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भारत का ज्वेलरी सेक्टर मुकाबले से नहीं, साथ मिलकर काम करने से आगे बढ़ेगा- Lucira फाउंडर

रूपेश जैन, जिन्होंने कैंडरे को बनाया, बाद में उसे कैलियन ज्वेलर्स को बेच दिया और उसकी कंपनी में मिलाने की पूरी प्रक्रिया को संभाला, अब अपनी दूसरी पारी Lucira के साथ शुरू कर रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत का आभूषण क्षेत्र एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है. पहले जहाँ गहनों को तिजोरी में रखकर सिर्फ खास मौकों पर पहना जाता था, अब वे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं. नई पीढ़ी, जिनकी आमदनी बढ़ रही है और जो डिजिटल दुनिया से अच्छी तरह जुड़ी है, अब गहनों को स्टाइल और फैशन का हिस्सा मानती है. उनके चुनाव भारी शादी के सेट्स से लेकर हल्के और रोज़ पहनने लायक गहनों तक होते हैं.

लुसीरा के संस्थापक रूपेश जैन कहते हैं, “लोग अब रोज़ाना गहने पहन रहे हैं और खरीद रहे हैं.” वे आगे कहते हैं, “हमें कुछ बहुत दिलचस्प ग्राहक समूह मिले हैं. जैसे कि आजकल की माएं जब बच्चों की स्कूल मीटिंग (PTM) में जाती हैं, तो पूरी तरह सजधज कर जाती हैं.”

इस व्यवहार में आए बदलाव के साथ-साथ लैब में बने डायमंड्स और डेमी-फाइन ज्वेलरी (जो न तो बहुत सस्ती है, न बहुत महंगी) के चलन ने पूरे ज्वेलरी बाजार को बदल दिया है. जैन, जिन्होंने पहले 12 साल डिजिटल ब्रांड कैंडरे को बनाने में लगाए, अब इस बदलाव के बीच एक बार फिर अहम भूमिका निभा रहे हैं.

तकनीक और ज्वेलरी का मेल

कैंडरे की शुरुआत 2012 में हुई, जब लोग ऑनलाइन गहने खरीदने के बारे में सोचते भी नहीं थे. जैन, जो पारंपरिक ज्वेलरी बिजनेस परिवार से आते हैं, ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई और रिटेल अनुभव को मिलाकर एक बड़ा कदम उठाया. वे कहते हैं, “उस समय कीमती गहने ऑनलाइन बेचना बहुत बड़ी बात थी. कोई व्यक्ति ऑनलाइन पेमेंट करेगा और 14 दिन में गहना मिलेगा, वो भी पूरे पैसे एडवांस में देगा – ये हैरान करने वाली बात थी.”

कंपनी को जल्दी ही मान्यता मिल गई, जब मैंगलोर से Oracle कंपनी ने बड़ा ऑर्डर दिया. लेकिन असली पहचान कंपनी की सर्विस से बनी – जैसे कि अगर किसी की अंगूठी का साइज गलत हो गया, तो उसे दोबारा नया बनाकर, बिना कोई एक्स्ट्रा चार्ज लिए भेजना. जैन बताते हैं, “तब हमें समझ आया कि रिंग का साइज एक बड़ा मुद्दा बन सकता है.”

इसके बाद कंपनी ने टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दी – हर ऑर्डर के साथ रिंग साइज मापने का टूल भेजना, ग्राहकों को जानकारी देना और आसान डिलीवरी का सिस्टम बनाना. जैन बताते हैं, “हम 8–9 साल तक पूरी तरह ऑनलाइन थे. 2022 में हमने ऑफलाइन स्टोर्स शुरू किए.”

रणनीतिक अधिग्रहण और सीख

कैंडरे का कैलियन ज्वेलर्स द्वारा अधिग्रहण एक बड़ा मोड़ था. यह साझेदारी सिर्फ पैसों के लिए नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी. जैन बताते हैं, “हम रोज़मर्रा के गहनों में थे और वे शादी के गहनों में. सोच ये थी कि हम ग्राहक को शुरुआत में पकड़ सकते हैं, और जब उनकी शादी का समय आए, तब हम उन्हें बड़े ब्रांड (कैलियन) की ओर ले जा सकते हैं.”

यह रणनीति ग्राहक के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को जोड़ने वाली थी – पहली सैलरी से लेकर पहली सगाई तक, और आखिर में शादी के लिए गहनों की खरीदारी तक. “हमारे गहनों की कीमत ज़्यादातर ₹30,000 से कम रहती थी. कैलियन ₹70,000–80,000 से ऊपर वाले गहनों पर फोकस करता था.”

जैन ने कैलियन के साथ 7 साल बिताए और इस दौरान उन्होंने कई बिजनेस की बातें सीखी. वे कहते हैं, “प्लानिंग बहुत ज़रूरी होती है, मुनाफा (profitability) बहुत मायने रखता है और सप्लाई चेन (सामान की सप्लाई और प्रबंधन) सही तरीके से चलना चाहिए.” लेकिन सबसे बड़ी सीख क्या थी? संस्कृति में अंतर. जैन बताते हैं, “हम फैसले जिस तरह लेते हैं और एक पुरानी बड़ी कंपनी जैसे कैलियन फैसले लेती है, उसमें बहुत फर्क होता है. दोनों की काम करने की संस्कृति अलग होती है.”

दूसरी पारी: सोलिटेयर और कमिटमेंट ज्वेलरी पर नया दांव

इस साल अक्षय तृतीया पर लॉन्च हुआ Lucira, जैन की दूसरी पारी है — इस बार और भी फोकस के साथ. वे कहते हैं, “कैंडरे हमेशा रोज़ पहनने वाले गहनों के लिए था, जबकि Lucira खासतौर पर इंगेजमेंट रिंग्स और वेडिंग रिंग्स के लिए होगा.”

यह ब्रांड उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो भावनाओं से जुड़ी सोलिटेयर ज्वेलरी (कीमती डायमंड रिंग्स) पसंद करते हैं. Lucira का इरादा ऑनलाइन सुविधा और ऑफलाइन स्टोर का सही मेल बनाना है. जैन बताते हैं, “इस बार हम बहुत तेज़ी से ऑफलाइन भी जाएंगे… हमारा पहला स्टोर सितंबर तक खोलने का प्लान है.”

ब्रांड लैब में बने डायमंड्स (lab-grown diamonds) पर भी खास ध्यान दे रहा है. जैन मानते हैं कि यह कैटेगरी आने वाले समय में बहुत बड़ी बनेगी. वे कहते हैं, “हमें इस बाजार में ग्राहकों को समझाने के लिए और ब्रांड्स की जरूरत है. ज़्यादा ब्रांड्स होंगे, तो ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा.”

भारत की नई ज्वेलरी सोच को तय करते ट्रेंड्स

कोविड के बाद के दौर में ग्राहक अब कीमत को लेकर सतर्क हैं और साथ ही उन्हें अच्छा अनुभव भी चाहिए. हल्के, बहुउपयोगी डिज़ाइन, अच्छी क्वालिटी वाले स्टोन और कम कीमत – यही आज के ग्राहक की पहली पसंद है. जैन कहते हैं, “भारत आज दुनिया में लैब-ग्रो डायमंड बनाने में सबसे आगे है. अब फोकस इन्हें ग्राहकों तक पहुँचाने पर है.”

वे यह भी बताते हैं कि अब नए कारणों से भी लोग गहने खरीदने लगे हैं. “देश में सगाई की अंगूठी या प्रॉमिस रिंग जैसी चीज़ें बढ़ रही हैं. लोग अब मॉल, कॉन्सर्ट या मूवी थिएटर में प्रपोज़ करना पसंद कर रहे हैं.” अब जब डेमी-फाइन ज्वेलरी और सिल्वर के गहने भी लोकप्रिय हो रहे हैं, तो ब्रांड्स को मजबूरन अपनी डिज़ाइन स्टाइल तय करनी पड़ रही है. जैन सलाह देते हैं, “अब आपको एक खास तरह की ज्वेलरी स्टाइल चुननी होगी और अपना पूरा कलेक्शन उसी के आधार पर बनाना होगा.”

जैन मानते हैं कि आने वाले समय में मार्केट और भी बंटेगा, लेकिन इसका मतलब प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि साथ काम करना होगा. वे कहते हैं, “स्टार्टअप नए प्रयोग कर सकते हैं, जल्दी सीखते हैं और सुधार करते हैं. बड़ी कंपनियों के पास ब्रांड का भरोसा, बड़ा नेटवर्क और पहुंच होती है. इसलिए दोनों का साथ में चलना ज़रूरी है.”

भविष्य की दिशा

भारत का ₹5–6 लाख करोड़ का ज्वेलरी बाजार अभी भी ज़्यादातर फाइन ज्वेलरी (कीमती सोने-हीरे के गहनों) से भरा हुआ है, जो कुल वैल्यू का करीब 65–70% है. लेकिन अब हल्के, रोज़ पहनने लायक और आसानी से खरीद सकने वाले गहनों की ओर झुकाव साफ़ दिख रहा है. इसकी वजह है ग्राहकों की सोच में बदलाव और बढ़ती लागत. जैन समझाते हैं, “डेमी-फाइन और सिल्वर ज्वेलरी में मुनाफा ज़्यादा होता है. उसके बाद हीरे की ज्वेलरी आती है, और फिर साधारण सोने की.”

Lucira के भविष्य की रणनीति में ऑनलाइन और ऑफलाइन का मजबूत मेल, ग्राहक डेटा के आधार पर डिज़ाइन में बदलाव, और खास तौर पर सोलिटेयर ज्वेलरी में तेज़ इनोवेशन शामिल है. जैन कहते हैं, “हम चाहते हैं कि हमारे आने वाले स्टोर समय के साथ और भी स्मार्ट बनें.” लेकिन सबसे अहम चीज़ है – भरोसा. जैन कहते हैं, “भरोसे का सवाल हमेशा एक जैसा ही रहता है. बाकी चीज़ों के हल जल्दी मिल जाते हैं, लेकिन भरोसा एक ऐसी चीज़ है, जिसे सिर्फ वक्त ही बना सकता है.”

(BW रिपोर्टर- रेशम सुहैल, BW डिसरप्ट और BW बिज़नेसवर्ल्ड में एडिटोरियल लीड हैं.)


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