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प्राइवेट जॉब्स में स्थानीय लोगों को 100% आरक्षण, इस राज्य ने उठाया बड़ा कदम
बेंगलुरु जैसे शहरों में नौकरी की चाह रखने वाले दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है. कर्नाटक सरकार ने निजी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नौकरी के लिए लोग अपना राज्य छोड़कर दूसरे राज्यों में बस जाते हैं. दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र में ऐसे लोगों की तादाद काफी ज्यादा है, जो दूसरे राज्यों से नौकरी के लिए यहां रह रहे हैं. इस वजह से समय-समय पर नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठती रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को बताया कि कर्नाटक मंत्रिमंडल ने प्राइवेट सेक्टर में कन्नड़ लोगों के लिए 100% आरक्षण अनिवार्य करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है.
इन पदों पर मिलेगा आरक्षण
सरकार के इस कदम के तहत ग्रुप C और D कैटेगरी की प्राइवेट नौकरी में 100% पद स्थानीय कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षित रहेंगे. इतना ही नहीं निजी कंपनियों से मैनेजमेंट लेवल के 50 प्रतिशत और नॉन-मैनेजमेंट लेवल के 75 प्रतिशत पदों पर स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने को कहा गया है. इसका मतलब है कि दूसरे राज्यों के लोगों के लिए अब कर्नाटक में नौकरी मुश्किल हो गई है. CM सिद्धारमैया ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के सभी निजी उद्योगों में 'C और D' ग्रेड के पदों के लिए 100% कन्नड़ लोगों की भर्ती को अनिवार्य करने वाले विधेयक को मंजूरी दी गई है. हमारी सरकार की इच्छा है कि कन्नड़ लोगों को कन्नड़ की भूमि में नौकरियों से वंचित न होना पड़े.
क्या होगी पात्रता?
सिद्धारमैया ने अपनी सरकार को कन्नड़ समर्थक बताते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता कन्नड़ लोगों के कल्याण की देखभाल करना है. विधेयक में स्थानीय उम्मीदवार को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका जन्म कर्नाटक में हुआ हो, 15 वर्ष से अधिक समय से यहां रह रहा हो और अच्छी तरह से कन्नड़ बोलने, पढ़ने और लिखने में सक्षम हो. इसके साथ ही उम्मीदवार के पास कन्नड़ भाषा के साथ माध्यमिक विद्यालय का प्रमाणपत्र होना चाहिए. यदि ऐसा नहीं है, तो उन्हें सरकार द्वारा अधिसूचित नोडल एजेंसी द्वारा कन्नड़ भाषा के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवीणता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी.
छूट का भी है प्रावधान
सरकार के नए विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर पर्याप्त संख्या में स्थानीय उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, तो कंपनियां छूट के लिए आवेदन कर सकती हैं. हालांकि, विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रबंधन श्रेणियों के लिए छूट 25% से कम नहीं होगी और गैर-प्रबंधन श्रेणियों के लिए इसे 50% कम नहीं रखा जाएगा. राज्य सरकार के इस फैसले पर अब तक उद्योग संघ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. प्राइवेट कंपनियों अक्सर सक्षम वर्क फोर्स न मिलने का हवाला देकर दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को नौकरियों में तवज्जो देती रही हैं,जो अब उनके लिए मुश्किल हो जाएगा.
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