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भारत का निजी उपभोग बढ़कर हुआ 2.1 ट्रिलियन डॉलर, अमेरिका और चीन से भी तेज है वृद्धि
2030 तक, भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 60% योगदान उपभोक्ता खर्च का होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
Deloitte India और Retailers Association of India (RAI) ने अपनी नई रिपोर्ट "India’s discretionary spend evolution: A roadmap for brands" जारी की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में निजी उपभोग खर्च (private consumption) 2013 में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 2.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है, यानी 7.2% सालाना बढ़ोतरी. यह वृद्धि अमेरिका, चीन और जर्मनी से भी तेज है.
2030 तक, भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 60% योगदान उपभोक्ता खर्च का होगा. इससे भारत वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा.
भारत में उपभोक्ता खर्च तेजी से बदल रहा है
Deloitte India के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर, आनंद रमणाथन, ने कहा कि "भारत में उपभोक्ता आदतें तेजी से बदल रही हैं. बढ़ता वैकल्पिक खर्च (discretionary spending), डिजिटल कॉमर्स का विस्तार और कर्ज तक आसान पहुंच, ब्रांड्स के लिए बाजार में नए नियम बना रहे हैं. 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकती है, जिससे कई सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. कंपनियों को उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को समझकर संतुलन बनाना होगा—सस्ती कीमत, सुविधा और स्थिरता के बीच. डेटा और टेक्नोलॉजी का उपयोग करके व्यक्तिगत अनुभव देने वाले ब्रांड तेजी से बढ़ते इस बाजार में सफल होंगे."
RAI के CEO, कुमार राजगोपालन, ने कहा कि "भारत में उपभोक्ता खर्च एक नए विकास चरण में प्रवेश कर रहा है. बढ़ती आय, डिजिटल तकनीकों को अपनाने और उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण यह हो रहा है. यह रिपोर्ट ब्रांड्स को इन बदलावों के साथ खुद को ढालने और उपभोक्ताओं से मजबूत जुड़ाव बनाने का रास्ता दिखाती है."
भारत में उपभोक्ता खर्च बढ़ने के प्रमुख कारण
2030 तक, भारत में 10,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक कमाने वाले लोगों की संख्या 60 मिलियन (2024) से बढ़कर 165 मिलियन हो जाएगी. इससे भारत का मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ेगा और लोगों का झुकाव वैकल्पिक खर्चों की ओर ज्यादा होगा.
1. प्रीमियम ब्रांड और उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बदलाव
• बढ़ती आय के साथ, लोग अब गुणवत्ता, सुविधा और अनुभव को कीमत से ज्यादा महत्व देने लगे हैं.
• Gen Z और मिलेनियल्स (52% आबादी) इस बदलाव के बड़े कारक हैं.
• सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स, प्रीमियम ब्रांड्स और पर्सनलाइज्ड अनुभवों की मांग तेजी से बढ़ रही है.
2. डिजिटल और वित्तीय समावेशन से खर्च बढ़ रहा है
• क्रेडिट कार्ड की संख्या 2024 में 102 मिलियन से बढ़कर 2030 तक 296 मिलियन हो जाएगी.
• फिनटेक और डिजिटल पेमेंट (UPI) के कारण ई-कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोग अधिक ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं.
3. घर के खर्च के पैटर्न में बदलाव
• बढ़ती आमदनी के कारण लोग खाने-पीने से ज्यादा यात्रा, फिटनेस, फैशन, घर की सजावट और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च कर रहे हैं
• गांवों में खाने पर खर्च 60% से घटकर 47% और शहरों में 48% से घटकर 40% हो गया है.
4. संगठित खुदरा (Organised Retail) और अनुभव-आधारित खरीदारी का विस्तार
• संगठित खुदरा बाजार 10% की सालाना वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है और 2030 तक 230 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
• उपभोक्ता अब शॉपिंग मॉल, ओमनीचैनल खरीदारी और हाइपर-पर्सनलाइज्ड सर्विसेज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
भारत में डिजिटल बदलाव, बढ़ती आय और बदलती प्राथमिकताओं के कारण उपभोक्ता बाजार में तेजी से बदलाव हो रहा है. जो कंपनियां नवाचार (innovation) और डिजिटल तकनीक को अपनाकर इस बदलाव के साथ आगे बढ़ेंगी, वही इस तेजी से बढ़ते बाजार में सफल होंगी.
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