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RBI की 50,000 करोड़ रुपये की OMO बिक्री में 66,590 करोड़ रुपये की बोलियां
RBI ने बाजार में चल रही यील्ड से अधिक यील्ड पर सरकारी प्रतिभूतियों को स्वीकार किया. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बॉन्ड खरीदने के लिए प्रीमियम यील्ड की मांग की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 50,000 करोड़ रुपये की पहली ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बॉन्ड बिक्री को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली. नीलामी में नोटिफाइड राशि के मुकाबले 66,590 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं. केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की.
RBI ने बाजार में चल रही यील्ड से अधिक यील्ड पर सरकारी प्रतिभूतियों को स्वीकार किया. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बॉन्ड खरीदने के लिए प्रीमियम यील्ड की मांग की. यह सितंबर में RBI की कुल 1 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित OMO बिक्री की पहली किस्त है.
सरप्लस लिक्विडिटी घटाने की कोशिश
RBI सीधे तौर पर सरकारी बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से टिकाऊ लिक्विडिटी निकाल रहा है. इसका उद्देश्य वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को नीतिगत रेपो रेट 5.25% के करीब लाना है. गुरुवार को WACR करीब 5.05% रहा, जो जुलाई के अंत से लगातार रेपो रेट से नीचे बना हुआ है.
5 साल के बॉन्ड की यील्ड कट-ऑफ ज्यादा
8.28% GS 2032 बॉन्ड के लिए सबसे ज्यादा 19,700 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं. वहीं, 5 साल के 6.68% GS 2031 बॉन्ड के लिए 7,970 करोड़ रुपये की बोलियां आईं. 5 साल के सरकारी बॉन्ड की कट-ऑफ यील्ड 6.90% रही, जबकि गुरुवार को बाजार बंद होने पर इसकी यील्ड 6.78% थी. इसी तरह 6.79% GS 2029 को 6.70% की कट-ऑफ यील्ड पर स्वीकार किया गया, जबकि पिछली क्लोजिंग यील्ड 6.66% थी.
बाजार यील्ड से अधिक कट-ऑफ के बावजूद मजबूत मांग ने बॉन्ड यील्ड पर तत्काल दबाव को सीमित रखा. गुरुवार को बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7.05% पर बंद हुई.
21 और 28 सितंबर को भी OMO बिक्री
16 सितंबर को बैंकिंग सिस्टम में नेट लिक्विडिटी सरप्लस करीब 7.37 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक दिन पहले 9.85 लाख करोड़ रुपये था. इस महीने की शुरुआत में सरप्लस रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद हाल में टैक्स भुगतान और अन्य लिक्विडिटी गतिविधियों के चलते इसमें कमी आई है.
RBI अब 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये की एक और OMO बिक्री करेगा. इसके बाद 28 सितंबर को भी इतनी ही राशि की बॉन्ड बिक्री प्रस्तावित है. इसके अलावा केंद्रीय बैंक 2.25 लाख करोड़ रुपये की तीन दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑपरेशन भी कर रहा है.
RBI की ये लिक्विडिटी मैनेजमेंट कार्रवाइयां ऐसे समय में हो रही हैं जब लंबी अवधि वाली VRRR नीलामियों को अपेक्षाकृत सीमित मांग मिली है. केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर आगे भी OMO बिक्री कर सकता है, ताकि अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के साथ मौद्रिक नीति का असर मजबूत हो और शॉर्ट-टर्म बाजार दरें रेपो रेट के अनुरूप बनी रहें.
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