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हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में क्यों आई भारी गिरावट, कितना महत्वपूर्ण है ये खजाना?
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई है. पाकिस्तान के इस भंडार में भी कमी आई है,ल लेकिन भारत जितनी नहीं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) के मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है. आठ सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तगड़ी गिरावट दर्ज हुई है और इसी के साथ यह 11 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से से जारी आंकड़े बताते हैं कि 8 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में 4.992 अरब डॉलर की गिरावट आई है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब घटकर 593.904 अरब डॉलर रह गया है.
क्या है गिरावट का कारण?
अक्टूबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (India's Foreign Exchange Reserve) 645 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. जानकार मानते हैं कि पिछले साल तमाम वैश्विक कारणों और गिरते रुपए को संभालने के लिए RBI ने इस भंडार का इस्तेमाल किया था, जिससे यह प्रभावित हुआ है. रिजर्व बैंक के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे अहम हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियों (Foreign Currency Asset) में भी गिरावट दर्ज हुई है. 8 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 4.26 अरब डॉलर से घटकर 526.43 अरब डॉलर रह गईं हैं.
फॉरेन करेंसी असेट में भी कमी
कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां या फॉरेन करेंसी असेट (FCA) का एक महत्वपूर्ण भाग होता है. डॉलर में अभिव्यक्त किए जाने वालीं विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसे गैर-अमेरिकी मुद्राओं में आई घट-बढ़ के प्रभावों को भी शामिल किया जाता है. बात केवल इतनी भर नहीं है, भारत के गोल्ड रिजर्व (Gold Reserves) में भी कमी आई है. इसी तरह, बीते सप्ताह भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी कमी देखने को मिली है. यह 134 करोड़ डॉलर घटकर 18.06 अरब डॉलर रह गया है. यहां ये बताना भी जरूरी है कि पड़ोसी पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई है, लेकिन भारत के मुकाबले वो काफी कम है.
क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नजर रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है.
क्या है इसका उद्देश्य?
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. जैसा कि पिछले साल जुलाई में RBI ने 39 अरब डॉलर की बिक्री की थी. हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई थी. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.
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