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भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूती के लिए द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने की जरूरत : वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बयान से यह स्पष्ट है कि भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में भारत को वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर देने की बात कही है. वित्त मंत्री ने कहा है कि बहुपक्षीय संस्थान कमजोर हो रहे हैं. उनका यह बयान वैश्विक व्यापार में हो रहे बड़े बदलावों के संदर्भ में था, जिसमें विशेष रूप से विश्व व्यापार संगठन (WTO) की घटती प्रभावशीलता का उल्लेख किया गया है.
बहुपक्षीय सहयोग की घटती भूमिका
सीतारमण ने गुरुवार यानी 27 फरवरी, 2025 को BS Manthan कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि आज के समय में बहुपक्षीय सहयोग धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है. उन्होंने बताया कि भारत को अपने व्यापार और निवेश के अलावा, अन्य देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि "द्विपक्षीय सहयोग अब प्रमुख एजेंडे में शामिल हो रहा है" और इसे प्राथमिकता देनी होगी. सीतारमण ने यह भी कहा कि, "बहुपक्षीय संस्थान अब अपने प्रभाव को खोते जा रहे हैं. ऐसे मुद्दों पर अब कोई प्रभावी मंच नहीं बचा है, जिनका प्रभाव एक से अधिक देशों पर पड़ता है."
वैश्विक व्यापार का पुनर्गठन
वित्त मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक व्यापार अब पूरी तरह से पुनर्गठित हो रहा है. उन्होंने कहा कि जिस ढांचे और नियमों के तहत अब तक व्यापार हो रहा था, विशेष रूप से WTO के तहत, वे अब प्रभावी नहीं रहे. उन्होंने "Most Favoured Nation (MFN)" के कांसेप्ट को भी अप्रासंगिक बताया, क्योंकि अब हर देश अपने लिए विशेष दर्जा चाहता है, और यह दर्जा उसके रणनीतिक हितों के अनुसार तय किया जाता है.
द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं का महत्व
भारत ने इस नए वैश्विक परिदृश्य में ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं की शुरुआत की है. सीतारमण ने बताया कि भारत अब द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की प्राथमिकता दे रहा है. इसके अलावा, यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बातचीत चल रही है.
भारत की भूमिका और ग्लोबल इकोनॉमी में योगदान
सीतारमण ने यह भी कहा कि, "भारत को वैश्विक पुनर्गठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी, और इसे अपनी आर्थिक स्थिति भी सुधारनी होगी." उनका मानना है कि भारत के पास तकनीक और प्रतिभा का विशाल भंडार है, जिससे यह वैश्विक वृद्धि का इंजन बन सकता है. वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को एक ऐसा देश बनना होगा जहां प्रतिभा और पूंजी दोनों आसानी से प्रवाहित हो सकें, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति मिल सके.
वित्तीय अनुशासन और ऋण प्रबंधन पर सरकार का फोकस
वित्त मंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और ऋण प्रबंधन सुधारना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा. इसके साथ ही, उन्होंने राज्य सरकारों को भी यह सुझाव दिया कि उन्हें भी इन सुधारों को गंभीरता से अपनाना चाहिए. सीतारमण ने यह भी कहा कि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, जहां हर राज्य यह महसूस करे कि उसकी अर्थव्यवस्था अन्य राज्यों से बेहतर है. यह प्रतिस्पर्धा न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगी, बल्कि समग्र राष्ट्र की ताकत को भी सुदृढ़ करेगी.
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