी ग्रुप को बड़ी राहत देते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी ने विलय की योजना को मंजूरी दे दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इंडिया बुल्स रियल एस्टेट (India Bulls Real Estate) और एम्बैसी ग्रुप को बड़ी राहत देते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी ने प्रक्रिया पर रोक लगाने वाले एनसीएलटी के आदेश को खारिज करते हुए दोनों रियल एस्टेट कंपनियों के विलय की योजना को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) की दो सदस्यों वाली पीठ ने ये फैसला सुनाया है.
चंडीगढ़ पीठ के विवादित आदेश को किया था खारिज
एनसीएलटी की पीठ ने कहा, “हम एनसीएलटी की चंडीगढ़ पीठ के विवादित आदेश को खारिज करते हैं और अपीलकर्ताओं (इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, एम्बैसी वन और एनएएम एस्टेट्स) के बीच विलय की योजना को मंजूरी देने की अपील को स्वीकार करते हैं.” एनसीएलएटी ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण को मानक निर्धारित मूल्यांकन विधियों में से किसी एक का उपयोग करके विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था.
अपीलीय न्यायाधिकरण ने फैसले में कही थी ये बात
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा, “तथ्यों और परिस्थितियों तथा प्रासंगिक न्यायिक उदाहरणों पर गौर करने के बाद हम मानते हैं कि एनसीएलटी की चंडीगढ़ पीठ ने अपीलकर्ता कंपनियों के शेयरधारकों, ऋणदाताओं और निदेशक मंडल के वाणिज्यिक विवेक की अनदेखी करते हुए योजना में हस्तक्षेप करके गलती की है.” एनसीएलटी ने योजना के तहत मूल्यांकन और अदला-बदली अनुपात पर आयकर विभाग की आपत्ति के आधार पर अपनी अनुमति रोक ली थी. अपीलीय न्यायाधिकरण ने पाया कि कार्यवाही के दौरान, विभाग ने बाद में योजना की मंजूरी न्यायाधिकरण के विवेक पर छोड़ दिया था.
क्या है इस मर्जर का उद्देश्य?
इस मर्जर का उद्देश्य उत्तर भारत में। BREL के कामकाज को NAM एस्टेट्स और दक्षिण भारत में एम्बेसी वन कमर्शियल प्रॉपर्टी डेवलपमेंट्स (EOCPDPL) की मौजूदगी के साथ मिलाकर एक अखिल भारतीय रियल एस्टेट कंपनी बनाना है. इस स्कीम को भारी समर्थन मिला, लगभग 100 फीसदी शेयरधारकों और क्रेडिटर्स ने इसे मंजूरी दी. CCI, SEBI, BSE, NSE और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय सहित नियामक निकायों ने कोई आपत्ति नहीं जताई. सांविधिक लेखा परीक्षकों ने भारतीय लेखा मानकों के अनुपालन की पुष्टि की.
टैग्स