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इजरायल-ईरान संघर्ष से दुनियाभर में हड़कंप: सोना 1 लाख पार, तेल महंगा और बाजार धराशायी
इजरायल-ईरान संघर्ष से उत्पन्न भू-राजनीतिक संकट से तेल और सोने की कीमतों में उछाल, शेयर बाजारों में गिरावट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बन गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर मिसाइल हमला किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव गहरा गया है. इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर देखने को मिला है. शुक्रवार को सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के उच्चतम स्तर पर हैं और शेयर बाजारों में अफरातफरी मच गई है.
हमले से उम्मीदों पर पानी, बाजारों में कोहराम
भारतीय निवेशकों के लिए शुक्रवार 13 तारीख दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुई. घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 1300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 24,500 के नीचे लुढ़क गया. निवेशकों में दहशत का माहौल रहा और बड़े पैमाने पर बिकवाली देखी गई.
बाजार पहले से ही वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव से जूझ रहे थे, ऐसे में इस हमले ने हालात और बिगाड़ दिए. इजरायल ने पुष्टि की है कि उसके हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है.
तेल की कीमतों में उबाल, सप्लाई पर संकट की आशंका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात बनने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 13% उछलकर 78.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो 27 जनवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा, तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने चेताया है कि इस स्थिति का असर अमेरिका की महंगाई दर (CPI) पर भी पड़ेगा, जो 5% तक पहुंच सकती है. भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली हो सकती है.
सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर
MCX पर सोना वायदा पहली बार ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के पार चला गया. वैश्विक तनाव और रुपये की कमजोरी के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं. ING और अन्य विशेषज्ञों ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को सोने की तेजी का प्रमुख कारण बताया है. यदि हालात और खराब होते हैं, तो सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. निवेशकों का रुझान शेयर बाजार से हटकर सोने और ट्रेजरी बांड की ओर बढ़ता दिख रहा है.
वैश्विक बाजारों में गिरावट, भारत पर दवाब
अमेरिकी बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई. डॉलर, येन और स्विस फ्रैंक जैसे सुरक्षित मुद्राओं में मजबूती आई. भारत के सरकारी बॉन्ड यील्ड पांच सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. तेल की कीमतों और सरकारी ऋण नीलामी से पहले निवेशकों में सतर्कता का माहौल है.
भारत पर इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर दिख सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
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