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क्या होता है Share BuyBack, जिसका L&T और IndiaMART ने किया है ऐलान?

लार्सन एंड टुब्रो और इंडियामार्ट ने जब से शेयर बायबैक की घोषणा की है, दोनों कंपनियों के शेयर चढ़ रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां बायबैक (Share BuyBack) की पेशकश करती रहती हैं. इससे कंपनियों को तो फायदा होता ही है, निवेशकों को भी पैसा बनाने का मौका मिल जाता है. अभी 2 कंपनियां शेयर बायबैक की योजना बना रही हैं. इसमें पहला नाम है इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (Larsen and Toubro) और दूसरी कंपनी है इंडियामार्ट (IndiaMART).  

इतिहास में पहला बायबैक 
एलएंडटी (L&T) के बोर्ड की बैठक अगले हफ्ते होनी है. इसी बैठक में शेयर बायबैक पर विचार किया जाएगा. यह L&T के इतिहास में पहला शेयर बायबैक होगा. वहीं, इस खबर के सामने आने के बाद Larsen and Toubro के शेयरों में तेजी देखने को मिल रही है. खबर लिखे जाने तक कंपनी का शेयर करीब 3% की उछाल के साथ 2,558.60 रुपए पर पहुंच गया था. पिछले 5 कारोबारी सत्रों में इस शेयर ने 3.28% रिटर्न दिया है. माना जा रहा है कि अभी इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है. जून तिमाही के परिणामों को मंजूरी देने के लिए होने वाली L&T की बोर्ड मीटिंग में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए स्पेशल डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा.

इंडियामार्ट के शेयर चढ़े
उधर, इंडियामार्ट को बोर्ड से शेयर बायबैक प्लान के लिए मंजूरी मिल गई है. कंपनी की तरफ से गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है. बता दें कि ये बायबैक ऐसे समय में आ रहा है, जब कंपनी के मुनाफे में अच्छा-खासा उछाल देखने को मिला है. पहली तिमाही में नोएडा बेस्ड इस कंपनी का नेट प्रॉफिट 77% बढ़कर 83 करोड़ रुपए रहा है. बायबैक की डेट, रिकॉर्ड डेट, टाइमलाइन और दूसरी जानकारियों के बारे में अभी कंपनी ने ज्यादा कुछ नहीं बताया है. कंपनी के शेयर इस खबर के बाद से उड़ान भर रहे हैं. शुक्रवार को साढ़े 12 बजे के आसपास 7.88% की उछाल के साथ इंडियामार्ट का शेयर 3,129 रुपए पर कारोबार कर रहा था.

क्या होता है शेयर बायबैक?
अब जानते हैं कि आखिर शेयर बायबैक होता क्या है? आमतौर पर शेयर बाजार में हमें जब कोई कंपनी पसंद आती है तो हम उसके शेयर खरीद लेते हैं, तो उसे SHARE BUY करना कहते हैं. लेकिन जब यही प्रक्रिया रिवर्स हो जाए, यानी जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदना शुरू कर दे तो इसे SHARE BUYBACK कहते हैं. बायबैक दो प्रकार के होते हैं. टेंडर ऑफर बायबैक और ओपन ऑफर बायबैक. टेंडर ऑफर बायबैक के तहत कंपनी जब ये तय करती है कि वो शेयरों का बायबैक करेगी, तो एक रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया जाता है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में कंपनी के शेयर मौजूद रहते हैं वो ही निवेशक कंपनी के टेंडर ऑफर बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं. कंपनियां आमतौर पर निवेशकों को बायबैक का ऑफर मार्केट प्राइज से ज्यादा पर करती हैं, ताकि निवेशक अपना फायदा देखकर इस ऑफर में हिस्सा लें. कंपनियों की ओर से टेंडर ऑफर बायबैक के लिए 10 दिनों का समय दिया जाता है. इस दौरान शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को ऑफर करने होते हैं. 10 दिनों के बाद शेयरहोल्डर्स के पास ई-मेल के जरिए ये जानकारी मिलती है कि उनके कितने शेयर बायबैक हुए हैं. क्योंकि कंपनियां अक्सर पूरे शेयरों का बायबैक नहीं करती है.  

कैसे होता है फायदा?
इसी तरह, जब कंपनी अपने शेयरों को एक्सचेंज से खरीदती है तो उसे ओपन ऑफर बायबैक कहते हैं, जैसा कि एक आम निवेशक करता है. हालांकि कंपनी पहले से ये तय कर लेती है कि उसे कितने शेयर खरीदने हैं और किस भाव पर खरीदने हैं. कंपनी ये शेयर बायबैक की प्रक्रिया 6 महीने के दौरान पूरा करती है. इस ऑफर में आम शेयरहोल्डर्स का कोई लेना देना नहीं होता है, क्योंकि कंपनी ओपन मार्केट से शेयर खरीद रही है, ठीक वैसे ही जैसे हम और आप खरीदते हैं. अब बात करते हैं इससे निवेशकों को होने वाले फायदे की. जब कोई कंपनी शेयर बायबैक लेकर आती है, तो अक्सर उसका मकसद अपने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने का होता है. ऐसे में जो निवेशक इस शेयर बायबैक ऑफर में हिस्सा नहीं लेते हैं, उन्हें भी फायदा मिलता है, क्योंकि आमतौर पर शेयरों का प्राइज आगे चलकर बढ़ जाता है. दूसरी तरफ जो निवेशक शेयर बायबैक में हिस्सा लेते हैं उन्हें शेयर की बढ़ी हुई कीमत उसी समय मिल जाती है यानी वो भी फायदे में रहते हैं.


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