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यूरोप और अमेरिकी कंपनियां शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट नहीं, Reindustrialization को दे रही तवज्जो

बड़ी यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियां शॉर्ट-टर्म मुनाफे (छोटे समय के लाभ) से ज्यादा उद्योग को फिर से मजबूत करने (रीइंडस्ट्रियलाइजेशन) में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2025 की रिपोर्ट ‘द रिसर्जेंस ऑफ मैन्युफैक्चरिंग: रीइंडस्ट्रियलाइजेशन स्ट्रैटेजीज़ इन यूरोप एंड द यूएस’ के अनुसार, अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां अपने उद्योग को फिर से मजबूत करने पर ज़ोर दे रही हैं. इसका कारण सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं, बढ़ते टैक्स और व्यापारिक विवाद हैं. कंपनियां अब शॉर्ट-टर्म मुनाफे (छोटे समय के लाभ) से ज्यादा वैश्विक सप्लाई चेन और उत्पादन क्षमता को दोबारा व्यवस्थित करने पर ध्यान दे रही हैं. इसमें ‘रीशोरिंग’ (देश में उत्पादन लाना), ‘नियरशोरिंग’ (पास के देशों में उत्पादन बढ़ाना) और विविधता लाने (डायवर्सिफिकेशन) जैसी रणनीतियां अपनाई जा रही हैं.

लगभग 60% कंपनियों के अधिकारी इस दिशा में काम जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, भले ही लागत अधिक हो. साथ ही, 65% कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं. इसके बजाय, वे अगले तीन सालों में ‘फ्रेंडशोरिंग’ (दोस्ताना देशों में उत्पादन बढ़ाने) पर निवेश करने की योजना बना रही हैं ताकि सप्लाई चेन को सुरक्षित रखा जा सके. इस सर्वेक्षण में, जो 1 जनवरी से 20 जनवरी 2025 के बीच किया गया था, यह पाया गया कि यूरोप और अमेरिका की बड़ी कंपनियां अपने उत्पादन और सप्लाई चेन को तेजी से विविध बना रही हैं. 2024 में 59% कंपनियां इस रणनीति पर काम कर रही थीं, जबकि 2025 में यह बढ़कर दो-तिहाई (66%) हो गई हैं.

कैपजेमिनी के सीईओ ऐमन एज्ज़ट ने कहा कि "कई दशकों की वैश्वीकरण नीति के बाद, अब उत्पादन को फिर से संगठित करना जरूरी हो गया है. कंपनियां ‘फ्रेंडशोरिंग’ के जरिए अपने बाजारों के करीब उत्पादन को ले जा रही हैं. सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित करना जटिल और महंगा है, लेकिन बिजनेस लीडर्स अब नई टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं ताकि वे अनिश्चित वैश्विक माहौल में टिक सकें और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा में बने रहें. आने वाले समय में, कंपनियों को सप्लायर, टेक्नोलॉजी प्रदाताओं और सरकारों के साथ मिलकर एक मजबूत और लचीली उत्पादन प्रणाली बनानी होगी.”

बढ़ते टैक्स और सप्लाई चेन की समस्याओं से उद्योग दोबारा मजबूत करने की जरूरत

उद्योग को फिर से मजबूत करने के तीन बड़े कारण सामने आए हैं – सप्लाई चेन की मजबूती, भू-राजनीतिक चिंताएं (जैसे देशों के बीच व्यापारिक तनाव), और ग्राहकों के करीब रहना. 95% कंपनियों ने कहा कि सप्लाई चेन की समस्याएं उद्योग को फिर से संगठित करने की बड़ी वजह हैं. यह संख्या 2024 में 69% थी, जो अब बहुत बढ़ गई है. पहली बार 92% कंपनियों ने माना कि ग्राहकों के करीब रहना भी एक बड़ा कारण बन गया है.

93% कंपनियों को चिंता है कि बढ़ते टैरिफ (आयात-निर्यात पर टैक्स) से उनकी सप्लाई चेन और प्रभावित होगी. बैटरी और ऊर्जा भंडारण, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर की कंपनियां उद्योग को दोबारा खड़ा करने (रीइंडस्ट्रियलाइजेशन) और उत्पादन अपने देश में लाने (रीशोरिंग) की दिशा में तेजी से कदम उठा रही हैं.

62% कंपनियों को अगले तीन सालों में उत्पादन लागत बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन 50% कंपनियां मानती हैं कि ग्राहकों के करीब उत्पादन करने से लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की लागत कम हो सकती है. 66% कंपनियों को अब भी कुशल कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या लग रही है, और इसमें 2024 से कोई सुधार नहीं हुआ है.

अगले तीन सालों में ‘नियरशोर’ और ‘फ्रेंडशोर’ उत्पादन तेजी से बढ़ेगा

पिछले साल के दौरान, व्यापारिक नेताओं ने बताया कि उन्होंने अपने उत्पादन और सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित करने की रणनीति को और तेज किया है. 56% कंपनियों ने नियरशोरिंग (पास के देशों में उत्पादन) या रीशोरिंग और नीयशोरिंग का संयोजन में निवेश किया है, जो 2024 में 42% था. इस दिशा में यह ट्रेंड आगे भी बढ़ने की उम्मीद है. आगामी तीन सालों में, ऑनशोर (देश में उत्पादन) और नियरशोर (पास के देशों में उत्पादन) ऑपरेशंस का हिस्सा कुल उत्पादन क्षमता का 48% (7% का इजाफा) और 24% (2% का इजाफा) होने की संभावना है.

रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेंडशोरिंग (दोस्ताना देशों से उत्पादन) अगले तीन सालों में 73% कंपनियों के लिए एक मुख्य रास्ता बन सकता है. इसका हिस्सा कुल उत्पादन क्षमता में 41% (2024 में 37%) होने की संभावना है. 82% कंपनियों ने कहा कि वे अब चीन पर अपनी सप्लाई चेन की निर्भरता कम करने की योजना बना रही हैं, जो 2024 में 58% थी. कंपनियों ने अपनी रीइंडस्ट्रियलाइजेशन योजनाओं के लिए उत्तर अमेरिका, यूके, मेक्सिको, वियतनाम, भारत और उत्तर अफ्रीका जैसे देशों को लक्ष्य बनाया है.

नई टेक्नोलॉजी से उद्योग को मजबूत बनाने की रफ्तार बढ़ेगी, लागत घटेगी और इनोवेशन बढ़ेगा

अधिकांश कंपनियां (62%) अब अपने उत्पादन संयंत्रों को स्मार्ट और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर ध्यान दे रही हैं. इनमें से 50% कंपनियों ने डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके अपनी रीइंडस्ट्रियलाइजेशन प्रक्रिया में 20% से अधिक लागत बचत की है. 84% कंपनियां भविष्य में और अधिक अधुनिक उत्पादन तकनीकों में निवेश करने की योजना बना रही हैं ताकि वे और भी लागत कम कर सकें.

अगले तीन सालों में, 6 में से 10 कंपनियां डेटा और एनालिटिक्स, एआई/मशीन लर्निंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों को अपना रही हैं ताकि वे रीइंडस्ट्रियलाइजेशन को बढ़ावा दे सकें. इसके अलावा, कंपनियां उभरती हुई तकनीकों जैसे जेन एआई, 5G और एज कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन, डिजिटल ट्विन्स, और क्वांटम तकनीक पर भी विचार कर रही हैं. साथ ही, लगभग 73% कंपनियां मानती हैं कि रीइंडस्ट्रियलाइजेशन से सतत और पर्यावरण-friendly उत्पादन प्रक्रियाओं की ओर बदलाव आएगा, जो 2024 में 56% थी, इसमें काफी वृद्धि है.

रिपोर्ट की कार्यप्रणाली (मेथडोलॉजी)

कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 1 जनवरी से 20 जनवरी 2025 के बीच एक सर्वे किया. 1,401 अधिकारियों से बात की गई, जो उन कंपनियों में काम करते हैं जिनका सालाना राजस्व $1 बिलियन से ज्यादा है. ये कंपनियां अमेरिका, यूके और यूरोप (फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, नॉर्डिक देश और स्पेन) में स्थित हैं. ये कंपनियां 13 प्रमुख उद्योगों से जुड़ी हुई हैं, जो उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग से संबंधित हैं. सर्वे में शामिल अधिकारी डायरेक्टर लेवल के थे और बिजनेस, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अलग-अलग विभागों में काम करते हैं. इसके अलावा, कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बड़ी कंपनियों के सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े विशेषज्ञों का भी इंटरव्यू लिया.
 


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