होम / बिजनेस / महाकुंभ से हुआ 3 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, अब उठने लगी धार्मिक पर्यटन नीति की मांग
महाकुंभ से हुआ 3 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, अब उठने लगी धार्मिक पर्यटन नीति की मांग
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन नीति की मांग की. उन्होंने कहा कि महाकुंभ 2025 ने धार्मिक पर्यटन की 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक संभावनाएं उजागर की हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन नीति बनाने की मांग की है, उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन में बहुत बड़ी आर्थिक संभावना है. खंडेलवाल ने उदाहरण दिया कि प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में करीब 600 मिलियन (60 करोड़) तीर्थयात्रियों के आने और 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की उम्मीद है. इसलिए, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को सही तरीके से विकसित करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति जरूरी है.
धार्मिक पर्यटन से क्या होगा लाभ?
नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60% घरेलू पर्यटन धार्मिक पर्यटन होता है. वाराणसी, तिरुपति और अमृतसर जैसे शहरों में हर साल लाखों लोग आते हैं, जिससे वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होता है. लेकिन साफ-सफाई, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण कई दिक्कतें बनी रहती हैं.
भारत की गहरी आध्यात्मिक विरासत हर साल करोड़ों धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करती है. खंडेलवाल ने कहा कि धार्मिक पर्यटन आर्थिक विकास, रोजगार और संस्कृति के संरक्षण में मदद कर सकता है, लेकिन एक ठोस नीति न होने के कारण कई समस्याएं बनी रहती हैं. अगर सरकार राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन नीति बनाए, तो इससे धार्मिक स्थलों का सही विकास होगा और व्यापार, स्थानीय लोगों व पर्यटन उद्योग को नए अवसर मिलेंगे.
राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन नीति में इन मुद्दों पर किया जाए गौर
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस नई नीति में कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए:
1. आधुनिकीकरण और संरक्षण– ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की देखभाल और संरक्षण किया जाए ताकि उनकी महत्वपूर्ण विरासत बची रहे.
2. बुनियादी सुविधाओं में सुधार– तीर्थयात्रियों के लिए आवागमन, ठहरने, सफाई और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए.
3. स्थानीय व्यापार को बढ़ावा– धार्मिक पर्यटन से जुड़े हस्तशिल्प, पारंपरिक उद्योगों और छोटे व्यवसायों को समर्थन दिया जाए.
4. पर्यावरण संरक्षण– स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि धार्मिक स्थलों का पर्यावरण सुरक्षित रहे.
5. डिजिटल और स्मार्ट पर्यटन– ऑनलाइन बुकिंग, वर्चुअल टूर और डिजिटल मैपिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएं ताकि तीर्थयात्रियों का अनुभव बेहतर हो.
6. सुरक्षा और आपदा प्रबंधन– बड़े धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और आपदा प्रबंधन के लिए कारगर योजनाएं बनाई जाएं.
खंडेलवाल ने पर्यटन मंत्रालय से आग्रह किया कि वह धार्मिक संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और उद्योग विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस नीति को तैयार करे. उन्होंने कहा, "एक अच्छी तरह से बनाई गई राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन नीति भारत को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बना सकती है और साथ ही कई क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक विकास भी कर सकती है." वहीं, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन पहले से ही घरेलू यात्रा का बड़ा हिस्सा है. अगर इसे सुनियोजित तरीके से बढ़ावा दिया जाए, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है, जिससे लाखों लोगों को फायदा होगा.
टैग्स