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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी: 45 महीनों के निचले स्तर पर PMI, फिर भी ग्रोथ जारी
मार्च 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी ग्रोथ में है, लेकिन उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है. बढ़ती लागत, सप्लाई चेन दबाव और कमजोर वैश्विक मांग इस सुस्ती के प्रमुख कारण हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मार्च 2026 के दौरान सुस्ती देखने को मिली है. S&P Global के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 53.9 पर आ गया, जो पिछले 45 महीनों का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, यह अभी भी 50 के ऊपर है, जो सेक्टर में जारी विस्तार (ग्रोथ) का संकेत देता है.
फरवरी के मुकाबले गिरावट, ग्रोथ की रफ्तार धीमी
फरवरी 2026 में PMI 56.9 था, जो मार्च में घटकर 53.9 पर आ गया. यह गिरावट दर्शाती है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की रफ्तार अब पहले की तुलना में धीमी हो गई है. यह जून 2022 के बाद सबसे कमजोर विस्तार माना जा रहा है.
उत्पादन और नए ऑर्डर बढ़े, लेकिन धीमी गति से
सर्वे के अनुसार, उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि जारी रही, लेकिन उनकी गति पहले की तुलना में कम रही. बढ़ती लागत और सप्लाई से जुड़ी समस्याओं ने उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया, जिससे कुल ग्रोथ पर दबाव पड़ा.
बढ़ती लागत बनी बड़ी वजह
ईंधन, धातु और अन्य कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है. इससे मुनाफे पर दबाव आया और उत्पादन की रफ्तार सीमित रही. इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी सेक्टर की सुस्ती की मुख्य वजह बनी हुई है.
सप्लाई चेन और वैश्विक मांग का असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि सप्लाई चेन में देरी और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव ने मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को प्रभावित किया. इसके अलावा, भारतीय उत्पादों की बाहरी मांग में कमी आने से भी ग्रोथ की गति धीमी पड़ी.
अलग-अलग सेक्टर्स में मिला-जुला प्रदर्शन
इंटरमीडिएट गुड्स और मशीनरी जैसे सेक्टर्स में ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी रही, जबकि घरेलू मांग पर आधारित सेक्टर्स जैसे कंज्यूमर गुड्स में बेहतर स्थिरता देखी गई. धीमी ग्रोथ के बावजूद कंपनियां कर्मचारियों की भर्ती जारी रखे हुए हैं. इससे संकेत मिलता है कि उद्योगों को भविष्य में मांग बढ़ने की उम्मीद है और वे उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.
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