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खुले आसमान में ऊंची उड़ान भर रहा है JRD Tata का वो 'बच्चा'
29 जुलाई 1904 को फ्रांस में जन्मे JRD की पढ़ाई 4 देशों में हुई थी. उनके पिता टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई और बिजनेस पार्टनर थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
टाटा समूह (Tata Group) आज जिस बुलंदी पर है, उसमें जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD TATA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. भले ही समूह के सिर से उनका साया काफी पहले ही जुदा हो गया था, लेकिन तब तक वह टाटा ग्रुप की बुनियाद को इतना मजबूत बना गए थे कि बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी समूह आसानी से झेल गया और आज एक अलग पहचान के साथ देश का गौरव बढ़ा रहा है. JRD ने अपने कार्यकाल में टाटा ग्रुप की 14 नई कंपनियों की शुरुआत की थी, लेकिन उनके दिल के सबसे करीब थी Tata Airline, जिसे आज हम एयर इंडिया के नाम से जानते हैं.
15 साल की उम्र में देखा सपना
JRD टाटा ने 15 साल की उम्र में ही ऊंची उड़ान का सपना देखा था, जिसे उन्होंने 1932 में Tata Airline की स्थापना करके पूरा किया. भारत को पहली एयरलाइन (Airlines) देने का श्रेय उन्हें ही जाता है. इससे पहले जब, 1930 में बॉम्बे हाउस में बॉम्बे, अहमदाबाद और कराची को जोड़ने वाली एयरमेल सर्विस की शुरुआत हुई, तो टाटा समूह के तत्कालीन चैयरमैन दोराबजी टाटा ने इसकी जिम्मेदारी JRD को सौंपी. इसकी पहली उड़ान के तौर पर JRD खुद विमान को कराची से लेकर बॉम्बे आए थे. हालांकि, विमान में यात्री नहीं बल्कि चिट्ठियां थीं. Tata Airline, जेआरडी के लिए केवल एक एयरलाइन ही नहीं, बल्कि उनके बच्चे की तरह थी, जिसे वह सबसे काबिल बनाना चाहते थे.
लंबी नहीं रही अपने 'बच्चे' से दूरी
Tata Airline का नाम बाद में बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड रख दिया. आजादी के बाद सरकार ने इस एयरलाइन की 49% हिस्सेदारी खरीद ली. इसके बाद घरेलू सेवा के लिए इंडियन एयरलाइंस और विदेश के लिए एयर इंडिया को पेश किया गया. सरकार के हाथों में कमान जाने से JRD टाटा मायूस थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी यह अच्छे से समझते थे कि एयर इंडिया की तरक्की के लिए JRD का साथ जरूरी है, इसलिए उन्होंने उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. इस तरह, JRD अपने 'बच्चे' के करीब रहे और उसे भविष्य के लिए तैयार करते रहे. नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने भी जेआरडी टाटा को एयर इंडिया का अध्यक्ष बनाए रखा. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले मोरारजी देसाई ने जेआरडी टाटा को एयर इंडिया से बर्खास्त कर दिया. हालांकि, JRD और एयर इंडिया की दूरी ज्यादा लंबी नहीं चली, 1980 में जैसे ही इंदिरा गांधी सत्ता में लौंटी, उन्होंने सबसे पहले JRD टाटा को उनकी पुरानी कुर्सी लौटा दी .
बिना सैलरी के करते रहे काम
बताया जाता है कि JRD टाटा जब तक एयर इंडिया के चेयरमैन रहे, उन्होंने सरकार से उसके लिए कोई सैलरी नहीं ली. एयर इंडिया के प्रति JRD के प्यार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह खुद प्लेन में जाकर सबकुछ चेक करते थे, यहां तक कि टॉयलेट का जायजा भी लेते थे और यदि कुछ गड़बड़ दिखती थी, तो खुद ठीक भी कर दिया करते थे. अपनी हर विमान यात्रा के बाद वह कर्मचारियों के लिए एक नोट छोड़कर जाते थे. जिसमें यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और एयरलाइंस स्टाफ के लिए कुछ सुझाव होते थे. JRD टाटा ने 1932 में जिस 'बच्चे' को चलना सिखाया था, वो आज खुले आसमान में ऊंची उड़ान भर रहा है और वापस टाटा समूह का हिस्सा हो गया है.
कर्मचारियों का भी रखते थे ख्याल
बिजनेस में प्रोफेशनल को शामिल करने की शुरुआत भी सही मायनों में JRD टाटा ने ही की थी. उन्होंने 1956 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की तर्ज पर टाटा प्रशासनिक सेवा (TAS) की स्थापना की थी, जिसका मकसद टाटा ग्रुप में युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें लीडरशिप के लिए तैयार करना था. 29 जुलाई 1904 को फ्रांस में जन्मे JRD की पढ़ाई फ्रांस, जापान, इंग्लैड सहित 4 देशों में हुई थी. उनके पिता Tata Group के संस्थापक जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई और बिजनेस पार्टनर थे. लिहाजा पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बतौर इंटर्न टाटा की कंपनी में नौकरी की. 24 साल की उम्र में उन्होंने कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया. यह लाइसेंस पाने वाले वह पहले भारतीय थे. JRD को जितना प्यार बिजनेस से था, उतना ही ख्याल वो अपने कर्मचारियों का भी रखते थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ने ही सबसे पहले 8 घंटे की नौकरी तय की थी. इतना ही नहीं, कर्मचारी के साथ दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा देने की पहल भी टाटा ने ही शुरू की थी.
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