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BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप ने छुआ ये आंकड़ा...जानते हैं कैसे टॉप फाइव बना भारत?
BSE में लिस्टेड कंपनियों की यात्रा पर नजर डालें तो 2007 में ये 1 ट्रिलियन पर मौजूद था लेकिन 2 ट्रिलियन पहुंचने में इसे एक दशक से ज्यादा का समय लग गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
BSE (Bombay Stock Exchange) में मौजूद कंपनियों का मार्केट कैप मंगलवार को पहली बार 5 ट्रिलियन का आंकड़ा पार कर गया. मंगलवार को बीएसई की साइट के अनुसार कपंनियों का मार्केट कैप 414.16 ट्रिलियन रुपये से अधिक तक पहुंच गया है. ये स्थिति तब आई है जब बीएसई सेंसेक्स अपने ऑल टाइम हाई से 1.66 प्रतिशत नीचे है. इससे पहले सोमवार को वोटिंग के कारण बाजार बंद था.
कैसी रही है BSE की मार्केट कैप यात्रा?
BSE में मौजूद कंपनियों की मार्केट कैप यात्रा पर नजर डालें तो नवंबर 2023 में ये 4 ट्रिलियन के निशान पर था. लेकिन मार्केट कैप ने 4 ट्रिलियन से लेकर 5 ट्रिलियन की यात्रा सिर्फ 6 महीने में पूरी की है. इससे पहले 2007 में जब बुरा समय था उस वक्त ये 1 ट्रिलियन के मार्क पर मौजूद था. इसे 2 ट्रिलियन तक पहुंचने में पूरे एक दशक का सफर तय करना पड़ा और इसने ये मुकाम 2017 में हासिल किया. लेकिन इसके बाद अगले 4 साल में यानी 2021 में ये 3 ट्रिलियन तक पहुंचा और 2023 दिसंबर में 4 ट्रिलियन और अब मई 2024 में 5 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है.
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दुनिया के देशों में हमारा कौन सा नंबर?
अगर नजर डाली जाए तो भारत अब दुनिया के उन पांच देशों में शामिल हो गया है जिनकी कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है. इनमें अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग शामिल हैं. अमेरिका की कंपनियों का मार्केट कैप 55 ट्रिलियन है, इसी तरह चीन की कंपनियों का मार्केट कैप 9.4 ट्रिलियन, जापान का 6.42 ट्रिलियन और हांगकांग का मार्केट कैप 5.47 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है. अगर अकेले 2024 में भारत के मार्केट कैप पर नजर डालें तो वो 12 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है. जबकि अमेरिका की ग्रोथ 10 प्रतिशत और हांगकांग की ग्रोथ 16 प्रतिशत रही है. जबकि चीन की 1.4 प्रतिशत गिरी है.
आखिर क्या है इसकी प्रमुख वजह?
भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप बढ़ने का बड़ा कारण ये है कि भारत का बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है. यही नहीं शेयर बाजार में दिख रहे उतार चढ़ाव की वजह चुनावों को लेकर बना माहौल भी बड़ा कारण है. यही नहीं 4 जून को चुनावों के नतीजे आने हैं जबकि 1 जून को एक्जिट पोल आना है. यही नहीं बाजार में स्मॉल कैप और मिड कैप फंडों को लेकर जिस तरह का रूझान दिख रहा है वो भी अपने आप में बड़ा चौंकाने वाला है. यही नहीं जीएसटी आंकड़ों से लेकर लगातार बढ़ता पैसेंजर आंकड़ा भी अपने आप में बढ़ती अर्थव्यवस्था की ओर इशारा कर रहा है.
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