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अमीरों की नई श्रेणी 'SuperBillionaire' में दो भारतीय भी शामिल, जानिए कौन हैं ये?
सुपरबिलियनेयर की श्रेणी और इस श्रेणी में शामिल अरबपतियों की संपत्ति बढ़ते हुए एक नए आर्थिक परिदृश्य को दर्शाती है, जहां अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दुनिया भर में अरबपतियों की संख्या में वृद्धि के साथ एक नई श्रेणी सामने आई है – 'सुपरबिलियनेयर', यह श्रेणी उन लोगों के लिए है, जिनकी नेटवर्थ 50 अरब डॉलर या उससे ज्यादा है. इस सूची में दुनियाभर के 24 लोग शामिल हैं, जिनमें से 16 लोग ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 100 अरब डॉलर से ज्यादा है. बता दें, अमीरों की इस नई सूची में दो भारतीय अरबपति भी शामिल हैं, तो आइए जानते हैं कौन हैं ये?
सुपर बिलियनेयर में सबसे ऊपर एलन मस्क
इस सूची में एलन मस्क का नाम सबसे ऊपर है, जिनकी संपत्ति टेस्ला, स्पेसएक्स और न्यूरालिंक जैसी कंपनियों के मालिक होने के कारण लगातार बढ़ती रहती है. उनकी संपत्ति एक औसत अमेरिकी परिवार की संपत्ति से 20 लाख गुना ज्यादा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्क का कुल नेटवर्थ अब 200 अरब डॉलर के आसपास है, जिससे वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं.
भारत के अरबपति अंबानी और अडानी भी शामिल
भारत के अरबपतियों की बात करें तो मुकेश अंबानी और गौतम अडानी का नाम भी इस सूची में शामिल है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की संपत्ति 90.6 अरब डॉलर है, जबकि अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी की संपत्ति 74.8 अरब डॉलर के आसपास बताई जाती है. इस सूची में शामिल ये भारतीय अरबपति देश की सबसे बड़ी कंपनियों के मालिक हैं और इनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा इनकी कंपनियों के शेयरों से जुड़ा हुआ है.
फ्रांस की जीडीपी के बराबर सुपरबिलियनेयर की कुल संपत्ति
वर्तमान में, इन 24 सुपरबिलियनेयर की कुल संपत्ति 3.3 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो फ्रांस की जीडीपी के बराबर है. यह संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है. इन सुपर अमीरों में से अधिकांश टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े हैं, जिनकी संपत्ति उनके द्वारा संचालित कंपनियों के शेयरों पर निर्भर करती है. इसमें एलन मस्क, अंबानी, अडानी के अलावा लगभग 160 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ अमेजन के संस्थापक और दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर के मालिक जेफ बेजोस (Jeff Bezos), लगभग 110 अरब डॉलरसंपत्ति के साथ फेसबुक के संस्थापक और सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी के मालिक मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) आदि शामिल हैं.
लग्जरी मार्केट पर असर
सुपरबिलियनेयर की बढ़ती संख्या ने दुनियाभर के लग्जरी मार्केट को भी बढ़ावा दिया है. इन लोगों के पास करोड़ों डॉलर की महंगी प्रॉपर्टी और आलीशान घर हैं. न्यूयॉर्क, मियामी और लॉस एंजेलिस जैसे शहरों में विशेष रूप से बनाए गए लग्जरी अपार्टमेंट्स और मकान तेजी से बिक रहे हैं. यह सब दर्शाता है कि अमीरों के बीच संपत्ति का केंद्रीकरण तेजी से हो रहा है.
अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती खाई
विशेषज्ञों का मानना है कि अमीरों और गरीबों के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है. अब अरबपतियों की संपत्ति कुछ ही सालों में कई गुना बढ़ जाती है, जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी है. उदाहरण के लिए, एलन मस्क और जेफ बेजोस की संपत्ति में पिछले कुछ सालों में अरबों डॉलर का उतार-चढ़ाव देखा गया है. अमेरिका में सबसे अमीर 1% लोग देश की कुल संपत्ति का 30% हिस्सा रखते हैं, जो 1980 के दशक के मुकाबले कहीं ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और बढ़ सकता है, जिससे समाज में असमानता की खाई और चौड़ी होगी.
सेल्फ-मेड अरबपति
अब के अधिकांश अरबपति 'सेल्फ-मेड' यानी अपनी मेहनत और बिजनेस से संपत्ति बनाने वाले हैं. पहले की तुलना में विरासत से संपत्ति पाने वालों की संख्या कम हो गई है. यह बदलाव टेक्नोलॉजी और ग्लोबलाइजेशन के कारण आया है, जो 1980 और 1990 के दशक में बहुत तेजी से बढ़ा है.
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