जिस तरह से संबित पात्रा के स्लीप ऑफ टंग पर नवीन पटनायक ने निशाना साधा है वो इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे हैं. ओडिशा में लोकसभा के साथ विधानसभा के भी चुनाव हो रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
बीजेपी के स्टार प्रवक्ता और पुरी लोकसभा से उम्मीदवार संबित पात्रा ने ठीक चुनावों से पहले माफी मांगी है. संबित पात्रा ने कहा कि मैने जो कुछ भी बोला वो स्पील ऑफ टंग था जिसका मतलब है कि जुबान फिसलने के कारण ऐसा हुआ. लेकिन संबित पात्रा की इसी गलती को विपक्ष ने पकड़ लिया है और अब इस पर जमकर सियासी बवाल हो रहा है. पुरी में 25 मई को मतदान होना है.
आखिर इस मामले में हुआ क्या?
दरअसल 20 मई को पीएम मोदी का पुरी में रोड शो था. पीएम मोदी ने रोड शो से पहले भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना भी की. इसके बाद पीएम मोदी ने पुरी से बीजेपी उम्मीदवार संबित पात्रा के पक्ष में रोड शो भी किया. इस दौरान पीएम मोदी ने ओडिसा की सरकार पर जमकर हमला किया. इस रोड शो को जबरदस्त समर्थन मिला. इस दौरान संबित पात्रा ने कई न्यूज चैनलों से बात की लेकिन एक चैनल पर वो ये कह गए कि भगवान जगन्नाथ पीएम मोदी के भक्त है. बस फिर क्या था इस बयान ने विपक्ष को तो जैसे बैठे बिठाए मौका दे दिया.
नवीन पटनायक ने जताया विरोध
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के जुबान फिसलने का मामला जंगल की आग की तरह तेजी से फैल गया और ओडिशा के मुख्यमंत्री ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए ट्वीट किया. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, महाप्रभु जगन्नाथ समूचे ब्रहमांड के भगवान हैं. महाप्रभु को दूसरे मनुष्य का भक्त कहना भगवान का अपमान है। इससे भावनाएं आहत हुई हैं और दुनिया भर में करोड़ों जगन्नाथ भक्तों और उड़िया लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है. भगवान उड़िया अस्मिता के सबसे महान प्रतीक हैं. महाप्रभु को दूसरे इंसान का भक्त कहना पूरी तरह से निंदनीय है. मैं भाजपा पुरी लोकसभा उम्मीदवार द्वारा दिए गए बयान की कड़ी निंदा करता हूं और मैं भाजपा से भगवान को किसी भी राजनीतिक प्रवचन से ऊपर रखने की अपील करता हूं. ऐसा करके आपने ओडिया अस्मिता को गहरी चोट पहुंचाई है और इसे ओडिशा के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे और इसकी निंदा करेंगे.
Mahaprabhu Shree Jagannatha is the Lord of Universe.
— Naveen Patnaik (@Naveen_Odisha) May 20, 2024
Calling Mahaprabhu a bhakt of another human being is an insult to the Lord. This has hurt the sentiments and demeaned the faith of crores of Jagannatha bhaktas and Odias across the world.
The Lord is the greatest Symbol of…
संबित पात्रा ने भी नहीं लगाई देर
बीजेपी उम्मीदवार संबित पात्रा ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए माफी मांगने में देरी नहीं लगाई. उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा कि
नवीन जी नमस्कार!
आज पुरी में नरेंद्र मोदीजी के रोड शो की भारी सफलता के बाद मैंने कई मीडिया चैनलों को कई बाइट्स दीं, हर जगह मैंने उल्लेख किया कि मोदी जी जगन्नाथ महाप्रभु के एक उत्साही ‘भक्त’ हैं. एक बाइट्स के दौरान गलती से मैं इसका उच्चारण बिल्कुल विपरीत कर बैठा..मैं जानता हूं कि आप भी इसे जानते और समझते हैं..सर, किसी अस्तित्वहीन मुद्दे को मुद्दा न बनाएं..हम सभी की कभी-कभी जुबान फिसल जाती है..
धन्यवाद एवं प्रणाम!
Naveen Ji Namaskar!
— Sambit Patra (Modi Ka Parivar) (@sambitswaraj) May 20, 2024
I gave number of bytes today to multiple media channels after the massive success of Shri Narendra Modiji’s Road Show in Puri today, everywhere I mentioned that Modi ji is an ardent “Bhakt” of Shri Jagannath Mahaprabhu ..by mistake during one of the bytes I… https://t.co/6Q1Kuj5E6O
लोकसभा के साथ ओडिशा में हो रहे हैं विधानसभा चुनाव
ओडिशा वो राज्य है जहां अकेले लोकसभा चुनाव ही नहीं हो रहा है बल्कि विधानसभा का भी चुनाव हो रहा है. वहां भी 4 जून को नतीजे आने के बाद 10 जून तक सरकार बन जानी है. ऐसे में पहले से बीजेपी के खिलाफ मौका खोज रही नवीन पटनायक की बीजू जनता दल को जैसे संबित पात्रा ने बैठे बिठाए मौका दे दिया है. अब जिस तरह से नवीन पटनायक ने इस पूरे मामले पर मोर्चा संभाला है उससे तो यही लग रहा है कि वो इस मामले को लंबा खींचने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी पार्टी के सभी नेता इस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. अब इस मामले का कितना असर होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा.
सरकार ने औषधि नियम, 1945 के नियम 31 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. मौजूदा व्यवस्था के तहत आयात की जाने वाली दवाओं की कुल स्वीकृत मियाद का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के समय बचा होना जरूरी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार दवाओं के आयात और फार्मास्युटिकल रिसर्च से जुड़े नियमों को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में दो अहम संशोधनों का मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित बदलावों से दवाओं के आयात की प्रक्रिया सरल होगी, रिसर्च एवं टेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा और दवा कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान हो सकता है.
दवाओं के आयात नियमों में होगा बड़ा बदलाव
सरकार ने औषधि नियम, 1945 के नियम 31 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. मौजूदा व्यवस्था के तहत आयात की जाने वाली दवाओं की कुल स्वीकृत मियाद का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के समय बचा होना जरूरी है. अब सरकार इस नियम को बदलकर न्यूनतम 12 महीने की शेष मियाद की शर्त लागू करना चाहती है.
सरकार का मानना है कि इससे दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी बनेगी, स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा और मियाद संबंधी सख्त नियमों के कारण होने वाली दवा बर्बादी को कम किया जा सकेगा.
कुछ दवाओं पर पुराना नियम रहेगा लागू
बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्युटिकल दवाओं के लिए वर्तमान 60 प्रतिशत शेष मियाद का नियम जारी रहेगा. मंत्रालय के मुताबिक इन उत्पादों की संवेदनशील प्रकृति और जन स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए इनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर नहीं पड़ेगा असर
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन केवल आयात के समय बची हुई मियाद की शर्त से संबंधित है. दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े सभी मौजूदा नियामकीय मानदंड पहले की तरह लागू रहेंगे.
दवा कंपनियों को मिलेगी राहत
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिशत आधारित गणना के बजाय निश्चित समय सीमा लागू होने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला को फायदा मिलेगा. इससे विदेशी निर्यातक बेहतर योजना बना सकेंगे और वेयरहाउसिंग तथा स्टॉक प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा.
विशेषज्ञों के अनुसार नए नियम से आयातकों के लिए अनुपालन आसान होगा और दवा क्षेत्र में कारोबार करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं अनुमानित बन सकेगी.
टेस्टिंग और रिसर्च के लिए आसान होगा आयात
सरकार ने एक अन्य मसौदा संशोधन में परीक्षण, विश्लेषण और गैर-क्लीनिकल रिसर्च के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात को भी आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है. फिलहाल इसके लिए लाइसेंस या फॉर्म-11 की आवश्यकता होती है.
नए प्रस्ताव के तहत आवेदकों को केवल ऑनलाइन पूर्व सूचना देनी होगी और एक्नॉलेजमेंट मिलने के बाद वे दवाओं का आयात कर सकेंगे. इससे रिसर्च और परीक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है.
इन दवाओं के लिए लाइसेंस की शर्त जारी रहेगी
प्रस्तावित व्यवस्था सेक्स हार्मोन, साइटोटॉक्सिक दवाओं, बीटा-लैक्टम दवाओं, जीवित सूक्ष्मजीवों वाले जैविक उत्पादों तथा मादक एवं साइकोट्रोपिक पदार्थों पर लागू नहीं होगी. इन श्रेणियों की दवाओं के आयात के लिए पहले की तरह लाइसेंस लेना अनिवार्य रहेगा.
हितधारकों से मांगी गई राय
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दोनों मसौदा संशोधनों को सार्वजनिक कर दिया है और उद्योग से जुड़े हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं. सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है.
क्या होगा फायदा?
1. दवाओं के आयात की प्रक्रिया आसान होगी.
2. सप्लाई चेन और स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा.
3. मियाद संबंधी कारणों से होने वाली बर्बादी कम होगी.
4. रिसर्च और परीक्षण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
5. दवा उद्योग में कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी.
6. फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश और नवाचार को गति मिल सकती है.
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी नई रिपोर्ट में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है. वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है. साथ ही महंगाई के अनुमान में भी कमी की गई है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद बढ़ गई है.
GDP ग्रोथ अनुमान में बढ़ोतरी
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी नई रिपोर्ट में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है. बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और ऊर्जा कीमतों में नरमी आने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद वैश्विक तेल बाजार पर दबाव घटा है. पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका थी, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिली थी.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और देश के 60 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आयात हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होते हैं. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत की खबर मानी जा रही है.
महंगाई का अनुमान भी घटा
रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और यूरिया जैसी कमोडिटी की कीमतों में कमी आने से महंगाई पर दबाव कम होगा. इसी वजह से गोल्डमैन सैक्स ने खुदरा महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया है. यूरिया की कीमतों में गिरावट से सरकार के खाद सब्सिडी खर्च में भी कमी आ सकती है, जिससे राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की संभावना है.
मौसम से जुड़ी चुनौतियां बरकरार
हालांकि रिपोर्ट में मौसम संबंधी जोखिमों का भी जिक्र किया गया है. भारतीय मौसम विभाग द्वारा हीटवेव की आशंका जताई गई है, जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की मांग और खपत पर पड़ सकता है. इसके बावजूद तीसरी तिमाही के बाद मांग में सुधार की उम्मीद जताई गई है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है.
ब्याज दरों पर क्या रहेगा असर?
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक वर्ष 2026 में दो चरणों में कुल 50 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. हालांकि यदि कच्चे माल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और महंगाई नियंत्रित रहती है, तो आरबीआई दरों में बढ़ोतरी को कुछ समय के लिए टाल भी सकता है.
आर्थिक माहौल हुआ और मजबूत
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, तेल कीमतों में नरमी और महंगाई के दबाव में कमी से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर विकास दर, निवेश और उपभोग पर भी देखने को मिल सकता है.
अडानी समूह मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट के आसपास करीब 655 एकड़ क्षेत्र को विकसित करेगा. पहले चरण में लगभग 2.2 करोड़ वर्ग फुट मिक्स्ड-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी समूह ने देश के एविएशन और शहरी विकास क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी में आधुनिक एयरपोर्ट सिटी विकसित करने की घोषणा की है. करीब ₹20,000 करोड़ के निवेश से 655 एकड़ क्षेत्र में बनने वाली इन परियोजनाओं में होटल, शॉपिंग मॉल, ऑफिस, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं विकसित की जाएंगी. कंपनी का लक्ष्य एयरपोर्ट को केवल हवाई यात्रा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यापार, पर्यटन और निवेश के बड़े हब के रूप में विकसित करना है.
₹20,000 करोड़ के निवेश से विकसित होंगी एयरपोर्ट सिटी
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी अडानी एयरपोर्ट सिटी लिमिटेड (AACL) ने छह प्रमुख शहरों में एयरपोर्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की है. कंपनी पहले चरण में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इन परियोजनाओं को मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट के आसपास करीब 655 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. पहले चरण में लगभग 2.2 करोड़ वर्ग फुट मिक्स्ड-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
मुंबई और नवी मुंबई पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
कंपनी के अनुसार, कुल निवेश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा. इन दोनों शहरों में करीब 440 एकड़ क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुंबई क्षेत्र देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट आधारित शहरी केंद्रों में शामिल हो सकता है.
होटल, मॉल और ऑफिस का बनेगा एकीकृत हब
एयरपोर्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में होटल, शॉपिंग मॉल, कमर्शियल ऑफिस, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी. इन परियोजनाओं को एयरपोर्ट, मेट्रो और शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इससे यात्रियों, कारोबारियों और स्थानीय लोगों को एक ही स्थान पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी.
दुनिया के बड़े एयरपोर्ट मॉडल से प्रेरित होगी परियोजना
कंपनी ने बताया कि इन एयरपोर्ट सिटी को सिंगापुर के चांगी, दुबई इंटरनेशनल, एम्स्टर्डम के शिफोल और सियोल के इंचियोन जैसे विश्वस्तरीय एयरपोर्ट डिस्ट्रिक्ट्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. इसका उद्देश्य एयरपोर्ट को केवल उड़ानों के केंद्र तक सीमित न रखकर व्यापार, पर्यटन, निवेश और शहरी विकास का प्रमुख केंद्र बनाना है.
जीत अडानी ने बताई कंपनी की रणनीति
AAHL के निदेशक जीत अडानी ने कहा कि दुनिया के कई सफल एयरपोर्ट आज व्यापार, पर्यटन और शहरी विकास के बड़े केंद्र बन चुके हैं. भारत में तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर को देखते हुए एयरपोर्ट को आधुनिक शहरी केंद्रों के रूप में विकसित करना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से निवेश, रोजगार, बेहतर यात्री अनुभव और शहरों के दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
पैदल घूमने योग्य आधुनिक शहरी केंद्र होंगे विकसित
एयरपोर्ट सिटी को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि लोग आसानी से पैदल चल सकें. यहां होटल, रिटेल स्टोर, ऑफिस, रेस्टोरेंट, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी. इससे यात्रियों और स्थानीय नागरिकों दोनों को बेहतर अनुभव मिलेगा.
पांच लग्जरी होटल खोलने की तैयारी
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने IHG होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के साथ पांच लग्जरी और प्रीमियम होटल विकसित करने का समझौता किया है. इसके तहत पहली बार किम्पटन होटल ब्रांड भी भारत में प्रवेश करेगा. कंपनी होटल, फूड एंड बेवरेज, रिटेल और एंटरटेनमेंट क्षेत्र की कई भारतीय और विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी पर भी काम कर रही है.
पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
कंपनी के मुताबिक, सभी एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं को यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल से LEED गोल्ड प्री-सर्टिफिकेशन मिल चुका है. इन परियोजनाओं में ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और पैदल चलने योग्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
कई बड़ी कंपनियां होंगी साझेदार
इन परियोजनाओं में डिजाइन, निर्माण और परामर्श सेवाओं के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जुड़ी हैं. इनमें कोहन पेडरसन फॉक्स, बेनॉय, ज़नेरा स्पेस, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा प्रोजेक्ट्स, पीएसपी प्रोजेक्ट्स, सीबीआरई, जेएलएल और कुशमैन एंड वेकफील्ड शामिल हैं. वर्तमान में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स देश की सबसे बड़ी निजी एयरपोर्ट ऑपरेटिंग कंपनी है और मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, मंगलुरु और तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट का संचालन करती है. कंपनी नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास भी कर रही है.
कंपनी के मनोरंजन चैनलों के मजबूत प्रदर्शन और हाल ही में लॉन्च किए गए यूनाइट8 स्पोर्ट्स चैनलों की सफलता ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने वर्ष 2026 के 24वें सप्ताह में 20 प्रतिशत नेटवर्क शेयर हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया है. पिछले लगभग आठ वर्षों में यह कंपनी का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है. मनोरंजन और खेल कंटेंट की मजबूत पेशकश तथा फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण ने कंपनी की दर्शक संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.
20% नेटवर्क शेयर के साथ नया रिकॉर्ड
कंपनी ने 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के शहरी दर्शकों के बीच 20 प्रतिशत नेटवर्क शेयर दर्ज किया है. यह उपलब्धि पिछले करीब आठ वर्षों में कंपनी के लिए सबसे ऊंचा स्तर है. कंपनी के मनोरंजन चैनलों के मजबूत प्रदर्शन और हाल ही में लॉन्च किए गए यूनाइट8 स्पोर्ट्स चैनलों की सफलता ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 से मिला बड़ा फायदा
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण ने यूनाइट8 स्पोर्ट्स नेटवर्क को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. कंपनी के मुताबिक, स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो ने 6 करोड़ नए दर्शकों को जोड़ा है और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा लीनियर स्पोर्ट्स नेटवर्क बनकर उभरा है. लाइव मैचों के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में कमेंट्री, विशेषज्ञों का विश्लेषण और फुटबॉल आधारित विशेष कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया है.
300 मिलियन से अधिक दर्शकों तक पहुंचा स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो
कंपनी के स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो ने 1 जून 2026 से अब तक अपने लीनियर प्लेटफॉर्म, जी5 और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से 300 मिलियन से अधिक यूनिक दर्शकों तक पहुंच बनाई है. इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने खुद को मनोरंजन और खेल सामग्री के प्रमुख मल्टी-प्लेटफॉर्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया है.
यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 बना नंबर-1 अंग्रेजी स्पोर्ट्स चैनल
कंपनी के अनुसार, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 ने भारत के सभी अंग्रेजी स्पोर्ट्स चैनलों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया है. भाषा आधारित कमेंट्री और विशेष कंटेंट रणनीति ने चैनल को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया है.
फीफा वर्ल्ड कप 2022 से भी बेहतर प्रदर्शन
कंपनी के लीनियर पोर्टफोलियो ने इसी अवधि के दौरान फीफा वर्ल्ड कप 2022 की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक लाइव रीच दर्ज की है. इससे कंपनी के खेल प्रसारण कारोबार को नई मजबूती मिली है.
डिजिटल और टीवी प्लेटफॉर्म पर बढ़ी दर्शक संख्या
यूनाइट8 स्पोर्ट्स और जी5 जैसे कंपनी के डिजिटल एवं लीनियर प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत दर्शक वृद्धि दर्ज कर रहे हैं. मल्टी-प्लेटफॉर्म रणनीति ने दर्शकों को विभिन्न स्क्रीन पर सहज अनुभव प्रदान किया है.
जी एंटरटेनमेंट के यूनाइट8 स्पोर्ट्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी बवेश जनावलेकर ने कहा कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दर्शकों से मिली शानदार प्रतिक्रिया कंपनी के खेल कारोबार के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है. उन्होंने कहा कि कंपनी दर्शकों को मैचों से आगे भी जोड़े रखने के लिए नए प्रोग्रामिंग प्रयोग कर रही है और वैश्विक स्तर का प्रीमियम स्पोर्ट्स कंटेंट बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम की स्थिति बनने से भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और गैस आपूर्ति के सामान्य होने से कंपनियों पर लागत का दबाव कम होगा, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने वाला असर पहले के अनुमान से काफी कम रह सकता है.
मुनाफे पर असर का अनुमान हुआ कम
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है. यह अनुमान लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में लगाए गए पहले के अनुमान का लगभग आधा है. भूराजनतिक तनाव में कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से राहत
क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने अनुमान में बदलाव करते हुए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए 110 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया गया था. वहीं, गैस आपूर्ति में व्यवधान अब केवल चार महीने तक रहने की संभावना जताई गई है, जबकि पहले इसके तीन तिमाहियों तक बने रहने का अनुमान था.
कम क्षेत्रों पर पड़ेगा दबाव
संशोधित अनुमान के अनुसार, अब केवल 10 सेक्टरों पर ही मार्जिन दबाव पड़ने की आशंका है, जबकि पहले 22 सेक्टरों पर असर पड़ने की संभावना जताई गई थी. भारत इंक का कुल ऑपरेटिंग मार्जिन अब लगभग 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि संघर्ष से पहले यह 12 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी.
एयरलाइंस और सिरेमिक सेक्टर पर रहेगा दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइंस और सिरेमिक उद्योग अभी भी दबाव में रह सकते हैं. इसकी वजह ईंधन लागत में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और सीमित मूल्य निर्धारण क्षमता है. इसके अलावा स्पेशियलिटी केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और पॉलिएस्टर टेक्सटाइल जैसे कमोडिटी आधारित सेक्टरों में भी मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.
तेल विपणन और उर्वरक कंपनियों को फायदा
दूसरी ओर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और उर्वरक निर्माताओं को कच्चे माल की लागत घटने और आपूर्ति की स्थिति में सुधार का लाभ मिल सकता है. इन क्षेत्रों में लागत कम होने से मुनाफे में सुधार की संभावना जताई गई है.
मांग मजबूत, लेकिन जोखिम बरकरार
क्रिसिल का कहना है कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और स्थिर उपभोग मांग के कारण अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ अभी अस्थायी है. इसके अलावा दोबारा बढ़ने वाले भूराजनतिक तनाव और कमजोर मानसून जैसी चुनौतियां कॉरपोरेट मुनाफे पर असर डाल सकती हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि एशिया की औसत 12 प्रतिशत और वैश्विक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक रही, जिससे भारत ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 2025 में 110 बिलियन डॉलर का ग्रीन रेवेन्यू दर्ज किया है. दरअसल, लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) की रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर, विंड एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेज वृद्धि के दम पर भारत एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती ग्रीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है.
$110 बिलियन के ग्रीन रेवेन्यू का नया रिकॉर्ड
LSEG की ‘इन्वेस्टिंग इन द ग्रीन इकॉनमी 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में ग्रीन बिजनेस से 110 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया. पिछले पांच वर्षों में देश का ग्रीन रेवेन्यू 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है. यह वृद्धि एशिया की औसत 12 प्रतिशत और वैश्विक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक रही, जिससे भारत ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है.
बायोगैस और सिंचाई उपकरणों में भारत की मजबूत पकड़
रिपोर्ट के मुताबिक, बायोगैस ऊर्जा उपकरणों के क्षेत्र में एशिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू में भारत की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही. वहीं एडवांस्ड इरिगेशन सिस्टम और उपकरणों में देश का योगदान 75 प्रतिशत तक पहुंच गया. ये आंकड़े बताते हैं कि कृषि, ग्रामीण अवसंरचना, वेस्ट-टू-एनर्जी और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों से जुड़े क्षेत्रों में भारत लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
एशिया बना दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन बाजार
2025 में वैश्विक ग्रीन रेवेन्यू में एशियाई कंपनियों की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत रही. चीन, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया इस क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ी बने हुए हैं. एशिया के ग्रीन रेवेन्यू में चीन की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही, जबकि जापान 28 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा. हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाद भारत का हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत दर्ज किया गया.
क्लीन एनर्जी में भारत का बड़ा निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने क्लीन एनर्जी सेक्टर में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. यह देश के कुल पावर सेक्टर कैपिटल एलोकेशन का 83 प्रतिशत है. वहीं, चीन ने रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, न्यूक्लियर और ऊर्जा दक्षता से जुड़े क्षेत्रों में करीब 625 बिलियन डॉलर का निवेश किया.
ग्रीन ग्रोथ के साथ चुनौतियां भी बरकरार
रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया को ग्रीन एनर्जी की तेज वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा. क्षेत्र के कई देश अभी भी आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं. चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में कोयले की मांग अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
तेजी से उभर रही भारत की ग्रीन इकॉनमी
हालांकि भारत अभी एशिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू पूल में अपेक्षाकृत छोटा खिलाड़ी है, लेकिन इसकी वृद्धि दर क्षेत्र के अधिकांश देशों से कहीं अधिक है. बायोगैस उपकरण और एडवांस्ड सिंचाई प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में भारत ने नेतृत्व की स्थिति भी हासिल कर ली है.
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन रेवेन्यू उन सूचीबद्ध कंपनियों की आय को दर्शाता है, जो पर्यावरण अनुकूल उत्पादों और सेवाओं से कमाई करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की ग्रीन इकॉनमी और तेजी से विस्तार कर सकती है.
प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण (MBPA) ने अपने 154वें स्थापना दिवस पर ₹3,541 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की है. इन योजनाओं के तहत कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, कनेक्टिविटी मजबूत करने, मरीना और वाटरफ्रंट विकसित करने के साथ-साथ पर्यटन और गैर-पोर्ट राजस्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल की मौजूदगी में घोषित इन परियोजनाओं से मुंबई पोर्ट के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है.
₹3,541 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण ने 3,541.29 करोड़ रुपये की कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की है. इनमें बर्थ आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी अपग्रेड, कार्गो अवसंरचना का विस्तार, मरीना विकास और वाटरफ्रंट परियोजनाएं शामिल हैं. इन पहलों का उद्देश्य बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए राजस्व स्रोत विकसित करना है.
स्थापना दिवस समारोह में हुई घोषणा
इन परियोजनाओं की घोषणा मुंबई पोर्ट के 154वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान की गई. इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल मौजूद रहे. समारोह में बंदरगाह के भविष्य के विकास रोडमैप को भी प्रस्तुत किया गया.
41 नई परियोजनाओं को मिलेगी गति
प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी. इससे बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर मजबूती मिलेगी.
कार्गो क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर
प्रमुख परियोजनाओं में इंदिरा डॉक पर बर्थ का आधुनिकीकरण, कार्गो भंडारण सुविधाओं का विस्तार, क्रूड ऑयल बर्थ का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल निगरानी प्रणाली शामिल हैं. इसके अलावा रूफटॉप सोलर पैनलों की स्थापना और डिजिटलीकरण परियोजनाओं के जरिए परिचालन को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाया जाएगा.
पर्यटन और वाटरफ्रंट विकास को बढ़ावा
मुंबई पोर्ट ने मुंबई मरीना और वाटरफ्रंट परियोजना के विकास की भी योजना तैयार की है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटन, मनोरंजन और समुद्री गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे गैर-पोर्ट राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.
संपत्ति मुद्रीकरण रणनीति को मिली रफ्तार
एमबीपीए ने अपनी एसेट मॉनेटाइजेशन रणनीति के तहत इंदिरा डॉक के बर्थ क्लस्टरों के संचालन और रखरखाव के लिए समझौतों का आदान-प्रदान किया. पहले क्लस्टर के 10 बर्थ को जे एम बक्शी पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स को 10 वर्षों के लिए सौंपा गया है, जिससे 770 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. वहीं, दूसरे क्लस्टर के 11 बर्थ एम डिनशॉ एंड कंपनी को आवंटित किए गए हैं, जिससे 217 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है.
‘समग्र समुद्री अर्थव्यवस्था वाला अनूठा बंदरगाह’
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु ने कहा कि मुंबई पोर्ट देश का ऐसा बंदरगाह है, जहां एक व्यापक और समग्र समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र सफलतापूर्वक विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं बंदरगाह को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों से जबरदस्त समर्थन मिला है. सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए करीब ₹2,100 करोड़ जुटाए हैं. खास बात यह रही कि रिटेल निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों ने भी इस ऑफर में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को नई मजबूती मिली है.
दो दिनों में बिके 22.88 करोड़ शेयर
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई. इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग ₹2,084 करोड़ प्राप्त हुए. उन्होंने निवेशकों के भरोसे और उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए धन्यवाद भी दिया.
सरकार ने अपनाया ग्रीन शू ऑप्शन
सरकार ने इस OFS में ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया. इसके तहत रेलवे मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IRFC में अतिरिक्त 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई. इस कदम से सरकार को अधिक राशि जुटाने में मदद मिली. DIPAM ने OFS के लिए ₹91 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया था, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से लगभग 7.8 प्रतिशत कम था. गुरुवार को बीएसई पर IRFC का शेयर 0.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹91.78 पर बंद हुआ.
चालू वित्त वर्ष में ₹16,480 करोड़ का विनिवेश
IRFC से पहले सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान Coal India, NHPC, GIC, Central Bank of India और NLC India में भी हिस्सेदारी बेच चुकी है. इन सभी विनिवेश सौदों को मिलाकर सरकार अब तक लगभग ₹16,480 करोड़ जुटा चुकी है. इससे स्पष्ट है कि सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए. बीएसई सेंसेक्स 109.25 अंक की तेजी के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 34.35 अंक चढ़कर 24,056 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन दिन के अंत में आईटी, मेटल, ऑयल और गैस सेक्टर के शेयरों में कमजोरी और मुनाफावसूली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रह गई.
निवेशकों का भरोसा बढ़ा
IRFC के OFS को मिली मजबूत प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि सरकारी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है. रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी और संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग ने इस हिस्सेदारी बिक्री को सफल बना दिया है.
यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अद्विक लैबोरेट्रीज (Advik Laboratories Limited) और उसके प्रमोटर विकास गर्ग की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी के प्रस्तावित राइट्स इश्यू पर अंतरिम रोक लगा दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.
कोर्ट ने राइट्स इश्यू पर लगाई रोक
पटियाला हाउस कोर्ट के जिला न्यायाधीश ने Advik Laboratories को मौजूदा राइट्स इश्यू के तहत किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया है. अदालत के आदेश के अनुसार कंपनी फिलहाल:
- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास लेटर ऑफ ऑफर दाखिल नहीं कर सकेगी.
- शेयरधारकों को ऑफर से जुड़े दस्तावेज नहीं भेज सकेगी.
- सार्वजनिक या निजी सदस्यता प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकेगी.
- निवेशकों से आवेदन राशि स्वीकार नहीं कर सकेगी.
अल्पांश शेयरधारक ने दायर की याचिका
यह आदेश Fairplan Distributors Pvt. Ltd. की ओर से दायर याचिका के बाद आया है. कंपनी के पास Advik Laboratories में करीब 23.46 प्रतिशत हिस्सेदारी है. याचिकाकर्ता ने कंपनी प्रबंधन पर धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ये प्रारंभिक टिप्पणियां हैं और प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा.
चार साल में तीसरी बार फंड जुटाने की कोशिश
याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कंपनी द्वारा फंड जुटाने का यह तीसरा प्रयास था. कंपनी और उसके प्रबंधन के खिलाफ विभिन्न कानूनी मंचों पर पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त 2026 को तय की है. तब तक कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर रोक बनी रहेगी.
विकास गर्ग पर बढ़ा कानूनी दबाव
अदालत का ताजा आदेश विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों पर बढ़ते कानूनी और नियामकीय दबाव के बीच आया है. वे पहले से कई दीवानी और आपराधिक मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं.
शेयर ट्रांसफर मामले में भी जांच
वर्ष 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को GTM Builders की ओर से दायर आपराधिक शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया था. इन शिकायतों में विकास गर्ग और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर शेयरों के अनधिकृत और धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण के आरोप लगाए गए थे.
SEBI ने भी की थी कार्रवाई
बाजार नियामक SEBI भी विकास गर्ग और Advik Capital Ltd. के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. यह कार्रवाई शेयर अधिग्रहण एवं टेकओवर नियमों (SAST Regulations) के तहत जरूरी खुलासों में देरी को लेकर की गई थी. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में यह देरी 234 दिनों तक पहुंच गई थी.
CBI जांच और अन्य आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास गर्ग की पूर्व कारोबारी गतिविधियों को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं. इन मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं, शेल कंपनियों के नेटवर्क और फर्जी बिलिंग के जरिए कर चोरी से जुड़े आरोपों की भी जांच की गई है.
अदालत के आदेश से Advik Laboratories की फंड जुटाने की योजना फिलहाल रुक गई है. वहीं, विकास गर्ग से जुड़े कॉरपोरेट नेटवर्क पर विभिन्न नियामकीय एजेंसियों की जांच जारी है. अब बाजार और निवेशकों की नजर 22 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत के समक्ष कंपनी और अन्य प्रतिवादी अपना पक्ष रखेंगे.
कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र पर अमेजन (Amazon) ने एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश का ऐलान किया है. इस नई घोषणा के साथ 2030 तक कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो जाएगा. इससे भारत अमेजन के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक बाजारों में शामिल हो जाएगा.
PM मोदी से मुलाकात के बाद बड़ा ऐलान
अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की. कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
इस साल की शुरुआत में अमेजन ने 2030 तक भारत में अपने विभिन्न कारोबारों में 35 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की थी. अब अतिरिक्त 13 अरब डॉलर के निवेश के साथ कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है. कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2010 से 2030 के बीच भारत में उसका कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक पहुंच जाएगा.
AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा बड़ा फोकस
कुल निवेश में से करीब 21 अरब डॉलर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे. इसके तहत मुंबई और हैदराबाद में AWS डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाई जाएगी. इस निवेश से स्टार्टअप, उद्यमों और सरकारी संस्थानों को एआई चिप, मैनेज्ड एआई सेवाएं, सुरक्षित क्लाउड तकनीक और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी.
ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार का होगा विस्तार
अमेजन ने कहा है कि वह अपने ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार में भी निवेश जारी रखेगी. कंपनी इस वर्ष 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा डिलीवरी केंद्र शुरू करने की योजना बना रही है. इस विस्तार से देशभर में ग्राहकों तक तेज डिलीवरी सेवा पहुंचाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
रोजगार और छोटे कारोबारों को मिलेगा लाभ
कंपनी का कहना है कि यह निवेश रोजगार सृजन, छोटे व्यवसायों के डिजिटलीकरण और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगा. अमेजन का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बन सकता है.
क्या बोले एंडी जेसी
एंडी जेसी ने कहा कि भारत में अमेजन की व्यावसायिक प्राथमिकताएं देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी एआई को आम लोगों तक पहुंचाने, छोटे व्यवसायों को डिजिटल बनाने, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि अमेज नप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित है और देश की विकास यात्रा में दीर्घकालिक भागीदार बना रहेगा.