✕

होम / बिजनेस / अमेरिका में PERM पर रोक से भारतीय IT कंपनियों की बढ़ी चिंता, TCS-Infosys समेत 8 कंपनियां प्रभावित

अमेरिका में PERM पर रोक से भारतीय IT कंपनियों की बढ़ी चिंता, TCS-Infosys समेत 8 कंपनियां प्रभावित

अमेरिका में ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप से जुड़ी PERM प्रक्रिया पर रोक के बाद भारतीय IT कंपनियों के कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, इस कदम से मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

अमेरिका में आठ टेक्नोलॉजी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद भारतीय IT सेक्टर में ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप और कर्मचारियों की नियुक्ति रणनीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो, HCLTech, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी शामिल हैं.

अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labour) ने इन कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदनों को स्वीकार करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. यह कार्रवाई रोजगार आधारित इमिग्रेशन कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग की जांच के बीच की गई है. PERM प्रक्रिया पर रोक का सीधा असर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है, लेकिन इससे पहले से जारी H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते.

इस फैसले ने अस्थायी वर्क वीजा और स्थायी निवास की प्रक्रिया के बीच अंतर को भी चर्चा में ला दिया है. यदि यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहता है, तो कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने और अमेरिका में अपने कार्यबल की योजना बनाने से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

PERM पर रोक का IT कंपनियों पर क्या होगा असर?

PERM ग्रीन कार्ड हासिल करने की नियोक्ता प्रायोजित प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है. इसके तहत अमेरिकी नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की उपलब्धता और भर्ती से जुड़ी निर्धारित शर्तें पूरी की गई हैं. इसके बाद कर्मचारी ग्रीन कार्ड की आगे की प्रक्रिया में बढ़ सकता है.

वहीं, H-1B वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है. ऐसे में PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में काम कर रहे सभी प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी या वीजा तत्काल समाप्त हो जाएगा. इसका मुख्य असर स्थायी निवास के लिए आवेदन की प्रक्रिया पर पड़ता है.

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने कहा है कि उसे इस रोक से अपनी कार्यबल रणनीति या ग्राहकों से जुड़े कामकाज पर किसी बड़े असर की आशंका नहीं है. कंपनी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदनों की संख्या एकल अंक में रही है. TCS ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की अपनी योजना को भी दोहराया है. कंपनी स्थानीय भर्ती और कैंपस प्लेसमेंट को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानती है.

TCS का रुख बताता है कि इस फैसले का असर सभी कंपनियों पर एक जैसा होना जरूरी नहीं है. इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित कंपनी PERM प्रक्रिया का कितना इस्तेमाल करती है और अमेरिका में उसके कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति क्या है. हालांकि, कंपनियों के स्तर पर आवेदनों और प्रभावित कर्मचारियों का विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरे IT उद्योग पर पड़ने वाले असर का सटीक अनुमान लगाना फिलहाल मुश्किल है.

Nasscom ने क्या कहा?

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (Nasscom) ने इस मामले में इमिग्रेशन और कुशल कर्मचारियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को अलग-अलग मुद्दे बताया है. उद्योग संगठन के मुताबिक, भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाई है और H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है. कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में स्थानीय कार्यबल विकसित करने पर भी जोर दिया है.

Nasscom ने यह भी कहा कि H-1B वीजा पर काम करने वाले अपेक्षाकृत कम कर्मचारी PERM प्रक्रिया के जरिए स्थायी निवास हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं. संगठन के अनुसार, भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियां 80 से अधिक देशों में काम करती हैं और स्थानीय कानूनों व नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

आगे क्या बदलेगी कंपनियों की रणनीति?

PERM प्रक्रिया पर रोक का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रतिबंध कितने समय तक लागू रहता है, कितने आवेदन प्रभावित होते हैं और संबंधित कंपनियां ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर कितनी निर्भर हैं. फिलहाल, प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या और कंपनियों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय असर को लेकर स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आए हैं.

भारतीय IT कंपनियों के लिए फिलहाल सबसे अहम सवाल लंबित आवेदनों की स्थिति और स्थायी निवास की प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव का है. TCS, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों की प्रतिक्रियाओं के साथ अमेरिकी अधिकारियों की ओर से मिलने वाला अतिरिक्त स्पष्टीकरण यह तय करने में अहम होगा कि कंपनियों को अपनी भर्ती, कर्मचारी प्रतिधारण और कार्यबल नियोजन की रणनीति में कोई बदलाव करना पड़ेगा या नहीं.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

स्टारलिंक, जियो और वनवेब में मुकाबला, सैटकॉम सेक्टर में किसी कंपनी का एकाधिकार नहीं: सिंधिया

सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान कहा कि सैटकॉम क्षेत्र में किसी एक कंपनी को प्राथमिकता नहीं दी गई है. इस क्षेत्र में सेवाएं देने की इच्छुक सभी कंपनियों को जरूरी नियमों और शर्तों का पालन करना होगा.

1 hour ago

एयर इंडिया की घरेलू उड़ानों में छात्रों को 10% छूट, जानें कैसे मिलेगा लाभ

इसके अलावा सालभर चलने वाले छात्र कार्यक्रम के तहत 10 किलोग्राम अतिरिक्त सामान ले जाने की सुविधा और एक बार मुफ्त में यात्रा की तारीख बदलने का लाभ भी मिलेगा.

15 hours ago

रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब रुपया, RBI ने संभाला मोर्चा; डॉलर और कच्चे तेल का दबाव बरकरार

विदेशी पूंजी की निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर की मजबूत मांग से रुपये पर दबाव बना हुआ है. 9 अक्टूबर को रुपया शुरुआती कारोबार में 96.80 प्रति डॉलर के करीब पहुंचने के बाद संभला और 96.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

15 hours ago

दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद, 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले DMRC का फैसला

दिल्ली पुलिस की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद DMRC ने 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए हैं. अगले आदेश तक जारी रहेंगी पाबंदियां, हालांकि नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को छोड़कर अन्य प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी.

16 hours ago

डेट सिक्योरिटीज में जोखिम पहचानना होगा आसान, सेबी ने पेश किया नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर

सेबी के नए फ्रेमवर्क में डेट सिक्योरिटीज के क्रेडिट जोखिम को छह श्रेणियों में बांटा जाएगा. इसमें हरे रंग से सबसे कम जोखिम और लाल रंग से सबसे ज्यादा जोखिम का संकेत मिलेगा.

17 hours ago


बड़ी खबरें

चार हफ्तों में 51.1 अरब डॉलर घटा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है. 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भंडार 12.752 अरब डॉलर घटकर 734.606 अरब डॉलर रह गया. पिछले चार सप्ताह में इसमें कुल 51.1 अरब डॉलर की कमी आई है. इस दौरान विदेशी मुद्रा आस्तियों और सोने के भंडार के मूल्य में भी गिरावट आई है.

1 hour ago

मध्य प्रदेश के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में ₹6,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव, 18 हजार से ज्यादा रोजगार की उम्मीद

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) देश में दूरसंचार उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है.

31 minutes ago

स्टारलिंक, जियो और वनवेब में मुकाबला, सैटकॉम सेक्टर में किसी कंपनी का एकाधिकार नहीं: सिंधिया

सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान कहा कि सैटकॉम क्षेत्र में किसी एक कंपनी को प्राथमिकता नहीं दी गई है. इस क्षेत्र में सेवाएं देने की इच्छुक सभी कंपनियों को जरूरी नियमों और शर्तों का पालन करना होगा.

1 hour ago

अमेरिका में PERM पर रोक से भारतीय IT कंपनियों की बढ़ी चिंता, TCS-Infosys समेत 8 कंपनियां प्रभावित

अमेरिका में ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप से जुड़ी PERM प्रक्रिया पर रोक के बाद भारतीय IT कंपनियों के कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, इस कदम से मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होंगे.

1 hour ago

डेट सिक्योरिटीज में जोखिम पहचानना होगा आसान, सेबी ने पेश किया नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर

सेबी के नए फ्रेमवर्क में डेट सिक्योरिटीज के क्रेडिट जोखिम को छह श्रेणियों में बांटा जाएगा. इसमें हरे रंग से सबसे कम जोखिम और लाल रंग से सबसे ज्यादा जोखिम का संकेत मिलेगा.

17 hours ago