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भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग हेराफेरी की जांच शुरू, फंड मैनेजर्स ने की थी शिकायत
स्टॉक एक्सचेंजों ने कुछ ब्रोकर्स और ट्रेडर्स को पत्र भेजकर उनके ट्रेडिंग तरीकों पर स्पष्टीकरण मांगा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में कुछ ब्रोकर्स और ट्रेडर्स पर गलत तरीके से ट्रेडिंग करने का आरोप लगा है. स्टॉक एक्सचेंजों ने कुछ ब्रोकर्स और ट्रेडर्स को पत्र भेजकर उनके ट्रेडिंग तरीकों पर स्पष्टीकरण मांगा है. आरोप है कि ये लोग डेरिवेटिव्स (फ्यूचर और ऑप्शन) और नकद बाजार के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाने के लिए गलत तरीके अपना रहे थे. सूत्रों के मुताबिक, एक्सचेंजों ने ये पत्र फरवरी में भेजे थे.
हाल ही में, कुछ फंड मैनेजर्स ने बाजार नियामक SEBI को बताया कि भारत के डेरिवेटिव्स बाजार में कुछ समूह मिलकर हेराफेरी कर रहे हैं. आरोप है कि ये लोग या तो इंडेक्स को अचानक ऊपर-नीचे कर देते हैं ताकि डेरिवेटिव्स में मुनाफा कमा सकें, या फिर इसे एक सीमित दायरे में रोककर रखते हैं ताकि अपने फायदे के लिए कीमतों को नियंत्रित कर सकें.
संदिग्ध ट्रेडिंग पैटर्न
फंड मैनेजर्स का दावा है कि 1 फरवरी (बजट के दिन) को सेंसेक्स 77,506 पर था और 4 फरवरी की एक्सपायरी वाले 77,500 कॉल ऑप्शन की कीमत ₹300 थी. लेकिन 4 फरवरी को दोपहर 1:30 बजे सेंसेक्स 78,277 पर था, और 78,300 कॉल ऑप्शन की कीमत सिर्फ ₹319 थी. सामान्य स्थिति में, ऑप्शन की कीमतें इंडेक्स के मूवमेंट के हिसाब से बदलती हैं. लेकिन इन घटनाओं में कीमतों में असमानता देखी गई, जो हेराफेरी का संकेत देती है.
फंड मैनेजर्स ने यह भी पाया कि हर एक्सपायरी दिन "3-सिग्मा मूव" हो रहा था. यह एक दुर्लभ घटना होती है जो सामान्य रूप से 300 दिनों में एक बार होती है, लेकिन यह हर महीने की एक्सपायरी पर हो रही थी. उनका दावा है कि कुछ लोग जानबूझकर भारी मात्रा में ऑप्शंस खरीद रहे थे, जिससे कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती थीं, और फिर वे बाजार को अपनी मर्जी से घुमा रहे थे ताकि बड़ा मुनाफा कमा सकें.
SEBI की नई योजना
SEBI ने 24 फरवरी को एक चर्चा पत्र जारी किया, जिसका नाम था "इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की सुविधा बढ़ाना और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना". इसमें जोखिम को मापने के लिए एक नया तरीका सुझाया गया, जिसमें नए डेल्टा-बेस्ड ओपन इंटरेस्ट (OI) का उपयोग किया जाएगा, ताकि बाजार में हेराफेरी को रोका जा सके.
जर्मनी और फ्रांस में भी सामने आया को-लोकेशन ट्रेडिंग घोटाला
जैसा कि भारत में को-लोकेशन ट्रेडिंग घोटाला हुआ था, वैसे ही अब जर्मनी और फ्रांस में भी एक बड़ा विवाद सामने आया है. फ्रांस की एक हाई-स्पीड ट्रेडिंग फर्म Mosaic Finance ने जर्मनी के प्रमुख फ्यूचर एक्सचेंज Eurex पर आरोप लगाया है कि वहां कुछ ट्रेडर्स को गलत तरीके से फायदा मिल रहा है. Mosaic का दावा है कि कुछ ट्रेडर्स Eurex के निगरानी सिस्टम को चकमा देने के लिए "गलत" डेटा ऑर्डर भेज रहे हैं. इससे वे एक्सचेंज की 30,000 ऑर्डर प्रति सेकंड की सीमा को पार कर हर सेकंड लाखों ऑर्डर भेज सकते हैं और ट्रेडिंग में दूसरों से आगे रह सकते हैं.
Mosaic ने कहा कि यह समस्या पिछले तीन साल से चल रही है और उन्होंने इस पर Eurex, ESMA (यूरोपियन रेगुलेटर), जर्मनी के BaFin और फ्रांस के AMF को शिकायत दी है. Eurex ने आरोपों को खारिज किया है और कहा कि उनकी प्रणाली ठीक से काम कर रही है। लेकिन Mosaic ने खुद जांच की और पाया कि छोटे, गलत फॉर्मेट वाले ऑर्डर भेजने से सिस्टम उन्हें ब्लॉक नहीं करता, जिससे कुछ ट्रेडर्स को अनुचित लाभ मिलता है. Mosaic ने नियामकों से इस प्रथा को रोकने की अपील की है, क्योंकि यह सिर्फ नैतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका उनकी कंपनी पर बड़ा वित्तीय असर पड़ा है.
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