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विदेशी निवेशकों के लिए बड़ी राहत! टैक्स नियम होंगे आसान, लोकसभा में Tax Amendment Bill 2026 पेश
इस विधेयक के जरिए विदेशी निवेशकों, फंड मैनेजरों, क्लाउड कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और कारोबार सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Tax Amendment Bill 2026) पेश किया. इस विधेयक के जरिए विदेशी निवेशकों, फंड मैनेजरों, क्लाउड कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और व्यापार के लिए अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बनेगा.
आयकर संशोधन अध्यादेश की जगह लेगा नया विधेयक
यह विधेयक जून 2026 में लागू किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश की जगह लेगा. वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के दौरान टैक्स नियमों की जटिलता और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. नया कानून अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित टैक्स व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा.
विदेशी निवेश फंडों के लिए नियम हुए आसान
सरकार ने पात्र विदेशी निवेश फंडों के लिए लागू शर्तों की संख्या 13 से घटाकर सिर्फ 5 कर दी है. इसका उद्देश्य विदेशी फंड मैनेजरों को भारत में संचालन के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उनके फंड को भारत में 'बिजनेस कनेक्शन' वाला न माना जाए. यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) समेत पूरे देश में लागू होगा.
क्लाउड कंपनियों को भी मिली बड़ी राहत
भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भी नियम सरल किए गए हैं. अब विदेशी कंपनी और डेटा सेंटर के लिए अलग से सरकारी अधिसूचना की आवश्यकता नहीं होगी. साथ ही भारतीय कंपनियां डेटा सेंटर का संचालन स्वामित्व या लीज, दोनों मॉडल के तहत कर सकेंगी. सरकार का कहना है कि इससे कारोबार करना और आसान होगा.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों को दी जा रही टैक्स छूट को 10 साल और बढ़ाकर वित्त वर्ष 2040-41 तक कर दिया गया है. यह छूट उन विदेशी कंपनियों पर लागू होगी, जो भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को पूंजीगत सामान, उपकरण और कलपुर्जे उपलब्ध कराती हैं.
पहली बार तय हुई 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' की परिभाषा
सरकार ने पहली बार 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है. इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, सब-असेंबली, हियरेबल, वियरेबल डिवाइस और उनसे जुड़े एक्सेसरीज को शामिल किया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट सप्लाई पर 15 साल की टैक्स छूट
भारत के कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट स्टोर कर भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने वाली विदेशी कंपनियों को मार्च 2041 तक 15 वर्षों के लिए पूरी टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
डायमंड ट्रेड को भी मिलेगा प्रोत्साहन
विधेयक में मुंबई और सूरत के अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों के कारोबार को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है. इसके तहत विदेशी खनन कंपनियों, साइट-होल्डर्स, ब्रोकरों, एग्रीगेटर्स और नीलामी संस्थाओं को कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर 15 साल की टैक्स छूट मिलेगी. सरकार का लक्ष्य वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित करना है.
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