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पश्चिम एशिया तनाव से ऑटो सेक्टर पर बढ़ा खतरा: लागत, उत्पादन और मांग पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो भारतीय ऑटो सेक्टर को लागत बढ़ने, उत्पादन बाधित होने और मांग में सुस्ती जैसे कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय ऑटो सेक्टर पर भी दिखाई दे सकता है. अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज हाउस मैक्वायरी, JP मॉर्गन और नोमुरा ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर स्थिति लंबी चली तो ऑटो कंपनियों की लागत, उत्पादन और मांग तीनों पर दबाव बढ़ सकता है. कमोडिटी कीमतों में उछाल, गैस सप्लाई संकट और ग्लोबल शिपिंग में बाधाओं से सेक्टर की कमाई और मार्जिन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.
मैक्वायरी की रिपोर्ट: मैक्रो अनिश्चितता से ग्रोथ पर जोखिम
ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी का कहना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता का सीधा असर ऑटो सेक्टर की ग्रोथ पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, गैस सप्लाई में आई बाधाओं की वजह से मार्च महीने में कुछ कंपनियों के उत्पादन पर असर देखने को मिला है. मैक्वायरी का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो सेक्टर की मांग और मार्जिन दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. इससे ऑटो कंपनियों की कमाई पर जोखिम रहेगा और कई ऑटो शेयर बाजार में अंडरपरफॉर्म कर सकते हैं.
लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव
JP मॉर्गन के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे ऑटो कंपनियों की लागत में इजाफा होगा. इसके अलावा गैस सप्लाई में बाधा आने की स्थिति में उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. ब्रोकरेज ने यह भी चेतावनी दी है कि गैस की कमी बढ़ने पर कुछ प्लांट्स को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ सकता है. CNG सप्लाई में संभावित दिक्कतें और महंगे ईंधन के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है.
इसके साथ ही वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में बाधा आने से ऑटो कंपनियों के निर्यात पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है. JP मॉर्गन का मानना है कि गैस सप्लाई संकट के कारण बाजार में मांग कमजोर पड़ने का जोखिम भी बढ़ सकता है.
इस साल पहले से दबाव में है ऑटो इंडेक्स
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार 2026 में अब तक निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 12 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में बेंचमार्क निफ्टी में लगभग 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि JP मॉर्गन का कहना है कि मार्च महीने में ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री अभी तक मजबूत बनी हुई है. लेकिन कमजोर पड़ते कंज्यूमर सेंटीमेंट और संभावित आर्थिक दबाव से मांग में सुधार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
JP मॉर्गन की टॉप ऑटो पिक्स
इन जोखिमों के बावजूद JP मॉर्गन ने कुछ कंपनियों को अपनी टॉप पिक में रखा है. ब्रोकरेज के अनुसार मजबूत ग्रोथ संभावनाओं और आकर्षक वैल्यूएशन के चलते Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra, Hero MotoCorp और Hyundai Motor India बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं. ब्रोकरेज का कहना है कि अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद इन कंपनियों की बाजार स्थिति और मांग का आधार अपेक्षाकृत मजबूत है.
गैस सप्लाई ऑटो उत्पादन के लिए बेहद अहम
जापानी ब्रोकरेज नोमुरा के मुताबिक ऑटो इंडस्ट्री में गैस सप्लाई उत्पादन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. पेंटिंग, फर्नेस, कास्टिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसी कई प्रक्रियाओं के लिए गैस की जरूरत होती है, इसलिए कंपनियों के लिए तुरंत किसी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर शिफ्ट होना आसान नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों के पास फिलहाल सीमित इन्वेंट्री है. ऐसे में अगर गैस की कमी बढ़ती है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है. हालांकि कंपनियां छुट्टियों के दौरान प्लांट चलाकर या संसाधनों का पुनर्विनियोजन करके असर को कुछ हद तक कम करने की कोशिश कर सकती हैं.
किन कंपनियों पर ज्यादा असर का खतरा
नोमुरा का कहना है कि गैस की कमी का जोखिम पूरे ऑटो सेक्टर पर है, लेकिन कुछ कंपनियां इससे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. इनमें Maruti Suzuki, TVS Motor, Bajaj Auto, Bharat Forge, Balkrishna Industries, Apollo Tyres और Uno Minda शामिल हैं.
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