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मध्य प्रदेश के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में ₹6,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव, 18 हजार से ज्यादा रोजगार की उम्मीद
मध्य प्रदेश में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) देश में दूरसंचार उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में 31 कंपनियों ने करीब ₹5,500-6,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. इस परियोजना के पहले चरण के लिए 170 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जबकि अतिरिक्त 400 एकड़ जमीन आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सुविधाओं के विकास के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है.
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को बताया कि इस परियोजना के लिए एक स्टार्टअप समेत 31 कंपनियों ने करीब ₹5,500-6,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. सरकार अक्टूबर के अंत से पहले परियोजना का भूमिपूजन करने की तैयारी कर रही है.
दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक, इस परियोजना से 18,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. प्रस्तावित जोन में कंपनियों को एक ही स्थान पर विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), परीक्षण और प्रमाणन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. इससे कंपनियों को दूरसंचार उपकरणों के उत्पादन और व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले उनकी गुणवत्ता जांचने में मदद मिलेगी.
सिंधिया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब 30 कंपनियों और एक स्टार्टअप ने इस जोन में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केवल रुचि जताने वाली कंपनियां नहीं हैं, बल्कि यहां अपनी इकाइयां स्थापित करने की योजना बना चुकी हैं.
पहले चरण में 170 एकड़ जमीन, 400 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर विचार
परियोजना के पहले चरण के लिए 170 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. इसके अलावा कंपनियों को आवंटित करने के लिए 400 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर विचार किया जा रहा है. केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर इस परियोजना को विकसित कर रही हैं. राज्य सरकार विनिर्माण कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन भी दे रही है.
इस जोन को प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना है. इसका मतलब है कि कंपनियों को उद्योग स्थापित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और साझा सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी.
परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने पहले चरण के बुनियादी ढांचे के विकास हेतु ₹493 करोड़ की वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है. वहीं, सरकार ने परीक्षण और प्रमाणन से जुड़ी साझा प्रयोगशालाओं के विकास के लिए ₹193 करोड़ निर्धारित किए हैं. इन सुविधाओं से कंपनियों को अपने दूरसंचार उपकरणों की जांच और प्रमाणन कराने में मदद मिलेगी.
जुलाई 2026 में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार ने इस जोन के विकास के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. परियोजना को लागू करने और उसकी निगरानी के लिए दोनों सरकारों ने एक विशेष प्रयोजन इकाई (SPV) भी गठित की है.
मोबाइल फोन उत्पादन में भारत की बड़ी छलांग
सिंधिया ने कहा कि भारत अब केवल दूरसंचार तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय इसके विनिर्माण और निर्यात में भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब ₹90,000 करोड़ से बढ़कर ₹6.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.
मंत्री के मुताबिक, भारत से मोबाइल फोन का निर्यात लगभग 28 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. इसके साथ ही देश में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों की संख्या दो से बढ़कर करीब 300 हो गई है.
सरकार अब इसी विनिर्माण क्षमता को दूरसंचार उपकरणों और इससे जुड़ी दूसरी तकनीकों में भी विकसित करना चाहती है. ग्वालियर में प्रस्तावित जोन इसी रणनीति का हिस्सा है. इसका उद्देश्य राउटर, एंटीना, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और 5G तथा 6G नेटवर्क से जुड़ी तकनीकों के विनिर्माण को बढ़ावा देना है.
इससे घरेलू स्तर पर मूल्यवर्धन बढ़ाने और आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेश की प्रतिबद्धताएं कितनी जल्दी उत्पादन इकाइयों में बदलती हैं.
PLI योजना से घरेलू विनिर्माण को समर्थन
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ऐसे समय विकसित किया जा रहा है, जब सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के जरिए दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है.
सरकार के मुताबिक, इस योजना से करीब ₹1.1 लाख करोड़ की अतिरिक्त बिक्री, ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त निर्यात और 30,000 अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. PLI योजना के तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन और बिक्री बढ़ाने के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है.
प्रस्तावित ग्वालियर जोन साझा बुनियादी ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और विनिर्माण इकाइयों को एक जगह लाकर इस पहल को आगे बढ़ा सकता है. इससे दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए उत्पाद विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
स्वदेशी 4G तकनीक से 6G की तैयारी तक
सिंधिया ने भारत की स्वदेशी 4G तकनीक का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, देश में विकसित 4G टेक्नोलॉजी स्टैक को करीब 1.10 लाख टावरों पर तैनात किया जा चुका है. स्वदेशी तकनीक का विकास दूरसंचार नेटवर्क में देश की तकनीकी क्षमता मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
भारत अब 5G सेवाओं के विस्तार और 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क की तैयारी पर भी जोर दे रहा है. ऐसे नेटवर्क से औद्योगिक और कारोबारी इस्तेमाल के लिए उन्नत डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है. सिंधिया के अनुसार, देश में करीब 55 करोड़ 5G उपयोगकर्ता हैं और 2030 तक इनकी संख्या एक अरब करने का लक्ष्य है.
इसके साथ ही भारत भारत 6G एलायंस के जरिए अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक के अंतरराष्ट्रीय मानकों को विकसित करने में अधिक भागीदारी चाहता है. इस पहल में शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिभागियों को शामिल किया गया है.
ग्वालियर का प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विनिर्माण, अनुसंधान, परीक्षण और नवाचार को एक साझा औद्योगिक व्यवस्था में लाने की दिशा में काम करेगा. हालांकि, परियोजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश की घोषणाएं कितनी तेजी से वास्तविक उत्पादन, घरेलू तकनीक के विकास और निर्यात में बदलती हैं.
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