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टैक्स सिस्टम पर सवाल: अरबपतियों की जेब भारी, मिडिल क्लास पर बढ़ रहा बोझ
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ काफी ज्यादा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश के टैक्स सिस्टम (Tax System) पर सवाल उठते रहे हैं. भारतपे (BharatPe) के पूर्व प्रबंध निदेशक अश्नीर ग्रोवर ने कुछ वक्त पहले कहा था कि भारत में टैक्स देना दान देने जैसा है, क्योंकि इससे टैक्सपेयर को कोई फायदा नहीं मिलता. अब कांग्रेस लीडर जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने भी टैक्स के मुद्दे पर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे लेकर एक पोस्ट किया है. कांग्रेस लीडर का कहना है कि लोग कंपनियों की तुलना में अधिक टैक्स चुका रहे हैं. मिडिल क्लास भारी कराधान का बोझ उठा रहा है, जबकि कॉर्पोरेट करों में कटौती कर अरबपतियों की जेब में दो लाख करोड़ रुपए डाल दिए गए हैं.
याद दिलाए पुराने दिन
जयराम रमेश ने कहा कि 1 अप्रैल से 1 जुलाई 2024 तक इनकम टैक्स कलेक्शन 3.61 लाख करोड़ रुपए और ग्रॉस कोर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 2.65 लाख करोड़ रुपए था. यह उस बात की बात की पुष्टि करता है, जो हम काफी समय से कहते आ रहे हैं कि लोग कंपनियों की तुलना में ज्यादा टैक्स का भुगतान कर रहे हैं. कांग्रेस महासचिव ने UPA और NDA की सरकार की तुलना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान व्यक्तिगत आयकर का कुल संग्रह का 21 प्रतिशत था. जबकि आज यह बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है. जबकि कंपनियों पर कॉर्पोरेट कर 35% से घटकर 26% हुआ है. यानी मध्यम वर्ग की तुलना में कंपनियों पर टैक्स का बोझ काफी कम है.
निजी निवेश हुआ कम
रमेश ने कॉर्पोरेट कर की दरों को कम करने के केंद्र के 2019 के फैसले की आलोचना की. कांग्रेस नेता ने कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स में कमी इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि निजी निवेश को गति मिलेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. गौर करने वाली बात यह है कि इस दौरान निजी निवेश कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के कार्यकाल से भी नीचे आ गया. निजी निवेश यूपीए शासन के तहत 35 प्रतिशत था, जो अब 29 फीसदी से नीचे आ गया है. उन्होंने आगे कहा कि जब मनमोहन सिंह ने पद छोड़ा था, तब व्यक्तिगत आयकर कुल कर संग्रह (Personal Income Tax Collection) का 21% और कॉर्पोरेट टैक्स 35% था. आज टोटल टैक्स कलेक्शन में कॉर्पोरेट टैक्स का हिस्सा एक दशक में अपने सबसे निचले स्तर पर तेजी से गिरकर केवल 26% हो गया है. लेकिन कुल कर संग्रह में व्यक्तिगत आयकर का हिस्सा बढ़कर 28 प्रतिशत हुआ है.
केवल इन्हें मिला फायदा
कांग्रेस नेता ने कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से अरबपतियों की जेब में दो लाख करोड़ रुपए डाल दिए गए, जबकि मिडिल क्लास लगातार टैक्स का ज्यादा भार उठाने को मजबूर है. कुछ समय पहले अश्नीर ग्रोवर ने भी टैक्स के मुद्दे पर मोदी सरकार पर निशाना साधा था. वह कई मौकों पर भारत के टैक्स सिस्टम पर नाखुशी जाहिर करते रहे हैं. एक बार उन्होंने कहा था कि भारत में अगर आप 12 महीने कमाई करते हैं, तो उसमें से 5 महीने की कमाई सरकार ही रख लेती है. उन्होंने इनकम टैक्स के एक नोटिस के जवाब में सोशल मीडिया पर यहां तक लिख डाला था कि - ये टैक्स आतंकवाद है या बदले की कार्रवाई?
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