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इस बिल्डर का 16,000 करोड़ टैक्स हुआ माफ, क्या है पूरा मामला?
IL&FS एक NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) कंपनी है जिसे आज से 30 साल पहले स्थापित किया गया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
देश में पिछले एक दशक के दौरान कुछ बहुत ही बड़े घोटाले देखने को मिले हैं जिसके बाद सरकारी संस्थाएं एक्शन में आ गई हैं. देश में लगातार बढती हुई बिजनेस की संख्या के पीछे यह एक बहुत बड़ा कारण है. कई संस्थाओं के सख्त होने का फायदा बहुत से बिजनेस को भी मिल रहा है. हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक बिल्डर का 16,000 करोड़ रुपए का टैक्स माफ किया गया है.
ITAT और IL&FS
हम ITAT यानी इनकम टैक्स अपील ट्रिब्यूनल द्वारा IL&FS (Infrastructure Leasing & Financial Services) की शाखा को टैक्स पर दी गई राहत के बारे में बात कर रहे हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोएडा स्थित DND फ्लाईवे (DND Flyway) की देख-रेख IL&FS की इसी शाखा द्वारा की जाती है और DND फ्लाईवे का निर्माण भी इसी कंपनी द्वारा किया गया था. फिलहाल IL&FS एक काफी बड़ी परेशानी का सामना कर रही है.
IL&FS की परेशानी
इससे पहले कि हम कंपनी की परेशानी समझें, आइए कंपनी के बारे में थोड़ा सा जान लेते हैं. IL&FS एक NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) कंपनी है जिसे आज से 30 साल पहले स्थापित किया गया था. अगर कंपनी द्वारा बनाए गए कुछ विशेष प्रोजेक्टों की बात करें, तो दुनिया की सबसे लंबी रोड टनल (चेन्नई-नाश्री रोड टनल), GIFT (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) और नोएडा स्थित DND फ्लाईवे जैसे काफी नामी प्रोजेक्टों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं. इस वक्त कंपनी के पास कैपिटल नहीं है और इसकी वजह से कंपनी ने अपनी बहुत सी जिम्मेदारियों से मुह फेर लिया. कंपनी के नए प्रोजेक्ट धरे रह गए और अब कंपनी को जमीन अधिग्रहण और अनुमतियों में भी काफी समस्या हो रही है.
इनकम टैक्स कमिश्नर को किया चैलेंज
नोएडा स्थित DND फ्लाईवे बनाने वाली कंपनी ने इनकम टैक्स कमिश्नर द्वारा जांच में की गई वृद्धि को भी चुनौती दी थी. इस जांच में इनकम टैक्स कमिश्नर द्वारा निर्दिष्ट वापसी के रूप में 180 करोड़, कमाई पर मिलने वाली सब्सिडी के तौर पर जमीन के किराए के रूप में 1,730 करोड़ और मूल की अस्वीकृति के रुप में लगभग 16 करोड़ रुपयों की राशी दर्ज की गई थी. ITAT ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ITAT के कमिश्नर द्वारा ‘आय के नए स्त्रोत के आधार पर जांच की वृद्धि’ नहीं की जा सकती.
क्या हुआ गलत?
ITAT ने आगे कहा कि जांच करने वाले अफसर ने इनकम टैक्स कमिश्नर द्वारा जांच में की गई वृद्धि के लिए दिए गए कारणों को जांच में शामिल नहीं किया और न ही ये कारण इनकम रिटर्न का हिस्सा थे. इसीलिए ITAT की दृष्टि में जांच में की गई यह वृद्धि कानूनी रूप से गलत है.
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