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रेल यात्रियों के लिए जरूरी सूचना, 1 दिसंबर से नहीं चलेंगी ये ट्रेन, जानिए क्यों?
कोहरे के चलते1 दिसंबर से भारतीय रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का संचालन रद्द करने का फैसला लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सर्दी का मौसम शुरू होते ही अब दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई इलाकों में कोहरे का प्रकोप बढ़ने लगा है. इसका असर अब ट्रेनों के संचालन पर भी हो रहा है. ऐसे में रेलवे ने फैसला लिया है कि वह 1 दिसंबर से उन इलाकों में स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई जाएगी, जहां कोहरा ज्यादा रहता है. इसके साथ ही कई ट्रेनों की स्पीड भी कम की जा सकती है. तो आइए जानते हैं कौन-कौन से क्षेत्र में ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा?
रेलवे के इन चारों जोन में सबसे अधिक कोहरा
रेलवे के 18 जोन में से चार जोन कोहरे से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. इनमें दिल्ली, लखनऊ और मुरादाबाद को कवर करने वाला नॉर्दर्न जोन शामिल है. इसके अलावा नॉर्थ-ईस्ट रेलवे, नॉर्थ-सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट रेलवे के इलाके प्रमुख हैं. कोहरे के कारण डेली चलने वाली कुछ ट्रेनों को कैंसिल भी किया जा रहा है. सुरक्षा की दृष्टि से स्पीड कम कर दी गई है. वहीं, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार जिन इलाकों में कोहरा नहीं होगा और वहां स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत महसूस हुई तो उन इलाकों में जरूरत अनुसार स्पेशल ट्रेन चलाई भी जा सकती हैं.
यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं
कोहरे और प्रदूषण के मौसम में रूटीन ट्रेनें ही समय पर चल जाएं तो अच्छा होगा. योजना यही बनाई गई है कि कोहरे के दौरान यात्रियों को कम-से-कम परेशानी हो. इसके लिए तमाम बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के खाने-पीने और बैठने के लिए लिए अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया कराने की योजना तैयार कर ली गई है.
कोहरे में ऐसे होती है ट्रेन की सुरक्षा
देश में रेलवे पारंपरिक एब्सोल्यूट सिग्नल सिस्टम की जगह धीरे-धीरे ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम को लगा रहा है. वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि कोहरे के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से यह अच्छा होगा कि रेलवे ऑटोमैटिक की जगह एब्सोल्यूट सिग्नल सिस्टम के तहत ट्रेन चलाए.इस सिस्टम में दो स्टेशनों के बीच एक ही ट्रेन को रहने की इजाजत दी जाती है, जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम में दो स्टेशनों के बीच एक से अधिक ट्रेन हो सकती हैं. कोहरे में जब लोको पायलट को आसानी से सिग्नल दिखाई नहीं देते तो ऐसे नाजुक टाइम के लिए सिग्नल का पुराना सिस्टम ही सही है. फिलहाल देश के करीब दो हजार स्टेशन एरिया में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा चुका है.
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