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5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लाएगी केंद्र सरकार, कार्बन उत्सर्जन घटाने पर रहेगा जोर
इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के इस्पात उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार अगले तीन महीनों में 5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लॉन्च कर सकती है. इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में इस्पात क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है.
कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा प्रस्ताव
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित योजना को फिलहाल 'नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर सस्टेनेबल सेकेंडरी स्टील' नाम दिया गया है. इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. योजना का लाभ सभी इस्पात उत्पादकों को मिलेगा, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सेकेंडरी स्टील निर्माताओं के लिए निर्धारित किया जा सकता है, जिनका देश के कुल इस्पात उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है.
स्वच्छ तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके. ऐसे समय में यह पहल सामने आई है, जब भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है और साथ ही पेरिस जलवायु समझौते के तहत अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति टन कच्चे इस्पात के उत्पादन पर लगभग 2.55 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि वैश्विक औसत करीब 1.9 टन प्रति टन है. इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में उत्सर्जन कम करने की बड़ी चुनौती मौजूद है.
सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलेगा अधिक लाभ
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलने की संभावना है, क्योंकि उनके पास आधुनिक और कम-कार्बन तकनीकों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत सीमित पूंजी होती है. योजना के माध्यम से ऊर्जा दक्ष प्रक्रियाओं, स्वच्छ ईंधन और नई उत्पादन तकनीकों को अपनाने में सहायता दी जाएगी, जिससे उत्सर्जन घटाने के साथ उत्पादन क्षमता भी बेहतर होगी. यह पहल सरकार के ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग अभियान और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है.
2030 के लक्ष्य और 2070 के नेट-जीरो मिशन पर फोकस
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है और सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की वार्षिक इस्पात उत्पादन क्षमता 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना भी सरकार और उद्योग दोनों के लिए बड़ी प्राथमिकता बन चुका है.
यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह इस्पात क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के लिए सरकार की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय पहलों में से एक होगी और भारत में प्रतिस्पर्धी ग्रीन स्टील इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
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