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फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार, घरेलू मांग से 56.9 पर पहुंचा PMI
ताजा PMI आंकड़ा संकेत देता है कि चालू तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं. इससे पहले अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि 13.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने फरवरी में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है. एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI बढ़कर 56.9 पर पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. जनवरी में यह 55.4 पर था. 50 से ऊपर का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है, जिससे स्पष्ट है कि सेक्टर में तेजी बरकरार है. यह सर्वे एचएसबीसी के लिए S&P ग्लोबल द्वारा तैयार किया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू मांग में मजबूती ने नए ऑर्डर और उत्पादन को सहारा दिया.
घरेलू ऑर्डर बने वृद्धि की बड़ी वजह
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री Pranjul Bhandari के अनुसार, फरवरी का अंतिम PMI आंकड़ा विनिर्माण गतिविधियों में निरंतर तेजी का संकेत देता है. मजबूत घरेलू ऑर्डर की बदौलत उत्पादन में लगातार दूसरे महीने ठोस बढ़ोतरी दर्ज की गई. नए ऑर्डर अक्टूबर के बाद सबसे तेज गति से बढ़े. कंपनियों ने बेहतर परिचालन दक्षता, मजबूत मांग और तकनीकी निवेश को उत्पादन विस्तार का प्रमुख कारण बताया.
निर्यात मांग में नरमी
घरेलू बाजार मजबूत रहने के बावजूद निर्यात मोर्चे पर दबाव बना हुआ है. नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि दर 17 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई. यह दर्शाता है कि वैश्विक मांग अब भी सुस्त है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और बाहरी मांग में कमजोरी का असर निर्यात पर दिख रहा है. इसका प्रभाव रोजगार सृजन की गति पर भी पड़ सकता है.
कीमतों में बढ़ोतरी, रोजगार में सीमित सुधार
इनपुट लागत में वृद्धि दर स्थिर रही, लेकिन कंपनियों ने अपने उत्पादों की बिक्री कीमतों में चार महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी की. मजबूत मांग के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल रहीं. रोजगार सूचकांक भी चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा, हालांकि वृद्धि सीमित रही. केवल लगभग 4 प्रतिशत कंपनियों ने नई नियुक्तियां कीं, जिससे संकेत मिलता है कि हायरिंग अभी सतर्क रुख में है.
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
ताजा PMI आंकड़ा संकेत देता है कि चालू तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं. इससे पहले अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि 13.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी.
फरवरी के आंकड़े दर्शाते हैं कि मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है. कारोबारी विश्वास भी चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा है, जो आगे निवेश और उत्पादन गतिविधियों को गति दे सकता है.
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