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अर्थव्यवस्था ने लगाई लंबी छलांग, जनवरी में 9.2% तक बढ़ी इकोनॉमिक एक्टिविटी
आने वाले महीनों में वृद्धि बनाए रखना घरेलू खपत के रुझानों और तेल के अलावा अन्य वस्तुओं के निर्यात की बाहरी मांग पर निर्भर करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
जनवरी 2025 में भारत की आर्थिक गतिविधि में ज़ोरदार बढ़ोतरी हुई, जिससे सालाना (YoY) विकास दर 9.2 प्रतिशत तक पहुंच गई. यह पिछले तीन महीनों में सबसे ज्यादा रही. दिसंबर 2024 में यह दर 6.8 प्रतिशत थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में औसत वृद्धि 8.7 प्रतिशत रही थी.
ICRA बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर, जो तेजी से बदलते आर्थिक संकेतकों को ट्रैक करता है, उसने दिखाया कि अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में सुधार हुआ. 15 में से 10 संकेतकों में बढ़त दर्ज की गई. इस वृद्धि में कुछ मुख्य कारण थे: GST ई-वे बिलों की संख्या में इज़ाफा, बंदरगाहों पर माल ढुलाई (खासतौर पर खाद की खेप), घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी, गाड़ियों की बिक्री और दोपहिया वाहन उत्पादन में तेज़ी.
आर्थिक वृद्धि के मुख्य कारण
ICRA बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर के अनुसार, जनवरी 2025 में बंदरगाहों पर माल ढुलाई (Port Cargo Traffic) 6.2 प्रतिशत बढ़ी, जबकि दिसंबर 2024 में यह सिर्फ 3.4 प्रतिशत थी. इसका सबसे बड़ा कारण खाद (fertiliser) की शिपमेंट में 135 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी रही. GST ई-वे बिल जनरेशन भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 23.1 प्रतिशत सालाना बढ़ा, जबकि दिसंबर 2024 में यह 17.6 प्रतिशत था. घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 14.5 प्रतिशत बढ़ी, जो पिछले 16 महीनों में सबसे ज्यादा रही. इसमें महाकुंभ और बड़े कॉन्सर्ट जैसे इवेंट्स के कारण यात्रा में वृद्धि हुई.
ICRA ने यह भी बताया कि वाहन पंजीकरण (Vehicle Registration) में सुधार हुआ, जो दिसंबर 2024 में 12 प्रतिशत की गिरावट के बाद अब 7 प्रतिशत बढ़ गया.
यात्री वाहनों (Passenger Vehicles) की बिक्री 12.9 प्रतिशत बढ़ी, क्योंकि कई ग्राहकों ने दिसंबर में खरीद टाल दी थी और 2025 मॉडल खरीदने के लिए इंतजार किया था. दोपहिया वाहन उत्पादन (Two-Wheeler Production) 10.3 प्रतिशत बढ़ा, जो दिसंबर 2024 में हल्की गिरावट के बाद फिर से तेज़ी पकड़ चुका है.
संघर्ष कर रहे सेक्टर
हालांकि कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति बेहतर रही, लेकिन कुछ सेक्टरों में धीमापन देखा गया. डीजल की खपत दिसंबर 2024 में 6.0 प्रतिशत बढ़ी थी, लेकिन जनवरी 2025 में यह घटकर 4.2 प्रतिशत रह गई. पेट्रोल की खपत भी 11.1 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत हो गई. बिजली उत्पादन में 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि दिसंबर 2024 में इसमें 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. इसकी एक वजह पिछले साल के ऊंचे आंकड़े (unfavourable base effect) से तुलना हो सकती है. कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) का उत्पादन जनवरी में 0.8 प्रतिशत घट गया, जबकि दिसंबर में इसमें 0.7 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्ज की गई थी.
फरवरी 2025 का अनुमान
शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2025 में आर्थिक गतिविधि कुछ धीमी हो सकती है. वाहनों के पंजीकरण (Vehicle Registration) में गिरावट दिख रही है. 1 से 20 फरवरी के बीच औसतन 62,500 वाहन पंजीकृत हुए, जो जनवरी की तुलना में 5 प्रतिशत कम और पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत कम है. बिजली की मांग (Electricity Demand) की वृद्धि भी धीमी हुई है. 1 से 19 फरवरी के बीच यह सिर्फ 1.2 प्रतिशत बढ़ी, जबकि जनवरी में यह 2.7 प्रतिशत थी.
हालांकि जनवरी में आर्थिक गतिविधि मजबूत रही, लेकिन आने वाले महीनों में इसे बनाए रखना घरेलू उपभोग (Domestic consumption), गैर-तेल निर्यात (Non-Oil Exports) की मांग और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा.
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