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SDGs की राह में EV इकोसिस्टम की अहम भूमिका, विशेषज्ञों ने बताई मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत

विशेषज्ञों के मुताबिक, EV इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रिड तैयारी, इंटरऑपरेबिलिटी, कुशल तकनीशियन और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देना होगा.

रितु राणा 1 month ago

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए भारत में एक मजबूत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इकोसिस्टम का निर्माण बेहद आवश्यक है. यही बात अब उद्योग विशेषज्ञों के बीच एक साझा सहमति बनती जा रही है. भारत में EV अपनाने की रफ्तार तेज जरूर हुई है, लेकिन इसे टिकाऊ और प्रभावी बनाने के लिए केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक मजबूत, विश्वसनीय और समावेशी इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ नीतियां और प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैं; एक सशक्त, भरोसेमंद और व्यापक EV इकोसिस्टम ही भारत को स्वच्छ मोबिलिटी, कम उत्सर्जन और टिकाऊ विकास की दिशा में वास्तविक प्रगति दिला सकता है.

नीतियों से आगे बढ़कर इकोसिस्टम पर जोर

इंडस्ट्री लीडर्स का मानना है कि EV सेक्टर अब शुरुआती अपनाने के चरण से आगे बढ़ चुका है और इसका अगला चरण इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय पहुंच और तकनीकी मजबूती पर निर्भर करेगा. Drivn की को-फाउंडर और सीबीओ अल्पना जैन कहती हैं, “अगर भारत चाहता है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) उसके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने में वास्तविक योगदान दें, तो हमें अपनी वर्तमान स्थिति का ईमानदारी से आकलन करना होगा. गति बन रही है, मांग भी स्पष्ट है, और FAME व PM E-DRIVE जैसी नीतियां मौजूद हैं लेकिन इकोसिस्टम अभी भी पीछे है. केवल नीतियों के सहारे हम इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकते. इस बदलाव को गति देने के लिए ऐसी वित्तीय व्यवस्था जरूरी है जो EVs को सभी के लिए सुलभ बनाए, हाईवे से आगे तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो, बैटरी तकनीक पर हमारा नियंत्रण हो, और सभी हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग हो.

एक सशक्त EV इकोसिस्टम स्वच्छ हवा, कम उत्सर्जन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। ये केवल सहायक लाभ नहीं हैं, यही हमारे मूल उद्देश्य हैं. स्वच्छ मोबिलिटी तभी संभव है जब वाहनों के साथ विश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस नेटवर्क, सप्लाई चेन और किफायती स्वामित्व के विकल्प मौजूद हों.

जैसे-जैसे हम 2030 तक EV के व्यापक उपयोग की ओर बढ़ रहे हैं, हमें केवल EVs की बिक्री पर नहीं, बल्कि उन्हें समर्थन देने की हमारी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसका अर्थ है, ग्रिड की तैयारियां, इंटरऑपरेबल चार्जर्स, कुशल तकनीशियन, और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां.

सरकार, उद्योग और निजी पूंजी को अब अलग-अलग काम करना बंद करना होगा। खासकर मेट्रो शहरों के बाहर वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर अपने आप विकसित नहीं होगा. एक सच में भविष्य-तैयार EV इकोसिस्टम न केवल हमारे परिवहन क्षेत्र को स्वच्छ बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व में भारत की सबसे मजबूत पहचान भी स्थापित करेगा.”

इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन पर फोकस

Kazam के को-फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर कहते हैं, “भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (EV) संक्रमण अब केवल अपनाने के सवाल से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर की परिपक्वता और यह कैसे उद्देश्यपूर्ण तरीके से सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाता है, इस बड़े प्रश्न पर आ गया है. आज सबसे महत्वपूर्ण प्रगति फ्लीट और कमर्शियल इलेक्ट्रिफिकेशन से हो रही है, जो उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा हैं.

100,000+ चार्जिंग पॉइंट्स, लाखों चार्जिंग सेशंस, और दर्जनों GWh स्वच्छ ऊर्जा की डिलीवरी के साथ, Kazam प्रगति देख रहा है| इस आधार पर, हम श्रेणी-2 और श्रेणी-3 शहरों में EV इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहे हैं, 3 पहिया वाहन जैसे उच्च-अपनाने वाले सेगमेंट्स (35%+ प्रवेश के साथ) को समर्थन कर रहे हैं, और राज्य-चालित बसों एवं फ्रेट ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन को तेज़ कर रहे हैं.

साथ ही, EVs अब आजीविकाओं को भी बदलने लगे हैं, क्योंकि वे सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा तक पहुंच सक्षम बना रहे हैं. यह लागत-कुशल, भारत-केंद्रित समाधानों द्वारा संभव हो रहा है, जो कम-लागत हार्डवेयर पर भी प्रभावी ढंग से काम करते हैं| इसके समानांतर, Kazam द्वारा ऑटो ड्राइवर्स के लिए 1.5 लाख से अधिक होम चार्जर्स की तैनाती ने मासिक परिचालन लागत में 25-30% तक की बचत संभव की है, जिससे सीधे तौर पर आय की स्थिरता में सुधार हुआ है.

SDGs के साथ वास्तविक तालमेल बनाने के लिए, अब फोकस केवल तैनाती से हटकर विश्वसनीयता, इंटरऑपरेबिलिटी और गहरे लास्ट-माइल एक्सेस पर होना चाहिए| इस संक्रमण का अगला चरण इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाने में है - जैसे स्मार्ट डिपो, ऊर्जा-कुशल इमारतों और सौर जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ना - ताकि लचीले और समावेशी ऊर्जा सिस्टम तैयार किए जा सके. इस प्रकार, एक मजबूत EV इकोसिस्टम केवल उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समान ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने, आजीविकाओं को समर्थन देने और बड़े पैमाने पर टिकाऊ समुदायों के निर्माण में भी योगदान देता है.”

बैटरी और तकनीकी मजबूती की बढ़ती अहमियत

Neuron Energy के को-फाउंडर और सीईओ प्रतीक कामदार कहते हैं, “जैसे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ रही है विशेषकर 2 और 3-पहिया सेगमेंट में, जो लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को संचालित करते हैं, बैटरियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बैटरियाँ केवल एक घटक नहीं हैं, बल्कि किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन के प्रदर्शन, दक्षता और आयु की रीढ़ हैं. इन वाहनों के उच्च दैनिक उपयोग को देखते हुए, बैटरी का नियमित रखरखाव, स्मार्ट चार्जिंग तरीकों और विश्वसनीय आफ्टर-सेल्स सपोर्ट, दीर्घायु, सुरक्षा और समय के साथ बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं.

ऐसे समय में जब भारतीय शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर एक गंभीर चिंता बनते जा रहे हैं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव एक व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। हालांकि, इस परिवर्तन को वास्तव में प्रभावी बनाने के लिए, इसे एक मजबूत और एकीकृत ईवी इकोसिस्टम का समर्थन मिलना चाहिए, जिसमें स्थानीय निर्माण, बैटरी नवाचार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रीसाइक्लिंग फ्रेमवर्क शामिल हों.

इस इकोसिस्टम को मजबूत करना विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा, सतत शहरों और जलवायु कार्रवाई से जुड़े लक्ष्यों के संदर्भ में, भरत के सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है.

डेटा और रिपोर्ट्स क्या कहती हैं

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पिछले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है. 2023-24 के दौरान EVs का हिस्सा कुल वाहन बिक्री में लगभग 6-7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. खासतौर पर 2-व्हीलर और 3-व्हीलर सेगमेंट इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां कई क्षेत्रों में इनकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है.

देशभर में 100,000 से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित किए जा चुके हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए यह अभी भी पर्याप्त नहीं माने जा रहे. विभिन्न रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि 2030 तक EV लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर चार्जिंग नेटवर्क विस्तार, बैटरी सप्लाई चेन को मजबूत करने और पावर ग्रिड क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी.

समन्वय और निवेश की जरूरत

विशेषज्ञों के मुताबिक, EV इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रिड तैयारी, इंटरऑपरेबिलिटी, कुशल तकनीशियन और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देना होगा. सरकार, उद्योग और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा.

जैसे-जैसे भारत 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, यह स्पष्ट है कि एक सशक्त EV इकोसिस्टम केवल उत्सर्जन में कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर आजीविका और टिकाऊ विकास की दिशा में एक मजबूत आधार भी तैयार करता है.

 


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