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गोल्ड लोन में तेज उछाल पर नजर रखना जरूरी, फिर भी NBFC सेक्टर मजबूत: RBI रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि NBFC क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता, पूंजी स्थिति और ऋण वसूली मजबूत बनी हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report-FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) क्षेत्र मजबूत स्थिति में है. परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, पर्याप्त पूंजी और प्रमुख ऋण श्रेणियों में घटते जोखिम के चलते सेक्टर की स्थिति बेहतर बनी हुई है. हालांकि, सोने की ऊंची कीमतों के कारण गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर रही है, जिस पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी.

सबसे तेजी से बढ़ा गोल्ड लोन सेगमेंट

एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की वृद्धि अन्य रिटेल लोन श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक रही है और इसमें NBFCs की सबसे बड़ी भूमिका रही है. वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान गोल्ड लोन की वृद्धि दर गैर-हाउसिंग रिटेल लोन की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से लगभग दोगुनी रही. वर्तमान में NBFC के कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

FY26 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो लगभग दोगुना

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 96.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि दर 54.5 प्रतिशत रही. देश में बकाया गोल्ड लोन अब कुल उपभोक्ता ऋण का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं. इसकी बड़ी वजह सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें हैं. रिपोर्ट के अनुसार, नए गोल्ड लोन का मूल्य बकाया गोल्ड लोन से करीब 13 लाख करोड़ रुपये अधिक रहा. इससे संकेत मिलता है कि कई ग्राहक पुराने लोन का नवीनीकरण (रोलओवर) कर अधिक मूल्य वाले सोने के बदले बड़ी राशि उधार ले रहे हैं.

जोखिम फिलहाल नियंत्रित, लेकिन सतर्कता जरूरी

एलारा का मानना है कि फिलहाल जोखिम नियंत्रित है क्योंकि अधिकतर ऋण मौजूदा ग्राहकों को ही दिए जा रहे हैं. नए ग्राहकों की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है, जबकि लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात 60 प्रतिशत से नीचे है. इसके बावजूद ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है तो जोखिम बढ़ सकता है.

NBFC सेक्टर की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार

रिपोर्ट में NBFC सेक्टर की समग्र स्थिति को सकारात्मक बताया गया है. विभिन्न श्रेणियों में स्लिपेज रेशियो में गिरावट दर्ज की गई है. मिडिल-लेयर NBFCs का स्लिपेज रेशियो घटकर 3 प्रतिशत रह गया है, जबकि अपर-लेयर NBFCs में यह 4.8 प्रतिशत है.

RBI का नॉन-बैंकिंग स्टेबिलिटी इंडिकेटर (NBSI) भी अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे बना हुआ है, जो प्रणालीगत जोखिम में कमी का संकेत देता है. वहीं, सेक्टर का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) करीब 24.6 प्रतिशत है, जो नियामकीय आवश्यकता से काफी अधिक है.

MSME और माइक्रोफाइनेंस में भी स्थिति बेहतर

एलारा सिक्योरिटीज ने MSME और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में भी सुधार की बात कही है. MSME पोर्टफोलियो में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) घटकर 5.4 प्रतिशत रह गई हैं. सेवा क्षेत्र में यह अनुपात केवल 3.1 प्रतिशत है.

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में भी शुरुआती स्तर का तनाव कम हुआ है. 31 से 180 दिन तक बकाया रहने वाले ऋण मार्च 2026 में घटकर 1.8 प्रतिशत रह गए, जबकि छह महीने पहले यह 4.4 प्रतिशत था. इससे उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता में सुधार का संकेत मिलता है.

उपभोक्ता ऋण बना विकास का प्रमुख आधार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू उधारी का सबसे बड़ा आधार उपभोक्ता ऋण बना हुआ है. गैर-हाउसिंग रिटेल लोन अब कुल घरेलू उधारी का 58.4 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2025 में 54.9 प्रतिशत था. वहीं, उपभोग आधारित ऋण कुल घरेलू उधारी का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का उपभोक्ता ऋण पोर्टफोलियो 22.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो बैंकों की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है.

उपभोक्ता ऋण में NBFCs का GNPA अनुपात घटकर 1.1 प्रतिशत रह गया, जबकि बैंकों में यह 1.2 प्रतिशत है. हालांकि बिजनेस लोन श्रेणी में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, लेकिन वहां भी GNPA घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गया है.

बैंकों का NBFC पर बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि NBFCs के वित्तपोषण में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है. पिछले एक वर्ष में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 43.5 प्रतिशत हो गई है, जो इस क्षेत्र में उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है. हालांकि, 50,000 रुपये से कम के छोटे व्यक्तिगत ऋण बाजार में NBFCs की हिस्सेदारी घटकर 30.7 प्रतिशत रह गई है. इस श्रेणी में फिनटेक कंपनियों का दबदबा बढ़कर 56.8 प्रतिशत हो गया है. हालांकि इस सेगमेंट में डिफॉल्ट का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है.

FY27 में इन क्षेत्रों पर रहेगी नजर

एलारा सिक्योरिटीज का मानना है कि NBFC सेक्टर में प्रणालीगत जोखिम फिलहाल नियंत्रित हैं और मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता, पर्याप्त पूंजी तथा बेहतर उधारकर्ता प्रोफाइल इसके प्रमुख कारण हैं. हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान गोल्ड लोन और MSME ऋण ऐसे दो क्षेत्र होंगे, जिन पर सबसे अधिक नजर रहेगी. यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है या आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो नियामकीय निगरानी और सख्त हो सकती है.
 


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